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केवल दिग्गज बी डी कल्ला किला बचाने में सफल,जयपुर में डोटासरा, पायलट, खाचरियावास के रहते भी नहीं बची साख, भाजपा ने प्रदेश में बड़े नेताओं को उतारा, कांग्रेस केवल स्थानीय नेताओं के भरोसे रही

 

 

 

 

 

राज्य के 10 नगर निगमों के अब चुनाव परिणाम घोषित हो गए, संख्यात्मक दृष्टि से देखा जाए तो भाजपा ने कांग्रेस को करारी शिकस्त दी है। कांग्रेस के दिग्गज पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला ही केवल बीकानेर में पार्टी का महापौर बनाने में सफल रहे हैं, बाकी सारे बड़े नेताओं के यहां कांग्रेस को करारी हार मिली है। कांग्रेस के लिए यह बेहद चिंता की बात है।

 

 

मधु आचार्य ' आशावादी '

 

स्थानीय निकायों के चुनाव परिणाम अब सामने आ गए हैं। प्रदेश में 10 नगर निगम है, उनमें से 9 पर भाजपा ने जीत दर्ज कर कांग्रेस को कड़ी शिकस्त दी है। कांग्रेस को केवल बीकानेर में सफलता मिली है, बाकी सभी बड़े शहरों में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा है। 

प्रदेश की नगर परिषदों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक रहा है। 46 नगर परिषदों में से कांग्रेस केवल 13 ही परिषदें जीत सकी है और 03 पर अन्यों का कब्जा हुआ है। भाजपा ने 30 नगर परिषदों पर कब्जा किया है। नगर पालिकाओं में भी भाजपा ने कांग्रेस को बुरी तरह पछाड़ा है। 250 नगर पालिकाओं में से भाजपा ने 163 में अपना परचम फहराया है। कांग्रेस केवल 81 पालिकाओं पर ही जीत सकी है। 10 पालिकाओं पर अन्यों का कब्जा हुआ है।

कांग्रेस के लिए चिंता की बात यह है कि अधिकतर जगहों पर पार्टी क्रॉस वोटिंग का शिकार हुई है और उसे बड़ी पराजय का सामना करना पड़ा है। कई निकायों में तो कांग्रेस के पास बहुमत था, फिर भी वह जीत नहीं सकी। यह कमजोर नेतृत्त्व को दर्शाता है। इससे भी बड़ी बात यह है कि राज्य सरकार के प्रति लोगों में गहरा असंतोष था, मगर कांग्रेस उसे भी भुनाने में असफल रही। यह राजनीतिक शिकस्त है।

 

आंकड़ों में चुनाव परिणाम

कुल स्थानीय निकाय - 309

भाजपा -- 202

कांग्रेस -- 97

अन्य -- 09

खाटु श्यामजी में आज मतगणना होगी और परिणाम घोषित होगा।

कांग्रेस के सभी बड़े नेता धराशायी

कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं के यहां स्थानीय निकाय भाजपा ने जीते हैं, कांग्रेस को बुरी हार मिली है। कांग्रेस के दिग्गज व पूर्व सीएम अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर में भी नगर निगम भाजपा ने जीता है। गहलोत के खास व कोटा के दिग्गज कांग्रेस नेता शांति धारीवाल भी कोटा नगर निगम पार्टी को नहीं जीता सके।

जयपुर में पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा है, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट है, पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खचरियावास है, फिर भी जयपुर नगर निगम को भाजपा ने जीता है। अलवर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली व दिग्गज नेता भंवर जितेंद्र सिंह का जिला है, वहां भी कांग्रेस हारी है। दिग्गज रघुवीर मीणा के उदयपुर में भी कांग्रेस को हार मिली है।

इस चौतरफी हार के बीच कांग्रेस की लाज किसी ने बचाई है तो वह है दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला। कल्ला ने बीकानेर नगर निगम को जितवा के कांग्रेस के हिस्से में शून्य आने से बचा लिया। 

कांग्रेस की कमजोर रणनीति

इस हार के लिए कांग्रेस की कमजोर चुनावी रणनीति जिम्मेवार है। कांग्रेस के लिए बेहतर स्थिति थी और यदि वो एक रणनीति के अनुरूप चुनाव लड़ती तो उसे बड़ी सफलता मिलती और अधिकतर निकाय उसके पास होते। मगर कमजोर रणनीति ने कांग्रेस की झोली हार से भर दी।

कांग्रेस के लिए बेहतर स्थिति थी, इसका अंदाजा इस बात से लग सकता है कि भाजपा को कांग्रेस से कुल वोट केवल 0.94 प्रतिशत अधिक मिले है। यह कोई बड़ा अंतर नहीं है। यदि सरकार विरोधी लहर को भुनाया जाता तो कांग्रेस भाजपा से आगे भी निकल सकती थी। ठीक इसी तरह यदि मजबूत किलेबंदी कांग्रेस करती तो इतनी प्रचुर मात्रा में क्रॉस वोटिंग भी नहीं होती। बीकानेर इसका उदाहरण है। कांग्रेस के पास 80 में से केवल 42 सीटें थी, मगर रणनीति की सफलता का नमूना यह है कि कांग्रेस को 50 वोट मिले। यदि दिग्गज नेता अपने अपने क्षेत्र में बीकानेर की तरह रणनीति अपनाते तो उनको भी सफलता मिल सकती थी।

प्रचार रणनीति में भी कांग्रेस कमजोर

चुनाव प्रचार में भी कांग्रेस ने किसी भी तरह की रणनीति बनाकर काम नहीं किया। स्थानीय नेताओं के भरोसे सब छोड़ दिया। ऊपर से दखलंदाजी भी पूरी कर जिलों को डिस्टर्ब किया गया। टिकट वितरण में टांग अड़ाई गई। गहलोत, डोटासरा, जुली, पायलट, जितेंद्र सिंह आदि ने अपने इलाकों के अलावा कहीं भी चुनाव प्रचार नहीं किया।

इसके विपरीत भाजपा ने प्रचार में भी रणनीति बनाई। प्रदेश से हर जिले में प्रभारी लगाए गए। वहीं दिल्ली से भी केंद्रीय नेतृत्त्व ने पर्यवेक्षक लगाए। स्वयं सीएम भजनलाल शर्मा ने राज्य भर में रोड शो किये। विधायक अपने इलाकों में सक्रिय रहे। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, अर्जुनराम मेघवाल, गजेंद्र सिंह शेखावत भी सक्रिय रहे। कांग्रेस को अब ईमानदारी से इस हार पर मंथन कर ठोस निर्णय लेने चाहिए।

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