खेजड़ी बचाने पर महापड़ाव: हजारों लोगों ने देर रात तक कलेक्ट्रेट को घेरा, हर वर्ग जुड़ा, सरकार को लाना होगा ठोस कानून
RNE Bikaner.
राजस्थान के बीकानेर से निकली कुछ तस्वीर सरकार के लिए चेतावनी के साथ चिंता का कारण भी बन सकती है। ये तस्वीरें हैं खेजड़ी बचाओ महापड़ाव की।
चेतावनी इस बात की है कि प्रदेशभर ही नहीं आस-पास के प्रदेशों से भी हजारों लोग एक साथ बीकानेर पहुंच गये। एक आवाज बुलंद की-खेजड़ी नहंी कटने देंगे। इन लोगों ने कलेक्ट्रेट कूच कर दिया। देर रात तक कलेक्ट्रेट को घेरे रखा। एक वार्ता हुई जिससे ये संतुष्ट नहीं हुए और नाराजगी सातवें आसमान पर पहुंच गई।
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विधानसभा उप चुनावों में खास प्रदर्शन नहीं कर पाई भजनलाल सरकार के सामने पंचायत-निकाय चुनावों से ठीक पहले पश्चिमी राजस्थान से उठी यह आवाज चेतावनी के स्वर के रूप में देखी जाती है। दरअसल, राजस्थान के बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर सहित बड़े हिस्से मंे सोलर के बड़े प्रोजेक्ट लग रहे हैं। इन प्रोजेक्ट मंे आड़े आ रहे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का आरोप प्रदर्शनकारी लगा रहा है। आरोप है कि अब तक 02 लाख पेड़ काट दिये गये जिनमें बड़ी संख्या खेजड़ी वृक्ष की थी।
हालांकि इस आंदोलन की अगुवाई बिश्नोई समाज कर रहा है लेकिन लगभग सभी वर्गों के प्रतिनिधि इसको अपना समर्थन दे चुके हैं और इसे 36 कौम का आंदोलन बना दिया गया है।
यहां बड़ी बात यह है कि सरकार ने इस प्रदर्शन को रोकने की जी-तोड़ कोशिश। मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव तक से वार्ताओं का दौर चला। प्रदर्शन की घोषणा के पहले दिन तक संवाद होता रहा। सरकार ने आश्वस्त किया कि विधानसभा के बजट सत्र में इसके लिए ठोस बिल पेश होगा। प्रदर्शनकारी इस बात पर संतुष्ट नहीं हुए और कह दिया, जब बिल पेश होगा तो पड़ाव खत्म कर देंगे।

इससे पहले बीकानेर में गोचर के लिए हुए आंदोलन में भी बड़े प्रदर्शन की तैयारी थी लेकिन सरकार के प्रतिनिधियों ने भाजपा नेताओं की अगुवाई में वार्ता कर मामले को एक चिट्ठी से शांत कर दिया। इस बार सरकार को इसमें सफलता नहीं मिल पाई।
चेतावनी महज इस बात की नहीं है कि बिश्नोई समाज सरकार के खिलाफ जाकर पंचायत-निकाय चुनाव में भाजपा की हालत बिगाड़ सकता है, चिंता की दूसरी बात है संतों के सुर। अब तक भाजपा धर्म, सनातन और संतों के साथ का दावा करती रही है। अब हर प्रदर्शन में संत भाजपा सरकार के निर्णयों और अनदेखी के खिलाफ खड़े दिख रहे हैं। गोचर आंदोलन में संत सरजूदास महाराज सहित कई संतों ने अगुवाई की। अब खेजड़ी बचाने के लिए भी मंच पर संतों की संगत बैठी है।

दूसरी ओर चिंता है रिन्युएबल एनर्जी और अर्थव्यवस्था की। राजस्थान को सोलर हब के साथ रिन्युएबल एनर्जी का अग्रणी बनने का मौका मिला है। यह ऐसी ऊर्जा है जो राजस्थान को देश के सबसे विकसित प्रदेश की श्रेणी तक ला सकती है। इसके लिए बड़े प्लेयर मैदान में उतरे हुए हैं। सबसे बड़े सोलर प्राजेक्ट यहां लग चुके हैं। अभी कई प्रोजेक्ट पाइप लाइन में हैं। ऐसे मंे इस माहौल से कहीं निवेश और ऊर्जा के लक्ष्य प्रभावित हुए तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। हालांकि इन प्रोजेक्ट से होने वाली पर्यावरणीय नुकसानों की बात भी आम होने लगी है।
ऐसे में चिंता और चेतावनी की इन तस्वीरों के बीच ऐसा बिल लाना भजनलाल सरकार के लिए बड़ी जरूरत हो गई जो गोचर, पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए उग्र हो रही आमजन की भावनों को नियंत्रित करें और विकसित राजस्थान का रास्ता भी धुंधला ना हो।

