Movie prime

रामार्चन: Ayodhya की सड़कों पर RSS दिल्ली के स्वयंसेवकों का अनूठा घोष संचलन

 

RNE Ayodhya (UP).

रामनगरी अयोध्या में राहगीर, यात्री, दुकानदार तब हैरानी से देखते रह गए जब अचानक एक खास बैंड बजाते हुए कतारबद्ध लोगों का काफिला सामने से गुजरने लगा। RSS की गणवेश पहने वादकों की यह टोली कभी बिगुल बजाकर सावरकर की "जयस्तुते" परफॉर्म करते तो कभी बांसुरी पर "रामचंद्र कृपालु भजमन.." सुर निकलते। इन सबके बावजूद कदम बराबर मिलते। तालियों, वाहवाही, जयघोष, पुष्पवर्षा से प्रभावित हुए बगैर तय रास्ते पर आगे बढ़ते जाते।

विडियो देखने के लिए फोटो पर क्लिक करें : 

f

रामार्चनम :
 

दरअसल अयोध्या में रविवार को दिल्ली प्रांत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के घोष दल ने भव्य पथ संचलन और घोष वादन कर श्रद्धा, अनुशासन और राष्ट्रभावना का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। "रामार्चनम" नाम से हुए घोष संचलन की शुरुआत राम की पैड़ी स्थित लता चौक से हुई। पारंपरिक गणवेश में सजे स्वयंसेवक अनुशासित पंक्तियों में राम पथ से होते हुए आगे बढ़े।

कारसेवकों के साथ लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि:

घोष दल प्रमुख रजत जैन के नेतृत्व में अपराह्न सवा तीन बजे सरयू तट पर वंदन के साथ संचलन प्रारंभ हुआ। स्वयंसेवक वीणा चौक पर रुके और बलिदानी कारसेवकों के साथ स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर को स्वरांजलि अर्पित की।

ड

इसके बाद घोष दल हनुमानगढ़ी पहुंचा, जहां बजरंगबली की स्तुति की गई। रामपथ पर कुछ समय स्थिरवाद के उपरांत दल राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंचा और ‘श्रीरामार्चनम’ की विशेष प्रस्तुति दी।

भारतीय रागों पर आधारित रही घोष रचनाएं :

संचलन के दौरान शंख (बिगुल), शृंग (तूर्य), वेणु (बांसुरी) और आनक (ड्रम) जैसे पारंपरिक वाद्यों की मधुर व ओजस्वी ध्वनियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सभी घोष रचनाएं भारतीय शास्त्रीय रागों और निर्धारित तालों पर आधारित रहीं।

कार्यक्रम में वीर सावरकर रचित “जयस्तुते” सहित “राम स्तुति”, “राम भक्त ले चला रे राम की निशानी” और “श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन” की प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

जगह जगह स्वागत :

संचलन जिस मार्ग से निकला, वहां दुकानदारों और राहगीरों ने खड़े होकर घोष दल का अभिनंदन किया। लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से देशभर के लोगों ने भी इस अनुशासित आयोजन का अवलोकन किया।

रामलला का रामार्चन:

कार्यक्रम के समापन पर राम मंदिर परिसर के ग्रीन हाउस मैदान के सामने रामलला को ‘श्रीरामार्चनम्’ समर्पित किया गया। इसके बाद परकोटे के सिंह द्वार पर 45 मिनट की शाखा आयोजित की गई और स्वयंसेवकों ने दर्शन किए।

आरएसएस पदाधिकारी गोपाल राव के अनुसार, यह पथ संचलन संगठन की एकता, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। आयोजन का उद्देश्य समाज में संस्कार, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभावना को सुदृढ़ करना है।

ad222

FROM AROUND THE WEB