Bihar CM : सम्राट चौधरी BJP के पहले CM, जेडीयू के विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव दो उप मुख्यमंत्री
RNE Patna.
बिहार में नई एनडीए सरकार का शपथ ग्रहण हो गया है। लोकभवन में राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन ने भाजपा के सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।

सम्राट चौधरी बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने हैं, जिन्होंने 1990 में आरजेडी के साथ सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। कल NDA विधायक दल की बैठक में उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया। सम्राट चौधरी के साथ-साथ जेडीयू के विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मंत्री पद की शपथ ली। दोनों राज्य में डिप्टी सीएम का कार्यभार संभालेंगे।
बता दें कि विजय कुमार चौधरी नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते हैं तो वहीं 1990 से बिहार की हर कैबिनेट में शामिल होने का रिकॉर्ड बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम है। दोनों ही अनुभवी नेताओं को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।

कौन है सम्राट चौधरी :
सम्राट चौधरी ने आज यानी 15 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जिससे वे बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पहले मुख्यमंत्री बने हैं। वे भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। इससे पहले, वे बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वे प्रसिद्ध नेता शकुनी चौधरी के पुत्र हैं। उनका जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ था। यह सत्ता परिवर्तन बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि करीब दो दशकों के बाद नीतीश कुमार के स्थान पर भाजपा ने राज्य की कमान संभाली है।
सम्राट चौधरी की शैक्षणिक डिग्री पर सवाल :
सम्राट चौधरी की शैक्षणिक योग्यता चर्चा का विषय बन गई है। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है, जबकि समर्थक उनके राजनीतिक अनुभव को ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बताते हैं।

क्या है उनकी शैक्षणिक योग्यता?
सम्राट चौधरी ने अपनी शुरुआती शिक्षा बिहार में पूरी की। इसके बाद उन्होंने मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। चुनावी हलफनामे के अनुसार उन्होंने प्री-फाउंडेशन कोर्स (PFC) किया है, जिसे पारंपरिक ग्रेजुएशन डिग्री नहीं माना जाता। यही वजह है कि उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर अक्सर बहस छिड़ जाती है। बिहार की राजनीति में नेताओं की शैक्षणिक योग्यता अक्सर बहस का विषय रही है। सम्राट चौधरी के मामले में उनकी गैर-पारंपरिक डिग्री के कारण यह मुद्दा और ज्यादा उभरता है। चुनावी माहौल में यह बहस और तेज हो जाती है।

मानद डी.लिट. को लेकर भी भ्रम :
सम्राट चौधरी के नाम के साथ मानद डी.लिट. (Doctor of Letters) की उपाधि भी जुड़ी बताई जाती है। यह एक सम्मानजनक उपाधि होती है, जिसे विश्वविद्यालय विशेष योगदान के लिए प्रदान करते हैं। हालांकि यह नियमित शैक्षणिक डिग्री नहीं होती, इसी कारण इसे लेकर भी भ्रम और विवाद की स्थिति बनी रहती है।
‘अनुभव ही असली योग्यता’ :
सम्राट चौधरी खुद कई बार कह चुके हैं कि उनकी पहचान डिग्री से नहीं, बल्कि काम और अनुभव से है। लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने मंत्री और उपमुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले हैं। कृषि, शहरी विकास और पंचायती राज जैसे विभागों में काम करते हुए उन्होंने प्रशासनिक अनुभव हासिल किया है।
तारापुर से मजबूत जनाधार :
सम्राट चौधरी का राजनीतिक आधार मुंगेर जिले के तारापुर विधानसभा क्षेत्र में माना जाता है। यह क्षेत्र लंबे समय से उनके परिवार का गढ़ रहा है। स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत और जनाधार प्रभावी माना जाता है।1990 के दशक में राजनीति में सक्रिय हुए सम्राट चौधरी ने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। विधायक से लेकर मंत्री और फिर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर तय किया। साल 2024 में उपमुख्यमंत्री बनने के बाद उनका कद और बढ़ गया और वे राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।

