Movie prime

मुख्यमंत्री को मूर्खाधिराज कहने से भाजपा तैश में, मंत्रियों को मूर्ख कहकर भड़का दिया हनुमान ने

कांग्रेस को बैठे बिठाए मिल गया फायदा
डिप्टी सीएम बैरवा के लिए मुसीबत
 

मधु आचार्य ' आशावादी '
d

RNE Special.
 

दूदू विधानसभा क्षेत्र में इस बार सत्ता का घमासान मचा। पहले बाड़मेर में शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने अपने पर पेट्रोल छिड़ककर पूरी भजनलाल सरकार के भीतर चिंगारी सुलगा दी। सरकार के इकबाल पर बहुत शोर हुआ। जन प्रतिनिधियों ने सरकार पर जमकर हमला बोला।

अभी यह मामला ठंडा पड़ा ही नहीं था कि एक मामला उभर के सामने आ गया। यह मामला था दादू सम्प्रदाय के संतों का। दादू पंथियों का। वे पिछले कई दिनों से जंगल मे विरोध प्रदर्शन करते हुए अग्नि के मध्य तपस्या कर रहे थे। कठिन तपस्या। दादू पंथियों के संघर्ष का अपना लंबा इतिहास है।

इन लोगों को न तो जमीन चाहिए थी और न ही वहां कोई मंदिर चाहिए था। ये तो जमीन रीको को आवंटित कर दिए जाने का विरोध कर रहे थे। इनका कहना था कि आप रीको को जमीन कहीं और दे दो। उन्होंने यहां सारे पेड़ काट दिए। पक्षी, पशु कहाँ रहेंगे। पर्यावरण भी बिगड़ेगा। सरकार ने यहां अपने संत विधायक बालमुकुन्दाचार्य को भेजा। जिनके बोल मामले को पूरा ही बिगाड़ गये। उन्होंने कहा कि यहां कोई आंदोलन है ही नहीं। कुछ ऐसी ही बात आईएएस शिखर अग्रवाल बोल गए। इसी से साधु, संत तैश में आ गये। उन्होंने आंदोलन को तेज करने का निर्णय कर लिया। निगाह सीधी नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल पर पड़ी। आरएलपी को वे फिर से पूरी ताकत लगाकर खड़ी कर ही रहे है।

हनुमान के नाम से मामला गर्माया:

संतों से हनुमान बेनीवाल से कहा कि अब संतों की रक्षा आप ही क्ररो। नहीं तो भाजपा वाले सनातन का अपमान करेंगे। जो इनको सत्ता में लाये थे। उन्होंने हनुमान को बताया कि डॉ प्रेमचंद बैरवा के लिए हमने वोट मांगा। भाजपा की बैठकें की। भोजन कराया। वे ही अब संतों को, सनातन को, पर्यावरण को, पशु पक्षियों को उजाड़ रहे है।
हनुमान बेनीवाल का मन संत, सनातन को देखकर पिघल गया। उन्होंने आंदोलन में शामिल होने का ऐलान कर दिया। बस, यही ऐलान सरकार की नींद उड़ाने के लिए काफी था। इस बात में कोई दो राय नहीं कि अनेक आंदोलनों के जरिये हनुमान ने साबित किया है कि बड़ी भीड़ जुटाने का मादा उनके अलावा किसी के पास नहीं है। 
जंगलों में भी हनुमान एक लाख के आसपास लोग लेकर संतो के समर्थन में पहुंच गए। 27 मई की घटना। बड़ी संख्या में पहुंचे लोग। जयपुर कूच का ऐलान। प्रशासन हिल गया। वार्ता शुरू हुई। आधी रात के बाद अधिकतर बातों पर सहमति बनी। संत खुश थे।

मूर्खाधिराज बयान से सियासत गर्माई:

आंदोलन की एक सभा में हनुमान बेनीवाल ने भाषण में कहा कि यह मूर्खों की सरकार है जो संतों से टकरा रही है। सारे मंत्री मूर्ख है और मुख्यमंत्री मूर्खाधिराज है। 
बस, इस एक बयान ने आग में घी डालने का काम किया। भाजपा के हाथ से बाजी तो निकल ही गयी थी। रीको को दूसरी जगह जमीन देने पर सहमत होना पड़ा। संतों के सामने झुकना पड़ा। अब चेहरा कैसे बचाये ? हनुमान के बयान को आधार बना भाजपा के मंत्री व संगठन के नेता हमलावर हो अपनी कमी छिपाने में लग गए। पर हनुमान को क्या परवाह। वो अपने अंदाज में भाजपा को गरियाते रहे।

FROM AROUND THE WEB