RudraNewsExpress_Logo

बीकानेर में बड़ा उलटफेर : भाजपा के पंकज गहलोत बने उप महापौर, पंकज को 40, कांग्रेस के नसीम को मिले 38 वोट

Bikaner Deputy Mayor : भाजपा के 27 पार्षद, कांग्रेस के 42, फिर भी में भाजपा के पंकज गहलोत उप महापौर, कांग्रेस की बुरी हार

 

कहां चूकी कांग्रेस : कांग्रेस में दिखी थी खींचतान, चार पार्षदों ने दाखिल किए नामांकन; सहमति के बाद नसीम बानो को बनाया अधिकृत प्रत्याशी, लेकिन उप महापौर चुनाव में भाजपा ने 40-38 से बाजी पलट दी

Rudra News Express Bikaner.

बीकानेर नगर निगम के उप महापौर चुनाव में कांग्रेस के बहुमत के बावजूद भाजपा ने बड़ा उलटफेर कर दिया। भाजपा के पंकज गहलोत 40 वोट हासिल कर बीकानेर के नए उप महापौर निर्वाचित हुए, जबकि कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी नसीम बानो को 38 वोट मिले। एक वोट NOTA रहा और एक वोट निरस्त हुआ। इस तरह पंकज गहलोत ने नसीम बानो को महज 2 वोट के अंतर से शिकस्त दी। 

जीत

पंकज गहलोत की वार्ड जीत भी थी मजबूत : 

भाजपा के पंकज गहलोत वार्ड 51 से पार्षद चुने गए । वहां उन्होंने 1476 वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस के महेंद्र सिंह को 1216 वोट मिले। गहलोत ने 260 वोट से जीत दर्ज की थी। तीन निर्दलीय प्रत्याशियों को कुल 79 वोट मिले। पंकज का उप महापौर बनना इसलिए भी चौंकाने वाला रहा क्योंकि एक दिन पहले ही कांग्रेस के अनिल कल्ला ने महापौर चुनाव में भाजपा के डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को 50-30 के अंतर से हराया था। निगम के 80 सदस्यीय सदन में कांग्रेस के पास 42 पार्षद हैं, भाजपा के 27, निर्दलीय 10 और RLP का एक पार्षद है। इसके बावजूद उप महापौर चुनाव तक पहुंचते-पहुंचते कांग्रेस के सामने अपने ही खेमे में दावेदारी का सवाल खड़ा हो गया था।

आज बदला था माहौल : 

नगर निगम के चुनाव स्थल पर भी आज माहौल बदला हुआ था। बड़ी तादाद में भाजपा के नेता और कार्यकर्ता आज पहुंचे हुए थे। इधर कांग्रेस के कार्यकर्ता भी एक दिन पहले की जीत के साथ जोश में थे। एकबारगी माहौल तनावपूर्ण हो गया। दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए। पुलिस ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष यशपाल गहलोत को बाहर निकाल दिया। कांग्रेस नेता नितिन वत्सस सहित कांग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए। मौके पर मौजूद पूर्व मंत्री बी डी कल्ला ने भी पुलिस-प्रशासन और सरकारी मशीनरी के दुरूयपोग का आरोप लगाया। भाजपा की ओर से विधायक जेठानन्द व्यास,  डॉक्टर सत्यप्रकाश आचार्य, मोहन सुराणा, सुरेन्द्रसिंह शेखावत, भगवानसिंह मेड़तिया, वेद व्यास, मनीष सोनी आदि मौजूद रहे। 

कांग्रेस में शुरुआती फूट : 

उप महापौर पद के नामांकन के दौरान कांग्रेस की ओर से चार नाम सामने आए। इनमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष जावेद परिहार, लगातार पार्षद रहे मनोज बिश्नोई, महिला नेता सपना मारू और पहली बार पार्षद बनीं नसीम बानो शामिल थीं। उस समय कांग्रेस के भीतर एक नाम पर सहमति नहीं बन पाने की स्थिति सामने आई थी। इसी दौरान भाजपा ने वार्ड 51 के पार्षद पंकज गहलोत को अपना प्रत्याशी बनाया। कांग्रेस के भीतर चल रही दावेदारी ने उप महापौर चुनाव को महापौर चुनाव से बिल्कुल अलग रंग दे दिया था।

नसीम

.. नसीम के नाम पर बनी सहमति : 

चार नामांकन सामने आने के बाद कांग्रेस ने दावेदारों के बीच बातचीत और मंत्रणा की। इसके बाद नसीम बानो को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया। बाद में अन्य प्रत्याशियों के नाम वापस लिए जाने के बाद मुकाबला नसीम बानो और पंकज गहलोत के बीच रह गया।  नसीम के चयन के पीछे महिला और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के साथ उनकी पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि को भी महत्वपूर्ण माना गया। वह वरिष्ठ अल्पसंख्यक कांग्रेस नेता गुलाम मुस्तफा की पुत्रवधू हैं। यही वजह थी कि नसीम बानो का नाम सामने आने पर शुरुआत में भले ही राजनीतिक हलकों में चर्चा हुई, लेकिन कांग्रेस ने अंततः उन्हें अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतार दिया।

पहली बार पार्षद बनीं और सीधे उप महापौर की दौड़ में पहुंचीं : 

नसीम बानो पहली बार नगर निगम पार्षद बनी हैं। उन्होंने वार्ड 66 से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। उनका मुकाबला भाजपा की मोहनी देवी और निर्दलीय संजना कंवर से था। वार्ड 66 में नसीम बानो को 1161 वोट मिले। मोहनी देवी को 944 और निर्दलीय संजना कंवर को 792 वोट मिले। यानी नसीम ने भाजपा प्रत्याशी को 217 वोट से हराया था। मुकाबला तीन प्रत्याशियों के बीच था और निर्दलीय संजना कंवर को भी 792 वोट मिले थे। नसीम बानो ने महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है और फिलहाल गृहिणी हैं।

 50-30 से 40-38 तक कैसे बदली तस्वीर?

बीकानेर में महापौर और उप महापौर दोनों ही चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले हैं। महापौर में चौंकाने वाले इस लिहाज से रहे क्योंकि कांग्रेस के अपने 42 पार्षद थे। निर्दलीय पार्षदों का समर्थन बीजेपी ने अपने पास बताया था। इसके बावजूद कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी अनिल कल्ला 50 वोट लेकर सुरेन्द्र के 30 वोटों के मुकाबले 20 वोटों से बम्पर जीते।  अगले ही दिन उप महापौर चुनाव में तस्वीर बदलकर 40-38 हो गई। जो कांग्रेस जबरदस्त जीत दर्ज कर चुकी थी वह बहुमत होते हुए भी इस बार हार गई।  

अब बीकानेर के सियासी गलियारों में सवाल गूंज रहा है कि कांग्रेस के 42 पार्षदों वाले सदन में उप महापौर चुनाव में पार्टी प्रत्याशी को 38 वोट ही क्यों मिले और भाजपा प्रत्याशी 40 तक कैसे पहुंचा? भाजपा ने इसे अंतरात्मा की आवाज बताया है। अलबत्ता मौके पर लगे कुछ नारों पर कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जरूर जताई थी। 

FROM AROUND THE WEB