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साहित्य मंच पर तजेंद्र सिंह लूथरा का एकल काव्य पाठ

 

RNE New Delhi.

 साहित्य अकादेमी के साहित्य मंच कार्यक्रम में आज प्रख्यात हिंदी कवि तजेंद्र सिंह लूथरा के एकल काव्य पाठ का आयोजन किया गया। श्री लूथरा ने अपने कविताओं के साथ ही अपनी रचना प्रक्रिया को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि सन् 2008 में घटित 26/11 घटना ने उनको विचलित किया और तब उन्होंने अपनी जो कविता लिखी उसे काफी पसंद किया गया और सराहा गया और तभी से उनका कविता लिखना नियमित हुआ। उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि कवि वह महत्त्वपूर्ण होता है जो समसामयिक घटनाओं से भी उन तत्वों को चुनकर उस वेदना को पकड़ता है, जो वर्षों बाद भी लोगों को अपने समय की सामयिकता से जोड़ती है। उन्होंने अपने कविता-संग्रह एक नया ईश्वर के साथ ही शीघ्र ही प्रकाशित होने वाले अपने तीसरे कविता-संग्रह प्लेटफॉर्म से आती आवाजें से भी अनेक कविताएँ सुनाईं। उनकी कविताओं में कुछ छोटी कविताएँ और कुछ लंबी कविताएँ भी थीं। इन कविताओं के स्वर जहाँ हमारी नियति और कर्मयोग के बीच के द्वंद्व को व्यक्त करने वाले थे, वहीं आम आदमी की परेशानियों को भी प्रस्तुत करने वाले थे। उनके द्वारा सुनाई गईं कुछ कविताओं के शीर्षक थे - तुम यह सब कर लेते हो, अरबी घोड़ा, ऐसे ही सोएँगे हम, साहस, जादू वाली शर्ट, उदास है मशीन एवं आधी रात को कविता। अंत में श्रोताओं के आग्रह पर उन्होंने लोकप्रिय कविता अस्सी घाट का बासुँरी वाला भी सुनाई। श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए बताया कि उनकी अधिकतर कविताएँ सच्ची घटनाओं से प्रेरित हैं। जब भी कोई घटना उन्हें अंदर तक झकझोरती है तो वह उसे अपने शब्दों में दर्ज कर लेते हैं। कार्यक्रम का संचालन अकादेमी के उपसचिव देवेंद्र कुमार देवेश द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अनेक भाषाओं के कवि, लेखक और साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

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