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जनरंजन : हनुमान बेनीवाल, रविन्द्र सिंह भाटी, नरेश मीणा, व बाप पार्टी बदल सकते हैं समीकरण, भाजपा-कांग्रेस को पहुंचेगा विधानसभा चुनाव में नुकसान!

 

 

राजस्थान में अब तक तो कई प्रयासों के बाद भी कभी किसी चुनाव में तीसरे मोर्चे को उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली है। हमेशा मुख्य मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के मध्य ही होता रहा है। सत्ता भी हर 5 साल में दोनों एक दूसरे को हस्तांतरित करते रहे हैं। यह एक परम्परा सी बन गई है। इस बार इस परंपरा को तोड़ने और तीसरे मोर्चे को खड़ा करने की एक गंभीर कोशिश हो रही है।

मधु आचार्य ' आशावादी '

राज्य की भजनलाल शर्मा के नेतृत्त्व वाली भाजपा सरकार को बने 3 साल पूरे होने वाले हैं और उसके बाद से अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी आरम्भ हो जाएगी। भाजपा व कांग्रेस, दोनों ही चुनाव को लेकर अपनी रणनीति के अनुसार काम करना आरम्भ कर देंगे। हालांकि अन्य दल भी इस बार अभी से चुनावी समीकरण बनाने में लग गए हैं, ताकि दोनों मुख्य दलों को चुनोती दी जा सके। चुनाव को देखते हुए ओवैसी ने भी अब राजस्थान में अपनी गतिविधियां बढा दी है। आम आदमी पार्टी भी अभी से चुनाव को लेकर सक्रिय हो गयी है। माकपा, भाकपा भी गठबंधन के सहारे चुनावी समर में उतरना चाहते हैं।


अभी राज्य में पंचायत राज चुनाव चल रहे हैं, इससे पहले स्थानीय निकायों के चुनाव हुए थे। स्थानीय निकाय के चुनावों में संख्यात्मक दृष्टि से भाजपा को सफलता दिख रही है, मगर सच इससे विपरीत है। गुणात्मक रूप से परिणाम भाजपा की तरफ झुके हुए प्रतीत नहीं होते। भले ही निगम, परिषद व पालिकाओं को भाजपा ने अधिक जीता है, मगर उसे मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस से केवल 0.94 प्रतिशत मत ही ज्यादा मिले हैं शहरी क्षेत्र में। जो डेढ़ लाख के आसपास है।


स्थानीय निकाय के चुनावों में आरएलपी ने भी कई जगह अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके अलावा माकपा व भाकपा भी मैदान में रही है। आदिवासी क्षेत्रों में भारतीय आदिवासी पार्टी ' बाप ' ने भी अपने असर को सामने रखा है। इस तरह स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के अलावा अन्य दलों की भी उपस्थिति रही है।

पंचायत चुनाव असली सेमीफाइनल है

अगले विधानसभा चुनाव का दूसरा सेमीफाइनल यानी पंचायत राज चुनाव अभी चल रहे हैं। इन चुनावों के बाद सेमीफाइनल से तय हो जाएगा कि विधानसभा का जो फाइनल चुनाव होगा, उसमें पलड़ा किसका भारी रहेगा। हालांकि पंचायत राज चुनावों में सदा से ही कांग्रेस मजबूत रही है। इस बार इन चुनावों में भाजपा ने भी पूरी शक्ति लगाई है। अपने मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को मैदान में उतारा है। 

अन्य दल भी कर रहे पंचायत चुनाव में प्रयास

ऐसा नहीं है कि इस बार केवल भाजपा और कांग्रेस ही पंचायत राज चुनाव के लिए प्रयास कर रहे हों, अन्य दलों ने भी अपनी पूरी शक्ति झोंकी है। जिन दलों ने अपनी शक्ति झोंकी है उनमें नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की आरएलपी सबसे आगे है। हनुमान ने चुनाव की कमान अपने व अपने नेताओं के अलावा भाई नारायण बेनीवाल, पत्नी कनिका बेनीवाल को भी सौंपी है। ये लोग जोर शोर से अपने उम्मीदवारों के प्रचार में उतरे हुए हैं। नागौर के अलावा बीकानेर, जोधपुर, पाली, बाड़मेर, जालौर, सीकर, जयपुर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर आदि में भी हनुमान बेनीवाल पूरी तरह से शक्ति लगाई है। 


भारतीय आदिवासी पार्टी ने बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, सलूम्बर, राजसमंद में अपनी शक्ति को लगाया है। तो नरेश मीणा ने कोटा, बारां, दौसा, टोंक, सवाई माधोपुर आदि में अपने उम्मीदवार लड़ाए है। शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने भी बाड़मेर, जैसलमेर आदि में कुछ उम्मीदवार उतारे है। ये नेता एक दूसरे का कुछ सीटों पर समर्थन भी कर रहे हैं।

यदि अन्य दलों का प्रदर्शन अच्छा रहा तो बनेंगे नए समीकरण

यदि पंचायत चुनावों में इन अन्य दलों का प्रदर्शन अच्छा रहा तो अगले विधानसभा चुनाव के लिए राज्य में तीसरे मोर्चे की नींव पड़ जाएगी, जो पहले की तरह कमजोर नहीं होगी। थोड़ी मजबूत होगी और चुनाव परिणामों पर भी पूरा असर डालेगी। क्योंकि दिखने में यह दल दिख रहे हैं मगर इनको भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावण, ओवैसी व आम आदमी पार्टी का भी सहयोग मिलेगा। इन सबके मिलने से बड़ा वोट बैंक इधर - उधर होगा, जिसका असर दोनों ही मुख्य दलों पर स्वाभाविक रूप से पड़ेगा। 

पंचायत राज चुनावों से पता लगेगी संभावनाएं

पंचायत राज चुनावों में इन अन्य दलों को मिलने वाली सफलता से इस बात का अंदाजा लगेगा कि अगले विधानसभा चुनाव में तीसरे मोर्चे की क्या संभावनाएं रहेगी। ये सभी दल एक साथ आते हैं या नहीं, यह भी तभी तय होगा। हालांकि हनुमान बेनीवाल व आरएलपी के समर्थन में आने की बात भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावण व ओवैसी पहले ही कह चुके हैं। अब बेनीवाल नरेश मीणा, बाप पार्टी, रवींद्र सिंह व आप को साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि एक मजबूत तीसरा मोर्चा खड़ा किया जा सके।

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