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आर के दास गुप्ता नहीं रहे : इन्हें मनाने भैरोंसिंह शेखावत रेलमंत्री को बीकानेर के कोटगेट लाए!

आर. के. दास गुप्ता का निधन : बीकानेर से 1977 के आखरी विधायक की विदाई.. 
 

Rudra News Express Bikaner. 
 
आर के दास गुप्ता नहीं रहे। मंगलवार सुबह आई यह सूचना हालांकि बीकानेर सहित राजस्थान के लिए दुखद थी लेकिन जिन्होंने आपातकाल देखा, भोगा है और उसकी प्रतिक्रियास्वरूप 1977 के चुनाव में देशभर से कांग्रेस का सफाया देखा है वे पूर्व विधायक आर के दास गुप्ता के निधन की क्षति को ज्यादा बेहतर समझ सकते हैं। 

..तब कांग्रेस मुक्त हुआ था बीकानेर!

तब बीकानेर के कोने-कोने में हरीश भादानी के वे गीत गूँजते थे जिन्होंने जनकवि बनाया। मसलन.. 
मरजी राज जासी
लोक राज आसी
सितत्तर री बैतरणी में 
सगळा गोता खासी.. 
मरजी राज जासी.. 

हिन्दी में इसका सामान्य अर्थ है "मनमर्जी से चलने वाले राज का अंत होगा। जनता का राज आएगा। वर्ष 1977 के आम चुनाव में सभी धुरंधर नेता, विधायक गोते खाते नजर आएंगे।" "सितत्तर री बैतरणी" मतलब 1977 का चुनाव। राजस्थान में इस विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी की सरकार बनी। बीकानेर जिले में विधानसभा की चार सीटें थी। बीकानेर, कोलायत, लूणकरणसर और नोखा। इन चारों सीटों में से एक भी कांग्रेस ने नहीं जीती।

 

77 के चार विधायक

ये तीन पहली और आखरी बार विधायक बने, आज दुनिया में नहीं : 

चार में से तीन ऐसे चुने गए जो पहली बार MLA बने। इसके साथ ही ये रोचक बात भी है कि तीनों एक बार ही एमएलए बने। ये तीन थे बीकानेर शहर से महबूब अली। नोखा सुरक्षित सीट से उदाराम हटीला और कोलायत से रामकृष्ण दास गुप्ता यानी R.K.Das Gupta. उस वक्त जो चौथे विधायक बने वे थे लूणकरणसर से मानिकचन्द सुराना जो इससे पहले भी 1962 में विधायक रह चुके थे और कुल 05 बार एमएलए रहने के साथ मंत्री भी बने। राजस्थान के दिग्गज नेता थे। दुखद बात यह है कि आज आर के दास गुप्ता के निधन के साथ ही बीकानेर ने राजस्थान विधानसभा में 77 के अपने आखरी सिपाही को खो दिया। उदाराम हटीला, महबूब अली और मानिकचंद सुराना पहले ही दुनिया से कूच कर चुके हैं। यहाँ उल्लेखनीय बात यह भी है कि आर के दास गुप्ता ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। वे जनता पार्टी से इस्तीफा देने वाले पहले विधायक थे। 

आर के दास गुप्ता मतलब संघर्ष :

आर के दास गुप्ता का नाम सुनते ही जेहन में तस्वीर उभरती है एक ऐसे शख्स की जिसका हाथ हवा में उठा हुआ है। मुट्ठी भिंची हुई। चिलचिलाती धूप में माथे पर पसीना है और बुलंद आवाज गूंजती है "जोर-जुल्म की टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है।" दरअसल बीकानेर के पिछले 06 दशक में हुए किसी भी जनहित के आंदोलन को उठाकर देखें तो उसमें ज्यादातर में प्रत्यक्ष और जहां खुद आगे नहीं या सके वहाँ परोक्ष रूप से एक शख्स हमेशा मौजूद रहा "आर के दास गुप्ता।"

कोटगेट

रेल बाइपास का मुद्दा जिसने जयपुर से दिल्ली तक को हिलाया : 

बीकानेर में आर के दास गुप्ता के नाम के साथ जुड़े सबसे बड़े आंदोलनों मे एक है कोटगेट रेलवे क्रॉसिंग। दुर्भाग्य से आज तक इस मुद्दे का समाधान नहीं हो पाया है लेकिन जब यह आंदोलन शुरू हुआ तो आर के दास अपने गिने-चुने साथियों के साथ कोटगेट पर धरना लगाकर बैठ गए। धीरे-धीरे आंदोलन परवान चढ़ने लगा। आए दिन बीकानेर में ट्रेन रोक दी जाती। बाजार बंद हुए। युवा, व्यापारी सहित सभी राजनीतिक दलों के लोग दलीय सीमा छोड़ मैदान में उतरने लगे। 

सीएम-रेलमंत्री माने तो गुप्ता बोले-कोटगेट आओ! 

तब राज्य में भारतीय जनता पार्टी की भैरोंसिंह शेखावत सरकार थी और केंद्र में जनता दल गठबंधन सरकार जिसमें सी के जाफर शरीफ रेलमंत्री थे। भैरोंसिंह शेखावत के साथ गुप्ता पहली सरकार के कार्यकाल में विधायक रहे थे। वे जानते थे कि ये संघर्ष बड़े कदम उठाए बगैर शांत नहीं होगा। उन्होंने बार-बार गुप्ता से बात की। आखिरकार केंद्र में बात कर रेलमंत्री सी के जाफर शरीफ को मसला बताया। शरीफ ने समाधान की हामी भरी लेकिन गुप्ता इस बात पर अड़ गए कि सीएम और रेलमंत्री दोनो बीकानेर के कोटगेट पर आकर जनता के सामने वादा करें।

 

कोटगेट

आखिरकार भैरोंसिंह शेखावत रेलमंत्री शरीफ को बीकानेर लाए  :

भैरोंसिंह सुलझे हुए नेता थे और जनमन के साथ आंदोलन का महत्व भी समझते थे। उन्होंने रेलमंत्री को बीकानेर आने के लिए राजी किया। खुद साथ आए। कोटगेट पर दोनों ने मुआयना किया और समाधान का वादा किया। यह जुदा बात है कि बाद में सरकार बदली और रेल बाइपास का वादा आज तक पूरा नहीं हो पाया।

संघर्ष का साथी खोया : 

इससे पहले बीकानेर में यूनिवर्सिटी खोलने का आंदोलन हो या रवींद्र रंगमंच का मुद्दा। हाईकोर्ट बेंच की मांग हो या हवाई सेवा से जुड़ाव। हर मुद्दे में कहीं न कहीं आर के दास गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। गुप्ता अविवाहित रहे और अपना पूरा जीवन संघर्ष के नाम कर गए।  राजस्थान ने आज वो जुझारू नेता खो दिया जो कभी पद के पीछे नहीं भागा, सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।

निधन पर शोक : मंत्री अर्जुनराम, सुमित गोदारा ने जताया शोक : 

बीकानेर के सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने गुप्ता के निधन पर शोक जताया है। मेघवाल ने कहा, पूर्व विधायक, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं बीकानेर बार संघ के पूर्व अध्यक्ष आर.के. दास गुप्ता जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। बीकानेर के विकास एवं जनहित के लिए उनका समर्पण तथा क्षेत्र के विकास हेतु उनके प्रयास सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनका निधन बीकानेर के लिए अपूरणीय क्षति है।

राजस्थान सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि गुप्ता, आमजन के हितों के लिए सदैव संघर्षरत रहे। उन्होंने राजनीति में अनेक आयाम स्थापित किए। युवाओं के लिए उनका जीवन राजनीति की पाठशाला था। गुप्ता का निधन बीकानेर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है।

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