Paddy variety : अब धान की फसल 110 दिन में पककर होगी तैयारी, वैज्ञानिकों ने दो नई किस्म की विकसित, उत्पादन भी होगा बंपर
धान अनुसंधान केंद्र कौल के वैज्ञानिकों ने दो नई धान की किस्में विकसित की हैं, जो केवल 110 दिनों में पककर तैयार हो जाएंगी। ये किस्में, पीआर और बासमती हैं। दोनों किस्में रोग रोधी हैं और इनसे उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। विज्ञानियों का मानना है कि इन किस्मों को अपनाने से किसानों को धान की पराली जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे पर्यावरण को भी लाभ होगा और किसानों को गेहूं की बिजाई के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
पिछले कुछ वर्षों से हरियाणा और पंजाब में धान की पराली जलाने के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिससे दीपावली के आसपास प्रदूषण का स्तर भी काफी बढ़ जाता है। एनसीआर क्षेत्र में धूल और धुएं की परत जम जाती है, जिससे बच्चों और अन्य लोगों को सांस लेने में कठिनाई होती है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों के विकास के लिए हरियाणा और पंजाब के वैज्ञानिकों को प्रेरित किया है। चौधरी
चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय के रिजनल सेंटर धान अनुसंधान केंद्र कौल ने हाल ही में दो नई किस्में विकसित की हैं, जो किसानों को पराली प्रबंधन में मदद करेंगी और गेहूं की बिजाई सही समय पर करने की सुविधा प्रदान करेंगी।
रोग रोधी किस्में, गिरने की संभावना कम
वैज्ञानिकों ने एचकेआर-49 किस्म की पीआर धान विकसित की है, जो रोग रोधी है और गिरने की संभावना कम है। यह किस्म 110 दिनों में पककर तैयार हो जाएगी और इसका उत्पादन प्रति एकड़ 45 से 50 क्विंटल होगा। इसी प्रकार, एचकेआर-17422 बासमती किस्म भी 110 दिनों में तैयार होती है, जिसका उत्पादन प्रति हेक्टेयर 60 क्विंटल है।