Movie prime

आठ साल से तृतीय श्रेणी शिक्षक तबादलों पर है प्रतिबन्ध, सरकारें बदली मगर प्रतिबन्ध जस का तस ही रहा है

 

RNE Special.

राज्य सरकार ने तबादलों पर से प्रतिबन्ध हटाया और 5 जुलाई तक तबादले करने की छूट दी। तय अवधि तक मंत्री मनचाहे तबादले नहीं कर सके तो तबादलों की छूट भाजपा विधायकों व मंत्रियो की मांग पर 10 जुलाई तक बढ़ाई गई।
 

10 जुलाई को देर रात तक तबादलों की सूचियां निकलती रही।  थोक के भाव में लगभग सभी महकमों में तबादले हुए। चूंकि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी राज्य सरकार अब तक तबादला नीति नहीं बना पाई है, तो जाहिर है राज्यादेशों के आधार पर ही तबादले किये गए। केवल भाजपा विधायकों, पदाधिकारियों, हारे हुए उम्मीदवारों, नेताओं की डिजायर के आधार पर ही तबादले किये गए।

सर्वाधिक तबादले शिक्षा विभाग में:

सर्वाधिक तबादले शिक्षा विभाग में किये गए हैं, जो स्वाभाविक भी है। क्योंकि शिक्षा विभाग में ही सर्वाधिक राज्य कर्मचारी है। इस विभाग में तबादले पूरी तरह से डिजायर के आधार पर ही हुए हैं। शिक्षक तबादला नीति के लिए प्रयास तो दो दशक से भी अधिक समय से हो रहे हैं, मगर सफल नहीं हुए। अगर शिक्षक तबादला नीति बन जाये तो फिर विधायकों की पूछ क्या रहेगी ?

 

इस कारण इस बार भी तबादले राज्यादेशों से ही किये गए। एक मोटे अनुमान के अनुसार शिक्षा विभाग में 15000 के लगभग तबादले किये गए हैं। बाद में निकले संशोधन आदेशों को जोड़ेंगे तो यह संख्या काफी आगे निकल जायेगी। 

विधायक अब भी संतुष्ट नहीं:

भाजपा के विधायक शिक्षा विभाग में इतनी बड़ी संख्या में तबादले होने के बाद भी संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि उनके दिए नाम तबादला सूची में आये ही नहीं है। कई विधायकों ने तो इसके चलते तबादलों में छूट के 5 दिन और बढ़ाने तथा उनके दिए नाम के आदेश निकालने तक की मांग भी कर दी। 

 

इनमें से कुछ विधायकों की ईच्छा पूर्ति तो संशोधन आदेशों में पूरी की गई है। तभी तो शिक्षा विभाग के तबादलों की संख्या बढ़ी है। कुछ भाजपा विधायक तो अब भी नाराज ही चल रहे है। हालांकि, संशोधन आदेश तो पिछली तारीख में चलते रहने के आसार तो बने हुए ही है। यह प्रक्रिया तो हर राज में चलती ही रहती है। 

तृतीय श्रेणी शिक्षक तबादलों पर रोक यथावत:

8 साल हो गए, तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले हो ही नहीं रहे हैं। उन पर लगी रोक हटाने का साहस न तो वसुंधरा सरकार ने किया और न अशोक गहलोत की सरकार ने। भजनलाल सरकार ने भी इन शिक्षकों के तबादले पर अभी तक रोक लगा रखी है। उसे हटाने का साहस नहीं किया है। भाजपा के एक विधायक राजेन्द्र मीणा ने सीएम को पत्र लिखकर तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों पर से रोक हटाने की मांग भी है।

इन शिक्षकों को राहत जरूरी:

दरअसल शिक्षा विभाग में सर्वाधिक संख्या में तृतीय श्रेणी शिक्षक है और वे रिक्त पद मिलने के कारण दूरस्थ जिलों में ही नियुक्ति पा सके। यदि इन कम वेतन वाले शिक्षकों को यदि गृह जिले या उसके समीप पदस्थापित किया जाता है तो वे बेहतर सेवाएं दे सकते हैं।

FROM AROUND THE WEB