CM Bhajan Lal का Bikaner BJP को "बूस्टर डोज", कांग्रेस में कल्ला की दौड़-धूप, मेघवाल को "मेयर" की तलाश!
- सीएम ने दौरा कर तोड़ा वर्जनाओं को, असर से तय होगा निष्कर्ष
- कांग्रेस की नैया खेवनहार बने हुए हैं दिग्गज नेता डॉ बी डी कल्ला
- कांग्रेस संगठन सक्रिय है उतना भाजपा का संगठन नहीं दिखता
- कानून मंत्री मेघवाल लग गए मेयर के समीकरण बिठाने में
मधु आचार्य ' आशावादी '
निकाय चुनाव को भाजपा काफी गंभीरता से ले रही है, यह तो अब स्पष्ट है। तमाम तरह की वर्जनाओं को तोड़कर राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी बीकानेर में प्रचार के लिए कल आये। रोड शो कर एक तरफ जहां जनता से सीधे जुड़ने का प्रयास किया वहीं कार्यकर्ताओं संग बैठक कर जीत के मंत्र भी बताये। 
इससे भी बड़ी घटना हुई। सीएम भजनलाल ने कोर टीम के साथ बैठकर बोर्ड बनाने की रणनीति पर भी मंथन किया। बताते हैं, हर स्थिति से सामना कर बोर्ड बनाने की रणनीति बनाई गई। कई नेताओं को जिम्मेदारी दी गयी। वरिष्ठ भाजपा नेताओं से चर्चा कर एक फूल प्रूफ प्लान भी तैयार किया गया है। जिसको पूरा करने के लिए अलग अलग नेताओं के जिम्मे काम रखे गए हैं।
शायद, ऐसा पहली बार है जब स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर किसी राज्य के मुख्यमंत्री इस तरह से सीधे मैदान में उतरे हों। मगर इससे यह भी साफ हो जाता है कि सीएम इस चुनाव को लेकर गंभीर है और इसे सरकार के अब तक के कामकाज पर जनमत मान रहे हैं। स्थानीय निकाय के लिए इस तरह सीएम का उतरना एक अच्छा कदम ही माना जाना चाहिए। क्योंकि यह मसला भी तो सरकार का है, स्थानीय सरकार का।
बात तो दौरे के असर की है :
सीएम का दौरा एक अच्छी बात है। मगर यह सार्थक तभी माना जायेगा जब इसका बड़ा और प्रभावी असर होगा। असर पैदा करने का काम संगठन, विधायकों व बड़े नेताओं का है। उनको भी गुटीय दूरियां मिटाकर पार्टी के लिए मैदान में उतरना पड़ेगा। नहीं तो सीएम का महत्त्वपूर्ण दौरा केवल एक रस्म बनकर ही रह जायेगा।

रूठों को मनाना होगा। नाराज लोगों को सक्रिय करना होगा और उम्मीदवार के बजाय पार्टी को महत्त्व देना होगा, तब जाकर सीएम का दौरा उपयोगी बनेगा। अनेक वार्डों में अभी भी भाजपा एकजुट नहीं है, इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता। उसका प्रतिकूल असर भी पड़ेगा। उसे रोकने में सीएम के दौरे का उपयोग नेताओं को करना चाहिए। बाकी तो दौरे के असर का असल पता तो चुनाव परिणामों से ही लगेगा।
कानून मंत्री मेघवाल सक्रिय हुए बोर्ड बनाने के लिए :
बीकानेर के सांसद व केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल की सक्रियता अब नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनाने के लिए बढ़ गयी है। उनके सहयोग के लिए प्रदेश के पर्यवेक्षक के साथ साथ केंद्रीय भाजपा के प्रतिनिधि भी रहेंगे। पिछली बार भी बोर्ड बनाने का जिम्मा मेघवाल के पास था। भाजपा के पास पूरा बहुमत नहीं था, मगर फिर भी बोर्ड व मेयर बना।

इस बार मेघवाल ने अभी से ही 80 वार्डों की ग्राउंड रिपोर्ट लेनी आरंभ कर दी है। मजबूत वार्डो के साथ उन वार्डों में अधिक ताकत लगाई जा रही है जहां भाजपा जीत के निकट है। बागियों व मजबूत निर्दलीयों के वार्डों पर वे पूरी नजर रखे हुए हैं। कल सीएम के साथ हुई बैठक में भी कुछ रणनीति बनाई गई है।
कांग्रेस की नैया के खेवनहार डॉ कल्ला हैं :
कांग्रेस की तरफ से दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला ही सबसे अधिक सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। वे बीकानेर पूर्व व पश्चिम के लगभग सभी वार्डों में कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में पहुंच रहे हैं। जबकि पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी अपने प्रभाव के कुछ वार्डों में सक्रिय हैं।

डॉ कल्ला की सक्रियता को देखते हुए लगता है कि इस बार बोर्ड की जिम्मेदारी पार्टी उन पर ही डालेगी। सहयोग में प्रदेश कांग्रेस जरूर पर्यवेक्षक उतारेगी। कल्ला भी अभी से ही सभी वार्डों की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करने में लगे हुए हैं। एक प्लान भी कांग्रेस ने तैयार किया है, जिसके अनुसार बागियों, निर्दलीयों, आरएलपी, बसपा आदि के उम्मीदवारों के वार्डों को भी टटोला जा रहा है। कल्ला के पास 10 बार विधानसभा चुनाव लड़ने का लंबा अनुभव है और वे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं।
कांग्रेस संगठन अधिक सक्रिय दिख रहा :
संगठन के स्तर पर देखा जाए तो कांग्रेस के शहर अध्यक्ष मदन मेघवाल व देहात अध्यक्ष बिसनाराम सियाग ने भी निगम चुनाव में पूरी शक्ति झोंकी हुई है। संगठन हर वार्ड तक पहुंच रहा है और उम्मीदवारों से संपर्क में है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष मेघवाल के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद वे दुगुने जोश से सक्रिय है और समाज का भी उनको सहयोग मिल रहा है।

कांग्रेस की तुलना में यदि आंकलन करें तो भाजपा संगठन उतना सक्रिय नहीं है। पश्चिम विधानसभा के वार्डों में विधायक जेठानंद व्यास सक्रिय हैं और हर वार्ड तक पहुंच रहे हैं। देहात अध्यक्ष की अस्वस्थता के कारण आरम्भ में वे कम सक्रिय थे। प्रचार में कल जब सीएम ने रोड शो किया, सिद्धि कुमारी जी तभी दिखी थी। कुल मिलाकर अब दोनों ही दलों में चुनावी सरगर्मी अधिक हो गयी है और बोर्ड बनाने के लिए रणनीति पर काम आरम्भ हो गया है।

