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विधानसभा चुनाव के समय केंद्र में रही थी लाल डायरी, पीएम तक ने जिक्र किया था लाल डायरी का

गुडा ने खोला था गहलोत के खिलाफ मोर्चा
अब हंसी में आई ' लाल डायरी '
 

मधु आचार्य ' आशावादी '
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RNE Special.
 

राजनीति में कहा जाता है कि यहां जनता व नेताओं की याददाश्त बहुत ही कमजोर होती है। लोग जल्दी ही बात को भूलने के आदि होते है। ठीक इसी तरह राजनीति में न तो दोस्ती स्थायी होती है और न ही दुश्मनी। ये भी वक़्त वक़्त पर बदलती रहती है।
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राजनीति में इस तरह पलटने वाले अनेक नेता मिल जायेंगे। नीतीश का, हरियाणा में भजनलाल जी का, मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया का, असम में हेमंत बिस्वा का, यूपी में जगदम्बिका पाल से लेकर कईयों का और भी सैकड़ो उदाहरण हमारे सामने है। कुल मिलाकर जनता भी इस तरह बदलने वालों को भूलने में समय नहीं लगाती और फिर उनके साथ हो लेती है।
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इस तर्ज पर राजनीति में चुनावी समय मे गंभीरता से लगाए गए संगीन आरोप भी चुनाव के बाद नेता भी भूला देते है और जनता भी उनको भूल जाती है। तभी तो चुनावी समय मे नेताओं के आरोप व बद जुबानी ज्यादा ही होने लगी है आजकल। इतनी अधिक कि अब तो इसको लेकर चुनाव आयोग व माननीय न्यायालय तक टिप्पणी करने को मजबूर हो रहे है।

विधानसभा चुनाव 2023:

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 को याद कीजिये। याददाश्त पर थोड़ा जोर डालना होगा बस। उस चुनाव से पहले गहलोत सरकार के मंत्री राजेन्द्र गुडा को बर्खास्त किया गया था। तब वे सीएम अशोक गहलोत व उनकी सरकार के खिलाफ एक डायरी ' लाल डायरी ' लेकर निकल पड़े। जी भरकर गहलोत, उनके पुत्र, उनके मंत्रियों, धर्मेंद्र राठौड़ आदि पर जी भरकर आरोप लगाये।

लाल डायरी दिखाते और कहते इसमें सब दर्ज है। ये डायरी भी वे गहलोत के निकटस्थ के यहां से उठाकर लाने की बात बताते। एक फिल्मी कहानी की तरह पूरी घटना सुनाते। लोग भी बड़े चाव से सुनते। भाजपा उस डायरी के आधार पर कांग्रेस पर हमलावर रही। वहीं कांग्रेस बचाव में रही। उस डायरी के आधार पर क्या क्या आरोप लगे,यह तो अब लोगों को याद भी नहीं होंगे। जिन पर आरोप लगे और जिन्होंने लगाये, उनको भी पूरा याद नहीं होगा। लाल डायरी ही केवल याद रही होगी, वो भी केवल याद दिलाने पर। 



पीएम ने जिक्र किया था इसका:

अब गुमनामी का शिकार हुई लाल डायरी उस समय इतनी पॉपुलर हुई कि पीएम ने भी राज्य की चुनावी सभाओं में उसका जिक्र किया। उस पर कार्यवाही तक की बात की। पीएम ने कांग्रेस, गहलोत सरकार की लाल डायरी को लेकर खूब चुटकियां ली। भाजपा के अन्य नेता भी उस पर खूब बोले। अब तो खैर इनमें से किसी को भी लसल डायरी की बात तक याद नहीं। क्योंकि भाजपा चुनाव जीत गयी। सरकार बन गयी। सरकार चल रही है।

अब हंसी में हुआ डायरी का जिक्र:

लाल डायरी जो उस समय चुनाव का एक बड़ा मुद्दा थी, अब हंसी की बात में उसका जिक्र चला। तब एक बार फिर से लाल डायरी की बात हुई। लोगों ने भी अब हंसते हुए उस जिक्र का आनंद लिया। जिन्होंने लाल डायरी दिखाई, वे भी नॉर्मल थे। जिनके खिलाफ दिखाई वे भी हंस रहे थे। जिन पर गंभीर आरोप थे, उनके निमंत्रण पर ही वे आयोजन में पहुंचे थे।

वाकिया ये हुआ असल में:

पूर्व आरटीडीसी चेयरमेन, कांग्रेस नेता व अशोक गहलोत के निकटस्थ धर्मेंद्र सिंह राठौड़ के पुत्र की सगाई का समारोह था। जिसमें गहलोत बैठे थे, कांग्रेस के देश प्रदेश के अन्य नेता भी थे। धर्मेंद्र राठौड़ जहां गहलोत बैठे थे वहां राजेन्द्र गुडा को लेकर पहुंचे और उनसे मिलवाया।

उनको देखते ही गहलोत हंसे। हाथ मिलाया और हंसते हुए लाल डायरी कहा। सब हंस पड़े। गुडा भी मुस्कुराए। तब धर्मेंद्र राठौड जिन पर भी गुडा ने लाल डायरी को दिखा कई आरोप लगाए थे, उन्होंने मुस्कुराते हुए गहलोत से कहा कि कुछ भी हो इन्होंने हमारी सरकार बचाई थी। तब आसपास बैठे सभी लोग हंस पड़े। इस तरह चुनाव के बाद पहली बार ' लाल डायरी ' बातचीत में आई।

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