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राजे के दौरे से फिर उभरे कई राजनीतिक समीकरण, मधुबन जाना और भाटी के साथ मन्त्रणा, कयासों की बहार

खेजड़ी बचाओ व गोचर आंदोलन का समर्थन, सरकार सजग
असर है राजे के बयान व एक्शन में
 

मधु आचार्य ' आशावादी '
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RNE Speccial.
 

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे दो दिन के बीकानेर के व्यक्तिगत दौरे पर आई, मगर कई अनुत्तरित राजनीतिक सवाल छोड़ गई। जिनके जवाब तलाशने का काम अब भी पूरी ताकत के साथ हो रहा है। एक तरफ जहां राजे समर्थकों में उत्साह का संचार हो गया वहीं दूसरी तरफ उनके दबी जुबान वाले विरोधियों को जुबान पर धारा 144 लगाए रखनी पड़ी।

दरअसल, वसुंधरा राजे जयपुर से बीकानेर अपने खास समर्थक रहे खाजूवाला विधायक डॉ विश्वनाथ मेघवाल के पुत्र के शादी समारोह में शिरकत के लिए आई थी। मेघवाल को पहला चुनाव लड़ाना, संसदीय सचिव बनाना आदि काम राजे के वर्चस्व के कार्यकाल के दौरान ही हुए थे। उनके परिवार में मांगलिक आयोजन था, इस कारण राजे का आना तो बनता था। इस शादी समारोह में भाजपा के कई दिग्गज पहुंचे थे। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया,सी आर चौधरी, देवेंद्र झाझड़िया, हनुमान बेनीवाल आदि शादी समारोह में पहुंचे थे। जाहिर है, प्रदेश की नजर बीकानेर पर रहनी ही थी।

जयपुर से बीकानेर तक स्वागत:

वसुंधरा राजे जब सड़क मार्ग से जयपुर से बीकानेर के लिए निकली तो उनका लक्ष्य दोपहर 3.30 बजे बीकानेर पहुंचने का था। मगर वे बीकानेर शाम को 7 बजे के आसपास पहुंची। इस देरी की भी अपनी वजह थी। राजे का पूरे रास्ते मे स्वागत होता रहा। ये स्वागत भी अपने तरीके से एक राजनीतिक संदेश ही दे गया। उससे जयपुर में हलचल भी आरम्भ हो गयी। राजे का पब्लिक में क्रेज है, यह तो साबित हो ही रहा है।

राजे का दौरा और राजनीतिक मायने:

वसुंधरा राजे का राज्य में कहीं भी दौरा हो, उसका कोई बड़ा राजनीतिक मायना या तो होता है या फिर निकाला जाता है। बीकानेर दौरे के साथ भी यही हुआ। दिखने में साफ नजर आ रहा था कि वे भाजपा विधायक विश्वनाथ मेघवाल के पुत्र के विवाह समारोह में आई थी, मगर राजनीतिक लोग अलग अलग अर्थ निकाल रहे थे।
सबकी नजरें इस बात पर थी कि उनसे मिलने कौन कौन आया ? आने वाले की किस नेता के प्रति निष्ठा है ? वो पहले किस के गुट में था ? अब गुट क्यों बदला ? इस तरह के कई सवाल खड़े किए जाते है और खुद ही जवाब तय कर लिए जाते है। 

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दौरे के राजनीतिक मायने है, इसमें भी दो राय नहीं। राजनेता का दौरा है तो मायने होने निश्चित ही है। पिछली बार राजे बीकानेर किसान नेता रामेश्वर डूडी के देहांत पर शोक व्यक्त करने आई थी। उस समय उनके साथ खाजूवाला विधायक डॉ विश्वनाथ, बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानन्द व्यास, बीकानेर पूर्व विधायक सिद्धि कुमारी, पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी दिखे थे। इस बार भी कई लोग थे, कुछ नहीं थे, कुछ अन्य भाजपा नेताओं के साथ रहने वाले थे मगर यहां भी थे, तो जाहिर है राजनीतिक मायने तो निकाले ही जायेंगे। नये राजनीतिक समीकरण भी बने है।

मधुबन दौरा, भाटी से मन्त्रणा:

बीकानेर प्रवास के दौरान वसुंधरा राजे दूसरे दिन दिग्गज नेता देवीसिंह भाटी के फॉर्म हाउस मधुबन भी गयी। यहां निर्दलीय मगर राजे के निकटस्थ यूनुस खान भी दिखे। राजे और भाटी के बीच लंबी मन्त्रणा भी हुई।

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ये बताया गया कि बीकानेर में चल रहे खेजड़ी बचाओ व गोचर आंदोलन पर दोनों के बीच बात हुई। राजे ने तब एक ट्वीट किया जिसमें पेड़ की पूजा करते हुए उनका फोटो था। राजे ने खेजड़ी बचाओ आंदोलन व गोचर आंदोलन को अपने समर्थन की घोषणा की। जयपुर तक हलचल हुई। अगले ही दिन मंत्री के के विश्नोई सरकार की तरफ से वार्ता के लिए बीकानेर आ गए। पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति से बात की। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में खेजड़ी कटने के खिलाफ कड़ें कानून को बनाने की घोषणा की। राजे का इन सबमें असर कहीं न कहीं तो था ही। जब दो राजनेता मिलते है तो बात तो राजनीति की ही होती है। कुछ असर दिख गया, कुछ आने वाले समय में नजर आयेगा।

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