वड़ा पाव डे: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की पोस्ट में दिखी मुंबई की दो खास पहचान
Rudra News Express Mumbai-New Delhi.
वर्ल्ड वड़ा पाव डे के मौके पर रेल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुंबई के सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड वड़ा पाव का जश्न मनाते हुए एक खास पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में मुंबई की दो प्रतिष्ठित पहचान—वड़ा पाव और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT)—एक ही फ्रेम में नजर आईं।
ऐतिहासिक छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस की पृष्ठभूमि में वड़ा पाव की तस्वीर ने मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी, स्थानीय संस्कृति और शहर के खास अंदाज को बखूबी सामने रखा। रेल मंत्री की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर मुंबई के लोकप्रिय स्वाद और उसकी ऐतिहासिक विरासत के अनोखे संगम के रूप में ध्यान खींच रही है।
मुंबई की पहचान से जुड़ा स्वाद:
वड़ा पाव मुंबई के लिए महज एक स्ट्रीट फूड नहीं, बल्कि शहर की रोजमर्रा की जिंदगी और खान-पान की संस्कृति का अहम हिस्सा है। कम कीमत, स्वाद और आसानी से उपलब्ध होने के कारण यह मुंबईवासियों के साथ देशभर से आने वाले लोगों के बीच भी बेहद लोकप्रिय है।
वहीं, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुंबई की ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत का प्रमुख प्रतीक है। ऐसे में वड़ा पाव और CSMT को एक साथ दिखाती तस्वीर मुंबई के उस अंदाज को सामने लाती है, जहां इतिहास, विरासत, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी एक साथ दिखाई देती है।
रेल मंत्री की पोस्ट ने खींचा ध्यान:
अश्विनी वैष्णव ने वर्ल्ड वड़ा पाव डे के अवसर पर मुंबई के इस पसंदीदा स्नैक के प्रति जुड़ाव को तस्वीर के जरिए जाहिर किया। पोस्ट में नजर आ रहा वड़ा पाव और पीछे दिखाई देता ऐतिहासिक CSMT मुंबई की विशिष्ट पहचान को बेहद सहज अंदाज में पेश करता है।
वड़ा पाव की कहानी: मुंबई की गलियों से देशभर में छाया, जानिए 23 अगस्त का कनेक्शन !
वर्ल्ड वड़ा पाव डे हर साल 23 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मुंबई के सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड वड़ा पाव को सेलिब्रेट करना और उसकी लोकप्रियता व सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने लाना है।
वड़ा पाव डे की शुरुआत क्यों हुई?
वड़ा पाव मुंबई की तेज रफ्तार जिंदगी का प्रतीक माना जाता है। इसे आमतौर पर पाव के बीच बेसन में लिपटा और तला हुआ आलू का वड़ा, हरी-लाल चटनी और कभी-कभी तली हुई हरी मिर्च के साथ परोसा जाता है।
यह सस्ता, स्वादिष्ट और जल्दी खाने वाला स्नैक होने के कारण मुंबई के मजदूरों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और आम यात्रियों के बीच खासा लोकप्रिय हुआ।
23 अगस्त ही क्यों?
23 अगस्त को वड़ा पाव डे मनाने की परंपरा हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और फूड कम्युनिटी के जरिए लोकप्रिय हुई है। हालांकि, 23 अगस्त को ही मनाने के पीछे कोई सर्वमान्य ऐतिहासिक या सरकारी रूप से निर्धारित कारण नहीं है। इसलिए इसे किसी आधिकारिक राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय दिवस की तरह नहीं, बल्कि वड़ा पाव की लोकप्रियता को समर्पित एक अनौपचारिक सेलिब्रेशन के तौर पर देखना अधिक सही है।
वड़ा पाव की कहानी :
वड़ा पाव की शुरुआत 1960 के दशक में मुंबई में हुई मानी जाती है। इसे आम तौर पर अशोक वैद्य से जोड़ा जाता है, जिन्होंने दादर इलाके में वड़ा पाव बेचकर इसे लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज वड़ा पाव मुंबई की पहचान बन चुका है और महाराष्ट्र से निकलकर देश के कई हिस्सों में लोकप्रिय हो गया है।

