कल से कांग्रेस के सभी जिलाध्यक्ष पुष्कर में, संगठन का वास्तविक सच जानेंगे राहुल
गुटबाजी को लेकर राहुल के अब होंगे कठोर निर्णय
मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Special.
कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने जब देश में पार्टी के संगठन को मजबूत करने के लिए ' संगठन सृजन अभियान ' आरम्भ किया था तब उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि जिलाध्यक्ष की कड़ी को मजबूत किया जायेगा। यही वो कड़ी है जो हर चुनाव में , चुनाव चाहे निकाय का हो या पंचायत का, विधानसभा का हो या लोकसभा का, वोटर को बूथ तक लाने का मैनेजमेंट करती है और वोट डलवाती है।

राहुल ने इसी कारण देश में पार्टी के जिलाध्यक्ष चुनने में विशेष योजना लागू की। हर राज्य में दूसरे राज्य के ऑब्जर्वर बनाये और वहां उनका प्रवास करा संभावित जिलाध्यक्षों का पैनल तैयार कराया। बड़े नेताओं से चर्चा तो की मगर सलाह या निर्देश नहीं माने, उनका उपयोग किया अवश्य। यही स्थिति जिला कार्यकारिणी गठन में भी रही।
फिर इन जिलाध्यक्षो को राज्यवार दिल्ली बुलाया गया और राहुल गांधी ने उनसे सीधे बात की। कहा, टिकट चयन में भी आपकी बड़ी भूमिका रहेगी। आलाकमान सीधे आपसे संपर्क में रहेगा। कांग्रेस संगठन के गठन व कार्य मे बड़ा परिवर्तन था।
जिलाध्यक्षों के आवासीय शिविर:
इसके बाद कांग्रेस को मजबूती देने के लिए राज्यों में जिलाध्यक्षों के आवासीय शिविर शुरू किए है ताकि जिलाध्यक्षों से केंद्रीय नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी व के सी वेणुगोपाल सीधे संवाद कर सके। जिलाध्यक्ष से सीधे सवाल कर संगठन के हालात जान सके।

जिलाध्यक्षों से राज्य की गुटीय राजनीति की सही फीडबैक मिलती है। उनसे ही वरिष्ठ नेताओं के काम की जानकारी मिलती है। इनसे ही उन नेताओं का पता लगता है जो भाजपा को लेकर सॉफ्ट है और पार्टी लाइन से विपरीत भी बयान दे देते है। हरियाणा, मध्यप्रदेश आदि के इन शिविरों की सफलता इसी में निहित थी कि आलाकमान को सही फीडबैक मिला।
राजस्थान का शिविर 23 से:
अजमेर के पर्यटन व धार्मिक स्थल पुष्कर में राजस्थान के जिलाध्यक्षों का 10 दिन का आवासीय शिविर कल यानी 23 मई से आरम्भ हो रहा है। 10 दिन में केंद्र के नेता इनको संगठन के बारे में गहन प्रशिक्षण देंगे और इनसे राज्य की स्थिति का व नेताओं का सही फीडबैक लेंगे। आगामी निकाय व पंचायत चुनाव को लेकर फीडबैक लिया जायेगा और विधानसभा चुनाव को टारगेट रख रणनीति बनानी सिखाई जायेगी।

31 मई या 1 जून को जिलाध्यक्षों के शिविर में राहुल गांधी भाग लेंगे और उनसे सीधे सवाल करेंगे। नेताओं की गुटबाजी के बारे में सच जानेंगे।
वो सत्र सबसे ज्यादा महत्ती:
राहुल गांधी का यह सीधे सवालों का सत्र बहुत अधिक महत्ती होगा। क्योंकि इसी में राज्य के बड़े नेताओं की पोल खुलेगी। सचिन - गहलोत के बीच की दूरी, बारबार मानेसर उछलना, स्व रामेश्वर डूडी प्रकरण आदि पर सवाल होंगे और अन्य लोगों से भी इन पर बात सुनी जाएगी। बड़े नेताओं ने अभी से अपने जिलाध्यक्षों को साधना शुरू कर दिया है। अब वे सधते है या सच पर डटते है, यह शिविर में ही पता चलेगा।

