जनरंजन : क्रॉस वोटिंग कांग्रेस व भाजपा, दोनों के लिए झटका, कांग्रेस-भाजपा पर लगा ब्लैकशीप का दाग, दोनों दलों में क्रॉस वोटिंग की गहन पड़ताल!!!
बीकानेर नगर निगम में महापौर का चुनाव कांग्रेस ने जीता। 42 वोट थे मगर मिल गए 50। वो भी तब जब कुछ पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग भी कर दी। वहीं भाजपा के पार्षद थे 27 और वोट मिले 30, वो भी तब जब कुछ पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग कर दी। निर्दलीय व अन्य 11 थे, जो दोनों तरफ कुछ कुछ बंटे, जिससे स्पष्ट है कि खरीद फरोख्त हुई। एक तरफ यह घटनाक्रम लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है तो दूसरी तरफ दोनों पार्टियों के नेतृत्त्व के लिए भी। इस पर मंथन जरूरी है।
मधु आचार्य ' आशावादी '
नगर निगम में बोर्ड गठन की प्रक्रिया कल पूरी हो गयी। महापौर अनिल कल्ला व उप महापौर पंकज गहलोत ने कार्यभार ग्रहण कर लिया। महापौर के कार्य ग्रहण करने पर इस तरह का जलसा तो अक्सर होता रहा है, पार्टियां राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन करती रही है, मगर उप महापौर के पदभार ग्रहण पर इस तरह का जलसा पहली बार देखा गया।
जाहिर है उप महापौर सत्तारूढ़ दल भाजपा से है और पार्टी को महापौर में शिकस्त मिली थी, इस वजह से भाजपा को इस तरह की नुमाईश करनी पड़ी। एक तरह से यह कांग्रेस के महापौर को स्पष्ट संकेत है कि लगातार टकराहट रहेगी और हम आराम से उनको काम नहीं करने देंगे। इस तरह का एक बयान भी उप महापौर गहलोत ने दिया। जिस पर महापौर कल्ला ने तीखी व तल्ख प्रतिक्रिया देकर विपक्षी पार्टी को चेता भी दिया।
कुल मिलाकर महापौर को अपने विजन को धरातल पर उतारने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। भाजपा का विरोध भी सहना होगा, जनता के सामने उनके अवरोध को प्रकट कर कटघरे में भी खड़ा करना होगा। कांग्रेस को नगर निगम में दो टर्म के बाद अवसर मिला है, इस कारण वो बहुत कुछ करने की चाह भी दर्शा रही है। राज्य में भाजपा की सरकार है, बजट मिलने में दिक्कतें खड़ी की जाएगी, उनका भी सामना करना होगा।
दोनों तरफ है स्लीपर सेल
महापौर व उप महापौर के चुनावों में एक बात तो पूरी तरह स्पष्ट हो गयी है कि राहुल गांधी की भाषा वाले स्लीपर सेल केवल कांग्रेस में ही नहीं है, अपितु बीकानेर भाजपा में भी है। यह बात अब यो हर समझदार राजनीतिक कार्यकर्ता व आम नागरिक भी समझ गया है। चुनाव में दोनों तरफ से हुई बड़ी क्रॉस वोटिंग ने दोनों दलों में स्लीपर सेल होने की पुष्टि अब तो कर दी है। इन चुनावों से पहले केवल कहा जाता कि दोनों दलों के कई नेता नूरा कुश्ती खेलते हैं, उस बात के प्रमाण इन चुनावों में मिल गए।
कांग्रेस के 42 पार्षद जीते थे और भाजपा के 27। मगर फिर भी भाजपा ने चुनाव जीतने का दावा पूरे भरोसे के साथ किया था, कुछ तो उनके पास आधार था। यदि भीतर बैठे नेताओं की बताई बात पर भरोसा करें तो भाजपा ने अपने 27 सदस्यों के साथ 8 निर्दलीय पार्षदों का भी समर्थन अपने तरीके से जुटाया था। इस तरह उनके पास 35 पार्षद हो गए थे, मगर बहुमत तो 41 पार्षदों से बनता है। उस स्थिति में कांग्रेस का स्लीपर सेल काम आया, ऐसा कहा जाता है। बड़ी संख्या में क्रॉस वोटिंग की व्यवस्था हुई।
दूसरी तरफ कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत के 42 पार्षद थे, पर उनको भी पता था कि भीतर स्लीपर सेल है। इस वजह से उन्होंने 3 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाया। इतने से भी बताते हैं संयोष नहीं हुआ तो भाजपा के स्लीपर सेल से संपर्क हुआ। कहा जा रहा है कि कुछ वोट क्रॉस कराये गए। भाजपा ने कांग्रेस के स्लीपर सेल का ध्यान रखा, अपने भीतर के स्लीपर सेल को पकड़ के नहीं रख सके। परिणाम सामने है, कांग्रेस महापौर का चुनाव जीत गयी। दोनों दलों में जबरदस्त क्रॉस वोटिंग के आरोप लग ही रहे हैं मगर उसका फायदा कांग्रेस को मिल गया।
कांग्रेस में अब ' ब्लैकशिप ' की बात, ग्रहण तो भाजपा को भी लगा है
उप महापौर के चुनाव में बहुमत होने के बाद भी कांग्रेस की मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव हार गई। एक दिन पहले ही तो कांग्रेस ने 80 में से 50 वोट लिए थे, फिर अचानक क्या हो गया ? महापौर के चुनाव में एक भी वोट बेकार नहीं गया। जबकि उप महापौर में एक वोट खारिज हुआ और एक नोटा में चला गया। इस हार पर मुस्लिम नेताओं ने पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला को घेरना शुरू कर दिया है। तब हारकर कल्ला ने स्थिति स्पष्ट करते हुए पूरी जानकारी दी और ' ब्लैकशिप ' की बात कही। जो सही भी है।
दूसरी तरफ यही बात भाजपा में भी तो हुई। पहले दिन महापौर में केवल 30 वोट क्यों मिले, जबकि दूसरे दिन 40 मिल गए। अर्थ यह हुआ कि दोनों तरफ ब्लैकशिप का जोर है। दोनो दलों में यह उदई समान रूप से लगी हुई है।
पड़ताल दोनों दलों में जरूरी है
क्रॉस वोटिंग व ब्लैकशिप, स्लीपर सेल आदि के रोग से ग्रसित दोनों दलों के नेतृत्त्व को गहन पड़ताल कर एक्शन की जरूरत है। नहीं तो नुकसान पार्टियों को होगा, लोकतंत्र को होगा। क्रॉस वोटिंग की पड़ताल कर दोषियों को कड़ी सजा यदि दोनों दलों ने नहीं दी तो दोनों को विधानसभा चुनाव में बड़ी परेशानी उठानी पड़ेगी।

