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Team Nitin Navin : वसुंधरा का कद बरकरार, सतीश पूनिया का प्रमोशन, मन्नालाल का बढ़ा मान 

13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष 08 राष्ट्रीय महासचिव, वसुंधरा राजे, सतीश पूनिया को बड़ी जिम्मेदारी
 
 


Rudra News Express New Delhi. 

BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी। लंबे इंतजार के बाद घोषित टीम में राजस्थान को भी महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजस्थान से डॉ. मन्नालाल रावत को एसटी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।

जानिए किसे, क्या जिम्मेदारी : 

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भाजपा की नई टीम में कुल 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 8 राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किए गए हैं। इसके साथ ही बी.एल. संतोष को राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बनाया गया है। राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में वसुंधरा राजे के अलावा तीरथ सिंह रावत, राम माधव, बैजयंत जय पांडा, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी, डॉ. भारती प्रवीण पवार, सरदार मनप्रीत सिंह बादल, लाल सिंह आर्य, प्रो. एम. नागराज, प्रो. तारिक मंसूर और डॉ. मधुचंद कर शामिल हैं।

ये हैं राष्ट्रीय महासचिव : 
राष्ट्रीय महासचिवों में विनोद तावड़े, सुनील बंसल, विप्लव कुमार देव, स्मृति ईरानी, डॉ. सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया को जगह मिली है। वहीं बी.एल. संतोष के साथ संगठन में शिवप्रकाश और सौदान सिंह को राष्ट्रीय सह-महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई है।

नई टीम में विभिन्न राज्यों को क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन के साथ प्रतिनिधित्व देने का प्रयास दिखाई देता है। सूची में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तराखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल, केरल और बिहार सहित कई राज्यों के नेताओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं। पार्टी की नई टीम को आगामी विधानसभा चुनावों और संगठन के विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजस्थान के लिये क्या मायने : 

राजस्थान के लिहाज से नितिन नवीन की नई टीम सिर्फ तीन नियुक्तियों की खबर नहीं, बल्कि भाजपा की राजस्थान राजनीति के लिए कई संकेत देने वाली सूची है। सबसे बड़ा संदेश यह है कि पार्टी ने राजस्थान के तीन अलग-अलग राजनीतिक आयामों अनुभव, संगठन और आदिवासी प्रतिनिधित्व को एक साथ साधने की कोशिश की है।

1. वसुंधरा राजे का राष्ट्रीय कद बरकरार : 
वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाना सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत है। राजस्थान की राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर लंबे समय से चर्चाएं रही हैं। नई टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद देकर पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। इसका अर्थ यह भी है कि राजे की राजनीतिक उपयोगिता और प्रभाव को भाजपा नेतृत्व ने नजरअंदाज नहीं किया है।

2. सतीश पूनिया को राष्ट्रीय महासचिव बनाना बड़ा प्रमोशन : 
डॉ. सतीश पूनिया का राष्ट्रीय महासचिव बनना राजस्थान भाजपा के लिए दूसरा बड़ा संदेश है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में संगठन को संभाल चुके पूनिया को अब राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिली है। इससे उनका राजनीतिक दायरा राजस्थान से बाहर भी बढ़ेगा। साथ ही, पार्टी को उनके संगठनात्मक अनुभव का राष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा।

3. मन्नालाल रावत के जरिए आदिवासी राजनीति पर फोकस : 

उदयपुर से सांसद रहे डॉ. मन्नालाल रावत को एसटी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाना राजस्थान के आदिवासी क्षेत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण है। दक्षिण राजस्थान में आदिवासी राजनीति तेजी से महत्वपूर्ण हुई है। ऐसे में राजस्थान के एक आदिवासी नेता को राष्ट्रीय स्तर पर मोर्चे की जिम्मेदारी देना भाजपा के आदिवासी विस्तार की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।

राजनीतिक संदेश- किसी एक का नेतृत्व नहीं : 
दिलचस्प बात यह है कि राजस्थान को मिली जिम्मेदारियां एक-दूसरे की जगह लेने वाली नहीं हैं। राजे, राष्ट्रीय राजनीतिक अनुभव, पूनिया-संगठनात्मक भूमिका और रावत आदिवासी प्रतिनिधित्व। इस टीम से यह संकेत भी निकलता है कि भाजपा राजस्थान में नेतृत्व को बहुस्तरीय रखना चाहती है। वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय भूमिका, पूनिया को संगठन की राष्ट्रीय जिम्मेदारी और रावत को एसटी मोर्चे की कमान देकर पार्टी ने अलग-अलग नेताओं को अलग-अलग प्लेटफॉर्म दिए हैं।

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