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आधे पदाधिकारियों को घर का रास्ता दिखाएंगे, प्रदेश व जिला कार्यकारणियों को छोटा मगर प्रभावी रखा जायेगा

राहुल का अब फोकस राजस्थान पर, सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे
 
 

मधु आचार्य ' आशावादी '
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RNE Special.


राजस्थान प्रदेश कांग्रेस में अब आलाकमान बड़ी सर्जरी की तैयारी में लग गया है। इस सर्जरी के लिए ही सप्ताह के आरम्भ में पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा को दिल्ली बुलाया गया था। उनसे पदाधिकारियों की वह सूची ले ली गयी, जिनको घर का रास्ता दिखाना है। डोटासरा की उस सूची पर कांग्रेस के संगठन महामंत्री के सी वेणुगोपाल से चर्चा भी हो गई है। दिल्ली के उस दौरे में सूची पर ही चर्चा हुई, यह अब जाकर स्पष्ट हुआ है।

राजस्थान कांग्रेस पर राहुल गांधी का फोकस पिछले 10 महीनें से है। मगर एक्शन बारबार किसी न किसी कारण से टल रहा है। इस बीच राहुल गांधी दो बार राज्य के दौरे भी कर चुके हैं और डोटासरा को आधा दर्जन बार दिल्ली भी बुला लिया गया है। राहुल, वेणुगोपाल व खड़गे ने इस मसले पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली, पूर्व सीएम अशोक गहलोत, कांग्रेस महामंत्री सचिन पायलट, मध्यप्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी से भी चर्चा की हुई है। 

राजस्थान की बात बारबार टलती रही है, राज्यसभा चुनाव से पहले निर्णय लेने की पूरी तैयारी थी मगर फिर चुनाव होने तक बात को टाल दिया गया। इस बीच केरलम, कर्नाटक के बाद यूपी, हरियाणा में चुनाव प्रभारी बदल कर राहुल ने राज्य के नेताओं को स्पष्ट संदेश दे दिया कि एक्शन तो होगा, किसी का भी ख्याल नहीं रखा जायेगा। केवल निष्ठा व समर्पण ही प्राथमिक रहेंगे।

200 से अधिक लोग जायेंगे:

प्रदेश कार्यकारिणी में इस समय लगभग 400 लोग हैं, इनमें से आधों को घर का रास्ता दिखाया जाएगा। बड़ी संख्या में सचिव हटाये और बदले जाएंगे। कुछ महासचिवों की भी छुट्टी होगी। डोटासरा ने उन पदाधिकारियों की सूची बनाई है जो निष्क्रिय हैं और बैठकों में नहीं आते। कुछ पदाधिकारी भाजपा के प्रति सॉफ्ट हैं, उनको भी हटाया जा रहा है। इस श्रेणी में कुछ प्रदेश उपाध्यक्ष भी हट रहे हैं। 

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आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष को स्पष्ट कहा है कि प्रदेश व जिलो की टीम को अब छोटा रखा जाए, मगर प्रभावी कार्यकर्ताओं को ही जिम्मेवारी दी जाए। रेस के घोड़े ही टीम में हो, बारात के घोड़े नहीं। डोटासरा ने इसी आधार पर हटाने वालों की एक जम्बों सूची वेणुगोपाल को दी है। इस सूची में 200 से अधिक नाम है।

राहुल की सर्जिकल स्ट्राइक:

राहुल गांधी अब किसी भी सूरत में अनुशासनहीनता को सहन नहीं करेंगे, यह संदेश स्पष्ट रूप से प्रदेश अध्यक्षों व जिला अध्यक्षों को कमनिकेट कर दिया गया है। एक तरह से बड़े नेताओं को भी यह ईशारा है, जो लगातार राज्य में गुटबाजी को पनाह देते हैं।

हाल ही में राहुल ने पंजाब में संगठन को लेकर बड़ा परिवर्तन किया। कुछ नेताओं ने दबाव बनाने की कोशिश की और जताया कि वे बदलाव से सहमत नहीं है। इस मानसिकता के नेताओं को पहले तो बाहर आने दिया गया और चिन्हित कर लिया गया।
 

राहुल ने बाद में प्रदेश प्रभारी भुपेश बघेल के जरिये स्पष्ट संदेश दे दिया कि आलाकमान निर्णय में बदलाव नहीं करेगा। जिसको निर्णय स्वीकार नहीं, वो पार्टी छोड़कर जा सकता है। इस तरह के कड़े रुख की उम्मीद पंजाब के नेताओं ने नहीं की थी।
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कुछ इसी तरह का संदेश अब राजस्थान की गुटबाजी को लेकर दिया गया है। छोटा हो या बड़ा नेता, आलाकमान के निर्णय से सहमत नहीं हो तो अपना अलग रास्ता अपना सकता है। व्यक्तिगत रूप से भी बड़े नेताओं को यह संदेश कमनिकेट कर दिया गया है।
 

अब कभी भी राजस्थान कांग्रेस में बड़े बदलाव की घोषणा हो सकती है। पहले पदाधिकारी बदले जाएंगे और उसके बाद अहम पदों पर बदलाव होगा।

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