Bikaner Congress : चिरंजीवी राव के सामने भिड़े मदन-गोविंद, बीकानेर कांग्रेस में में फिर खुलकर आई कलह
तकरार ; गोविंदराम- मुझे पार्टी कार्यक्रमों की सूचना नहीं देते, मदन गोपाल- मुझे अध्यक्ष ही नहीं मानते
कल कांग्रेस के प्रदेश सह प्रभारी चिरंजीवी राव के सामने ही आपस में भीड़ गए मदन मेघवाल व गोविंद मेघवाल। शालीनता की सीमा भी टूटी। बातचीत में गहरी उतेजना हुई। बीच बचाव नहीं होता तो झगड़ा कुछ भी रूप ले सकता था। कांग्रेस में दो फाड़ साफ साफ दिखने लगे हैं। यह स्थिति पंचायत राज चुनावों पर भी बुरा असर डालेगी, यह तय लगता है।
Rudra News Express
मधु आचार्य ' आशावादी '
बीकानेर कांग्रेस और विवाद का लगता है जैसे चोली दामन का साथ हो गया है। पीसीसी के अनेक प्रयासों के बाद भी पिछले 8 महीनें से बीकानेर कांग्रेस में लगातार नीत नए विवाद खड़े हो रहे हैं। कभी शहर कांग्रेस में तो कभी देहात कांग्रेस में, विवाद का सिलसिला चल ही रहा है। प्रदेश नेतृत्त्व ने विवादों को लेकर गंभीरता तो दिखाई मगर ठोस निदान नहीं किया, इस वजह से ही विवाद बारबार रूप बदलकर खड़े होते जा रहे हैं। विवाद गम्भीर इस कारण से है कि वो तत्काल ही सार्वजनिक हो रहे हैं। जिस कारण से जनता के बीच में कांग्रेस की फजीहत हो रही है।
गोविंदराम-मदनगोपाल में तू-तू, मैं-मैं :
ताजा विवाद पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल और सांसद प्रत्याशी रहे शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल के बीच सर्वजननिक हुआ है। दरअसल राज्य में अब पंचायत राज चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गयी है। राजस्थान कांग्रेस के सह प्रभारी चिरंजीवी राव 3 दिन बीकानेर में थे। बुधवार को उनके सामने ही मदन मेघवाल व गोविंद मेघवाल भिड़ गए। बात बहुत बढ़ सकती थी, मगर बीच बचाव से मामले को कंट्रोल किया गया।
प्रदेश सह प्रभारी चिरंजीवी राव के सामने गोविंद मेघवाल ने आरोप लगाया कि मदन मेघवाल उनको पार्टी कार्यक्रमों की सूचना ही नहीं देते। वहीं मदन मेघवाल का आरोप था कि गोविंद मेघवाल उनको अध्यक्ष ही नहीं मानते, यह बात वे सार्वजनिक मंचों से भी कहते हैं। दोनों के मध्य हॉट टॉक हुई।
अब जब इतने विवाद बीकानेर कांग्रेस से जुड़े हैं तो इनका पंचायत चुनाव तक निपटारा तो संभव नहीं, जाहिर है पार्टी को चुनाव में नुकसान होगा। प्रदेश नेतृत्त्व ने विवादों का ठोस हल नहीं निकाला तो स्थिति विकट हो जाएगी और बीकानेर में पहली बार भाजपा को पंचायत राज चुनाव में सफलता मिल जायेगी।

क्या सभी विवादों की जड़ पुराना ऑडियो-वीडियो :
विवाद का सूत्रपात बीकानेर देहात कांग्रेस से हुआ। जब एक कथित ऑडियो और वीडियो जारी हुआ, जिसे पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल का बताया गया। यह सत्य है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई मगर इससे विवाद जरूर खड़ा हो गया। इस ऑडियो व वीडियो में बीकानेर के दिग्गज नेता व किसान केसरी रामेश्वर डूडी व शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मेघवाल पर अमर्यादित भाषा में टिप्पणियां थी। कथित रूप से आवाज पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल की बताई गई, जबकि उन्होंने इसे एडिटेड बताया।
मगर उस प्रसंग का बड़ा विवाद हुआ। डूडी समर्थकों ने मेघवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और जयपुर व दिल्ली तक उनकी पार्टी में शिकायत पहुंचाई। पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली बीकानेर एक प्रदर्शन में आये। समझाईश हुई, मगर मामला शांत नहीं हुआ। गोविंद मेघवाल ने भी अपने पर हुए राजनीतिक प्रहार के प्रतिकार में बड़ा प्रदर्शन किया और उसमें फिर से डूडी व उनके समर्थकों बिसनाराम सियाग सहित पूरी टीम पर आरोप लगाए। उनकी भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से सांठगांठ बताई। वो विवाद अब भी जिंदा है और दोनों गुटों में टकराहट जारी है।

शहर कांग्रेस अध्यक्ष भी उतरे गोविंद के खिलाफ:
शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मेघवाल पर भी उस ऑडियो व वीडियो में टिप्पणी थी तो उन्होंने भी पीसी बुलाकर गोविंद मेघवाल पर आरोप जड़ दिए। पीसीसी से कार्यवाई की मांग कर डाली। तब से मदन मेघवाल व गोविंद मेघवाल आमने सामने है। विवाद को जन्म दे रहे हैं और टकराहट खत्म ही नहीं हो रही। मदन मेघवाल लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं, वे हारे थे। पिछला चुनाव लोकसभा का गोविंद मेघवाल ने लड़ा और वे भी हार गए। मगर मदन मेघवाल की लगातार खजुवाला विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा टिकट की मांग है, यह गोविंद मेघवाल का क्षेत्र है। टकराहट होना स्वाभाविक भी है। इस वजह से दोनों के बीच शुरू से ही छतीस का आंकड़ा चल रहा है।

शहर में अध्यक्ष को सरेआम पीटा :
बीकानेर नगर निगम चुनाव में भी शहर कांग्रेस विवाद में आ गयी। वार्ड 50 के टिकट को लेकर शहर अध्यक्ष मदन मेघवाल के साथ मारपीट हुई। वहीं उन पर सिंबल यानी टिकट चोरी का मुकदमा भी दर्ज हुआ। वो विवाद अब कानून की प्रक्रिया में है। मदन मेघवाल पर आरोप लगा कि वार्ड 50 के लिए प्रदेश से किसी अन्य उम्मीदवार के नाम का टिकट यानी सिंबल आया, मगर शहर अध्यक्ष ने किसी दूसरे को सिंबल दे दिया। उस विवाद का अभी तक निपटारा ही नहीं हुआ है।

उप महापौर चुनाव में क्रॉस वोटिंग :
राज्य के 10 नगर निगमों में से कांग्रेस केवल बीकानेर नगर निगम का महापौर पद जीत पाई। उस जीत की खुशी दूसरे दिन ही काफूर हो गई, जब उप महापौर के चुनाव में पार्टी हार गई। महापौर के चुनाव में पार्टी प्रत्याशी को 50 मत मिले मगर उप महापौर के चुनाव में केवल 38, जबकि कांग्रेस के 42 पार्षद थे। क्रॉस वोटिंग हुई, यह स्पष्ट है। उप महापौर का उम्मीदवार मुस्लिम महिला थी तो विवाद बड़ा हो गया। मुस्लिम नाराज हो गए। अब इस मामले की शिकायत पीसीसी तक पहुंची है और मुस्लिम नेताओं ने जांच करा दोषियों पर कार्यवाही की मांग की हुई है। कुल मिलाकर यह भी एक बड़ा विवाद बना हुआ है। मतलब विवाद तो बीकानेर कांग्रेस का साथ छोड़ ही नहीं रहे हैं, यह स्पष्ट है।

