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सशक्त युवा, सशक्त राष्ट्र सम्मेलन में धारदार भाषण, एक बार फिर दर्शन की बात से राजनीतिक गलियारों में हलचल

एक बात, एक सच्चाई, एक चेतावनी भाषण में
भाजपा में बयान से हलचल
 

मधु आचार्य ' आशावादी '
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RNE Special.
 

राज्य में भाजपा को  विधानसभा में इस बार बहुमत मिलने के बाद पार्टी ने दिग्गज नेता वसुंधरा राजे को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर नहीं दिया। जबकि कांग्रेस में पिछले चुनाव के समय बहुमत मिलने के बाद अशोक गहलोत को ही तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का पार्टी ने अवसर दिया।

राजस्थान में हर 5 साल बाद सरकार बदलने की परंपरा सी बनी हुई है। उस तर्ज पर तय माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री भी राजे को ही बनाया जायेगा। मगर ऐसा हुआ नहीं, उनको राज्य में नेतृत्त्व नहीं दिया गया। राजे राज्य में भाजपा की दिग्गज नेता है और उनके समर्थक हर जिले में है। उनके समर्थक सांसद व विधायक भी है। मगर उनको नेतृत्त्व न देने का केंद्रीय नेतृत्त्व का निर्णय अब भी राजे समर्थकों की समझ में नहीं आ रहा है।

राजे के बयान और अर्थ:

पिछले एक साल से पूर्व सीएम राजे के बयान कई अर्थों वाले रहे है। हर बयान ने एक हलचल पैदा की है। बयानों में एक तरफ जहां स्पष्टवादिता रही है वहीं राजनीतिक हालातों पर करारा तंज भी रहा है। वे इशारों इशारों में किसी न किसी नेता या पार्टी पर इतना करारा प्रहार कर जाती कि तिलमिलाहट हो जाती। क्योंकि जिस की तरफ ईशारा होता था, उसे तो समझ आता ही था।
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ये बयान वो जो चर्चा में रहे...

 

  • उदयपुर के एक आयोजन में बोलते हुए वसुंधरा राजे ने कहा कि जिनको हम अंगुली पकड़कर चलना सिखाते है, वही एक दिन आंखें दिखाते है। राजनीति में यही हो रहा है।
  • नागौर में जैन धर्म के एक आयोजन में उन्होंने कहा कि राजनीति में किसी का दिल दुखाना और दिल तोड़ना भी एक तरह की हिंसा है।
  • राजे ने एक बयान में साफ कहा कि किसी को उसका हक न देना भी हिंसा के बराबर है।
  • और अब .... 3 दिन पहले जयपुर में सशक्त युवा सशक्त राष्ट्र सम्मेलन में बोलते हुए राजे ने कहा कि काम अच्छा करें तो पद अपने आप आता है। उनका कहना कि राजस्थानियों का यह प्यार ही उनके लिए सबसे बड़ा पद है।

ये बयान तो कुछ बानगी है। ऐसे और भी बयान है जिन्होंने भाजपा की अंदरूनी राजनीति में जबरदस्त हलचल पैदा की। कई दिनों तक उन बयानों की चर्चा भी चलती रही। जिन पर तंज कसा गया वे और दूसरे लोग भी जानते थे कि यह बयान किसके लिए दिया है। मगर बोलने की जुर्रत कोई नहीं कर सका। तंज का जवाब भी किसी ने नहीं दिया।

एक बार फिर दर्शन की बात:

इस बार उन्होंने जो बयान दिया उसमें गहरा जीवन दर्शन तो है ही मगर एक बड़ी राजनीतिक बात भी है। यह सब जानते है कि अकेली राजे ही भाजपा की ऐसी नेता है जिनका समर्थक छोटी से छोटी ढाणी तक में मिलेगा। 

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राजे के साथ सांसद है, विधायक है, पार्टी पदाधिकारी है। इतना कुछ होते हुए भी उनको कोई जिम्मेदारी पार्टी ने नहीं दे रखी है। हर बार किसी पद के लिए उनका नाम चलता है, फिर दूसरे की नियुक्ति हो जाती है। तभी तो ताजा बयान में राजे ने कहा कि राजस्थानियों का प्यार ही मेरे लिए सबसे बड़ा पद है। ये बयान बड़े राजनीतिक दर्शन को अभिव्यक्त करने वाला है।
 

इसी आयोजन में राजे ने पद व जिम्मेदारी से दूर रखने पर तंज करते हुए कहा कि काम अच्छा करें तो पद अपने आप आता है। ये भी एक संदेश है पार्टी नेताओं को। इस कारण इस बार के दर्शन के बयान ने राजनीतिक गलियारे में ज्यादा हलचल मचाई है।

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