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जून में राज्य की 3 सीट हो रही खाली, 1 कांग्रेस की, नीरज डांगी के रिपीट की संभावना कम

किसी बड़े नेता को उतार सकती है कांग्रेस
भाजपा भी चुनाव के लिए सक्रिय हुई
 

मधु आचार्य ' आशावादी '
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RNE Special.

राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव अगले महीने होने प्रस्तावित है। जिन राज्यों में चुनाव होने वाले है, उनमें राजस्थान भी शामिल है। राजस्थान में 3 राज्यसभा सीटें रिक्त होंगी, जिन पर चुनाव होना है। भाजपा के 2 व कांग्रेस के 1 सदस्य का कार्यकाल पूरा होगा। जिन सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें भाजपा के है - केंद्रीय रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू व राजेन्द्र गहलोत। कांग्रेस के सांसद नीरज डांगी का कार्यकाल पूरा हो रहा है।

विधानसभा के भीतर विधायकों का जो संख्या बल है उसके अनुसार किसी भी तरह के उलटफेर की कोई संभावना ही नहीं है। चुनाव में 2 सीट भाजपा व 1 सीट कांग्रेस जीतने की आरमदायक स्थिति में है। हरियाणा या हिमाचल की तरह राजस्थान में किसी भी तरह विधायकों के पाले बदलने जैसी स्थिति है ही नहीं। इस कारण दोनों ही दलों के मुखियाओं को यहां खास चिंता अपने विधायकों को लेकर नहीं है।

दोनों दलों की बड़ी चिंता है उम्मीदवारों की। राजस्थान में दोनों ही दल अधिकतर मौकों पर राज्य से बाहर के उम्मीदवार ही लाते रहे है। भाजपा की स्थिति फिर भी कांग्रेस से बेहतर है। उसने पिछले कुछ सालों से राज्य के नेताओं को प्राथमिकता भी देनी आरम्भ की है। मदन राठौड़, घनश्याम तिवाड़ी, राजेन्द्र गहलोत आदि इसके उदाहरण है। भाजपा बाहरी व राज्य के उम्मीदवारों में संतुलन रखने का प्रयास करने लगी है।

मगर कांग्रेस में अधिकतर बाहरी उम्मीदवार ही उतारे जाते रहे है। उसका उदाहरण भी है। दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राज्य से ही सांसद थे। वर्तमान में सोनिया गांधी, मुकुल वासनिक, प्रमोद तिवारी, रणदीप सिंह सुरजेवाला राज्यसभा में राजस्थान का ही प्रतिनिधित्त्व कर रहे है। 

नीरज डांगी होंगे क्या  रिपीट ?

इस बार सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस के सामने यही है कि क्या नीरज डांगी को एक कार्यकाल का अवसर दिया जाएगा क्या ? क्योंकि उनका कार्यकाल पूरा हो रहा है। हालांकि कांग्रेस की राजनीति का परिदृश्य देखें और राज्यसभा की कार्यवाही का आंकलन करें तो डांगी विशेष सक्रिय नहीं दिखते। उनकी पहली सक्रियता अभी केरलम के चुनाव में दिखी थी, जब उनको सचिन पायलट के साथ लगाया था। 
 

इस हालत में कांग्रेस उनको रिपीट करेगी, इसकी संभावना बहुत कम नजर आती है। हालात देखते हुए लगता है कि कांग्रेस कोई नया प्रत्याशी ही उतारेगी, वो भी बाहरी होने की संभावना है।

कोई दिग्गज नेता हो सकता है:

कांग्रेस के जिन बड़े नेताओं का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व दिग्विजय सिंह भी शामिल है। खड़गे वापस कर्नाटक से आ जाएंगे, इसकी पूरी संभावना है। क्योंकि वहां कांग्रेस की ही सरकार है। दिग्विजय सिंह वैसे तो राज्यसभा चुनाव लड़ने की अनिच्छा जता चुके है। फिर भी पार्टी उनको लाना चाहती है तो मध्यप्रदेश से एक सदस्य के जीतने की पक्की स्थिति है।

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राज्य से कोई बड़ा नाम न तो राज्यसभा के लिए दावा कर रहा है और न नाम सामने आ रहा है। कांग्रेस में इस तरह की पहल करने की कोई नेता रिस्क भी नहीं लेता। इस सूरत में आलाकमान किसी बाहरी नेता को लायेगा, ऐसी संभावना लग रही है। कांग्रेस राष्ट्रीय पदाधिकारियों में बड़ा बदलाव कर रही है, उसके अनुरूप किसी नए नेता को राज्य से उतारा जा सकता है। अगर राज्य से ही किसी नेता को लाती है तो भंवर जितेंद्र सिंह, पवन खेड़ा आदि हो सकते है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार कोई चकित करने वाला नाम ही सामने आयेगा।

भाजपा भी सक्रिय हुई:

भाजपा के जिन 2 सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें से एक है पंजाब के नेता रवनीत सिंह बिट्टू। वे पंजाब से राज्यसभा चुनाव लड़ नहीं सकते, क्योंकि वहां भाजपा के पास विधायक नहीं है। यदि भाजपा उनको केंद्रीय मंत्रिमंडल में रखती है तो कहीं से तो लाना होगा, फिर राजस्थान ही सही है। अभी यहां से वे राज्यसभा में है भी।

यदि भाजपा उनको पंजाब चुनाव में सक्रिय करना चाहती है तो फिर यहां उम्मीदवार बदल सकता है। मगर बाहरी होने की संभावना ज्यादा है। एक राज्य से होगा, यह भी निश्चित सा लगता है। राजेन्द्र राठौड़, सतीश पूनिया जैसे नेता विधानसभा चुनाव हारे हुए है। भाजपा एक बाहरी और एक राज्य से, यह संतुलन बना सकती है।

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