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जन कवि धूमिल की प्रतिमा को तोड़ा, देश भर के रचनाकार आहत, गुस्से में, इसे शर्मनाक बताया

 

RNE Special.

हिंदी के जन कवि धूमिल की वाराणसी के लोहता क्षेत्र में विट्ठलपुर गांव में लगी प्रतिमा को असामाजिक तत्त्वों ने तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दिया। उनका पूरा नाम स्व सुदामा देशपांडे था, वे धूमिल के नाम से जाने जाते थे। यह सांस्कृतिक चेतना, साहित्यिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों पर बड़ा आघात है। 
 

इस घटना को लेकर देश के साहित्यिक व सांस्कृतिक जगत में जबरदस्त रोष है और वे बेहद आहत हैं। रचनाकारों का कहना है कि किसी भी रचनाकार की प्रतिमा पर प्रहार वस्तुतः उसके विचारों, उसके संघर्ष और उसकी वैचारिक उपस्थिति को अपमानित करने का प्रयास होता है। सोशल मीडिया पर अनेक साहित्यकारों ने इस घटना की निंदा की है और इसे शर्मनाक कृत्य बताया है। 
 

बीकानेर के साहित्यकारों ने इस घटना को दुखद बताया है और कहा है कि जो समाज या सरकार अपने रचनाकार को महत्त्व नहीं दे सकता वह कभी भी आगे नहीं बढ़ सकता। साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी , मधु आचार्य ' आशावादी ', कमल रंगा, नगेन्द्र किराडू, धीरेंद्र आचार्य, ब्रजरतन जोशी आदि ने इस घटना की निंदा की है।

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