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Mamta को बड़ा झटका : सांसद सुखेन्दु का इस्तीफा, 20 एमपी के बगावती तेवर, 58 एमएलए हो चुके अलग

 
बंगाल के BJP प्रभारी भूपेन्द्र यादव से TMC के 20 सांसद मिलने की खबर 
RNE Kolkata-New Delhi
पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने न केवल राज्यसभा की सदस्यता बल्कि तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटनाक्रम ने TMC के भीतर चल रहे असंतोष को राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बना दिया है।
सबसे बड़ी बात यह है कि सुखेंदु शेखर के इस्तीफे के साथ ही 20 अन्य सांसदों के भी पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, कई सांसदों ने भाजपा के बंगाल प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है तथा अलग गुट बनाने की तैयारी चल रही है।

Mamata

ममता दिल्ली में, बंगाल में पार्टी में भूचाल

एक ओर ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन की बैठकों में राष्ट्रीय राजनीति को साधने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर उनके अपने घर में बगावत का तूफान उठ खड़ा हुआ है। सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा सभापति को इस्तीफा सौंपने के साथ उसकी प्रति ममता बनर्जी को भी भेजी है। 2029 तक कार्यकाल होने के बावजूद उन्होंने पद छोड़ते हुए कहा कि वे "सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकते"।

Sukhendu

इस्तीफे में ममता सरकार पर तीखा हमला
अपने त्यागपत्र में सुखेंदु शेखर ने ममता सरकार के 15 साल के शासन को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर गंभीर विफलताएं रही हैं। उन्होंने लिखा कि:
  •  पार्टी जनता से कट चुकी है।
  •  नेताओं की राय को महत्व नहीं दिया जाता।
  •  संगठन में लोकतांत्रिक संस्कृति खत्म हो गई है।
  •  चुनावी हार के बाद भी नेतृत्व ने आत्ममंथन नहीं किया।
  •  राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने आरजीकर प्रकरण का उल्लेख करते हुए पिछले पांच वर्षों में सरकारी अस्पतालों में दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद की फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी की।

20 सांसदों की बैठक ने बढ़ाई चिंता
सुखेंदु के इस्तीफे के कुछ घंटों बाद ही 20 सांसदों की एक बैठक ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। बैठक में कई मौजूदा सांसद शामिल बताए गए। चर्चा है कि ये सांसद जल्द ही अलग संसदीय गुट बनाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिख सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो संसद में TMC की ताकत पर सीधा असर पड़ेगा। फिलहाल लोकसभा में पार्टी के 28 और राज्यसभा में 13 सदस्य हैं।
58 विधायक पहले ही कर चुके हैं बगावत
TMC के संकट की शुरुआत कुछ दिन पहले ही हो चुकी थी, जब पार्टी के 58 विधायकों ने अलग गुट बनाकर ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया था। विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें मान्यता भी दे दी। इसे तृणमूल कांग्रेस के 28 वर्षीय इतिहास की सबसे बड़ी अंदरूनी टूट माना जा रहा है।

सुखेंदु बोले- ममता की कार्यशैली से नाराज हैं नेता

इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि पार्टी के भीतर बड़ी संख्या में नेता ममता बनर्जी की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं। उनका आरोप है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ लोगों तक सीमित हो गई है और वरिष्ठ नेताओं को भी विश्वास में नहीं लिया जाता।

Kakoli ghosh

काकोली घोष भी छोड़ चुकी हैं पद
सुखेंदु से पहले बारासात से सांसद काकोली घोष भी पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं। हालांकि उन्होंने सांसद पद नहीं छोड़ा है। उनके इस्तीफे को भी TMC में बढ़ते असंतोष का संकेत माना गया था। इस बीच 14 TMC पार्षदों के भी पार्टी छोड़ने की खबर आई है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नाराजगी आगे भी बढ़ती है तो ममता बनर्जी के लिए 2026 के बाद की राजनीति और कठिन हो सकती है। विपक्ष पहले ही TMC पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद के आरोप लगाता रहा है, वहीं अब पार्टी के भीतर से उठ रही आवाजें इन आरोपों को और धार दे रही हैं।

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