Bikaner Ward -1 : बड़े नेता की शह पर BJP की बागी बदल रही खेल, कांग्रेस में RLP-BSP की सेंध, पांच कोणीय पेच
4,043 मतदाता, 5 प्रत्याशी और 2019 में कांग्रेस की 957 वोट की बड़ी जीत। इस बार भाजपा के सामने कांग्रेस से ज्यादा दिलचस्प चुनौती अपने ही खेमे की बगावत और संभावित वोट बंटवारे की है। बीकानेर के वार्ड नंबर एक में इस बार मुकाबला सिर्फ पांच प्रत्याशियों का नहीं, बल्कि नाराजगी, बगावत, ध्रुवीकरण और भीतरघात की आशंकाओं के बीच अपनी-अपनी जमीन बचाने की लड़ाई है।
RNE वार्ड राउंड-1 : पॉलिटिकल नब्ज
बंगला नगर, पूगल रोड सब्जी मंडी, विश्वकर्मा कॉलोनी, अंसल कॉलोनी और महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के आसपास का यह इलाका बीकानेर की उस तस्वीर को सामने रखता है, जहां शहर और देहात एक-दूसरे में घुले नजर आते हैं। इसी वार्ड में इस बार चुनावी सरगर्मी सिर चढ़कर बोल रही है। जी हां, अभी हम बात कर रहे हैं बीकानेर के वार्ड संख्या-एक की।
4,043 मतदाता, 5 प्रत्याशी और 2019 में कांग्रेस की 957 वोट की बड़ी जीत। इस बार भाजपा के सामने कांग्रेस से ज्यादा दिलचस्प चुनौती अपने ही खेमे की बगावत और संभावित वोट बंटवारे की है। बीकानेर के वार्ड नंबर एक में इस बार मुकाबला सिर्फ पांच प्रत्याशियों का नहीं, बल्कि नाराजगी, बगावत, ध्रुवीकरण और भीतरघात की आशंकाओं के बीच अपनी-अपनी जमीन बचाने की लड़ाई है।
ये है वार्ड की चुनावी तस्वीर :
वार्ड OBC महिला वर्ग के लिए आरक्षित है। करीब 4,043 मतदाता अपने पार्षद का चुनाव करेंगे। मैदान में पांच महिलाएं हैं, भाजपा की मंजू देवी, कांग्रेस की चंद्रकला, RLP की मोबीना बानो, BSP की राधा देवी और निर्दलीय संतोष देवी।
भाजपा के सामने चुनौती बाहर से ज्यादा भीतर की :
भाजपा ने मंजू देवी को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। उनके सामने सबसे बड़ी परेशानी कांग्रेस नहीं, बल्कि पार्टी की ही बागी संतोष देवी हैं। संतोष ने भाजपा के साथ निर्दलीय नामांकन भी दाखिल किया था। जब भाजपा का टिकट उन्हें नहीं मिला और मंजू देवी अधिकृत प्रत्याशी बनीं तो संतोष निर्दलीय मैदान में रह गईं।
बड़े नेता की बागी को शह :
भाजपा के सामने अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि कांग्रेस कितनी मजबूत है। सवाल यह भी है कि पार्टी का अपना वोट कितना एकजुट रहता है। मंजू देवी के समर्थक तो इससे भी आगे जाकर आरोप लगाते हैं। उनका कहना है कि संतोष को भाजपा के ही एक प्रदेश स्तर के नेता का अंदरखाने समर्थन हासिल है। समर्थकों का तर्क है कि अगर वह नेता पूरे मन से पार्टी प्रत्याशी के साथ खड़े होते तो बगावत की नौबत ही नहीं आती और मंजू देवी की राह आसान होती। बताया जाता है कि इसके लिये बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानन्द व्यास ने भी भाजपा में पिछड़ों के लिये बने प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष रहे नेताजी को फोन किया लेकिन रिस्पॉन्स नहीं आया। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है लेकिन चुनाव में भीतरघात की आशंका भी कई बार वोट से ज्यादा बड़ा मुद्दा बन जाती है।
कांग्रेस के सामने RLP की मोबीना का पेच :
कांग्रेस की चंद्रकला के सामने भी मैदान खाली नहीं है। RLP ने मोबीना बानो को उतारा है। मोबीना बानो के समर्थकों को उम्मीद है कि वार्ड के अल्पसंख्यक मतदाताओं का ध्रुवीकरण उनके पक्ष में हो सकता है। उनका गणित साफ है, अगर RLP को अल्पसंख्यक वोटों का अच्छा हिस्सा मिलता है और साथ ही भाजपा के वोट में भी बंटवारा होता है, तो मुकाबले में तस्वीर बदल सकती है। यही वजह है कि कांग्रेस के लिए मोबीना बानो की मौजूदगी महज एक और प्रत्याशी की मौजूदगी नहीं है। कांग्रेस को अपने पुराने सामाजिक और राजनीतिक आधार को बचाए रखने की चुनौती है।
BSP की राधा जातिगत नाराजगी में तलाश रही जमीन :
BSP की राधा देवी सोनी के समर्थकों के पास भी अपना तर्क है। उनका कहना है कि OBC महिला के लिए आरक्षित इस वार्ड सहित शहर के किसी भी वार्ड में भाजपा ने उनकी जाति से किसी को टिकट नहीं दिया। यही नाराजगी BSP के पक्ष में वोट में बदलने की उम्मीद जताई जा रही है। यानी वार्ड 1 में सिर्फ पार्टियों के बीच मुकाबला नहीं है। टिकट वितरण से उपजी नाराजगी भी चुनावी मैदान में उतर चुकी है।
...और पीछे है 2019 में कांग्रेस की जीत का आंकड़ा :
इस वार्ड की पिछली चुनावी कहानी कांग्रेस के लिए उत्साह बढ़ाने वाली है। 2019 में कांग्रेस की सरोज ने भाजपा की सुशीला देवी को 957 वोट से हराया था। सरोज को 1,285 वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 328 वोट मिले। उस समय 2,062 मतदाताओं में से 1,634 ने मतदान किया था लेकिन इस बार एक बड़ा बदलाव है। वर्ष 2019 के 2,062 मतदाता अब बढ़कर 4,043 हो चुके हैं। यानी मतदाता संख्या लगभग दोगुनी है। इसलिए पिछली जीत का आंकड़ा कांग्रेस को मनोवैज्ञानिक बढ़त तो दे सकता है, लेकिन उससे इस बार का परिणाम तय नहीं होता।
पांच प्रत्याशी, पांच उम्मीदें :
- मंजू देवी को भरोसा है कि भाजपा का संगठन और अधिकृत टिकट उनके पक्ष में खड़ा होगा।
- चंद्रकला के पास कांग्रेस की पिछली जीत की विरासत है।
- मोबीना बानो को उम्मीद है कि अल्पसंख्यक वोटों का ध्रुवीकरण उन्हें मजबूत करेगा।
- राधा देवी के समर्थक OBC के भीतर टिकट को लेकर नाराजगी की बात कर रहे हैं।
- संतोष देवी के सामने सबसे बड़ा दांव है—पार्टी का टिकट नहीं मिलने के बाद व्यक्तिगत समर्थन और सहानुभूति उभाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के मुकाबले खड़ा कर पाएगी! यही सवाल इस चुनाव को दिलचस्प बनाता है।
ये है वार्ड 1 की पॉलिटिकल नब्ज :
ऊपर से देखें तो यह भाजपा बनाम कांग्रेस का चुनाव दिखाई देता है। थोड़ा करीब जाएं तो यह भाजपा बनाम उसकी बागी का सवाल भी है। सामाजिक समीकरण देखें तो RLP और BSP के संभावित वोट कांग्रेस और भाजपा दोनों के गणित को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बीच टिकट को लेकर नाराजगी है, अपने-अपने नेताओं को लेकर शिकायतें हैं और भीतरघात की आशंकाएं भी हैं। इसलिए वार्ड 1 में इस बार जीत सिर्फ इस बात से तय नहीं होगी कि किसके समर्थक ज्यादा हैं। यह भी तय करेगा कि किसका वोट बचा रहता है, किसका वोट बिखरता है और किसकी नाराजगी आखिरी दिन वोट में बदल जाती है। यही है वार्ड 1 की पॉलिटिकल नब्ज।

