कांग्रेस व वाम दलों के गठबन्धन के मध्य कांटे की टक्कर, भाजपा अपने जनाधार व स्ट्राइक रेट को बढ़ाने की कोशिश में
प्रियंका की सक्रियता से वे बड़ा फैक्टर
एन्टीनकम्बेंसी ने वाम दलों की चिंता बढ़ाई
मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Special.
चुनाव आयोग ने जैसे ही केरल के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया, वहां की राजनीति में तेजी से हलचल शुरू हो गयी। केरल में वर्तमान में वाम गठबन्धन की सरकार है। विजयन वहां के मुख्यमंत्री है। सीपीएम इस सरकार की अगुवाई कर रही है।

गठबंधन की सरकार का उत्कृष्ट उदाहरण केरल को माना जाता है। यहां दलों के मध्य सीधे संघर्ष होता ही नहीं। यहां दो गठबंधनों के मध्य ही चुनावी टक्कर वर्षों से हो रही है। जो गठबन्धन चुनाव जीतता है वह पूरे 5 साल निर्बाध रूप से सरकार चलाता है। देश का सर्वाधिक साक्षर राज्य केरल है। यहां वाम दलों के गठबन्धन व कांग्रेस गठबन्धन ही आपस में टकराते रहते है। भाजपा को यहां वर्षों तक राजनीति के लिए कोई जगह नहीं मिली थी। पिछले 10 साल में भाजपा ने अब यहां अपनी उपस्थिति दर्ज करानी आरम्भ की है।
हर बार सरकार बदलने का रिवाज:
केरल में भी राजस्थान की तरह हर 5 साल बाद सरकार बदलने का रिवाज है। एक बार वाम गठबन्धन तो दूसरी बार कांग्रेस का लोकतांत्रिक गठबन्धन। केरल वो राज्य है जिसने कांग्रेस, सीपीएम, सीपीआई को बड़े बड़े नेता दिए है। जिन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपना खास स्थान बनाया है।

कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव नंबूदरीपाद, के करुणाकरण, ए के एंटनी, शशि थरूर आदि वो नाम है जिन्होंने दुनिया की राजनीति में अपनी पहचान बनाई हुई है। केरल को कई बड़ी जन योजनाओं का जनक भी माना जाता है।
भाजपा ने अंगुली टिकाई:
भाजपा दक्षिण के इस राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की जी तोड़ कोशिश करती रही। मगर उसे सफलता नहीं मिली। विधानसभा और लोकसभा में उसका यहां लंबी अवधि तक कोई प्रतिनिधि नहीं था। इन सदनों की बात ही क्यों करें, स्थानीय निकाय व पंचायत राज तक मे उनका प्रतिनिधि नहीं था। भाजपा को इस बात का बड़ा मलाल था। वो लगातार अपने विस्तार का प्रयास करती रही।

भाजपा की ईच्छा 10 साल पहले कड़ी मेहनत के कारण पूरी हुई। अब तो भाजपा का केरल से लोकसभा में एक सांसद भी है। वे केंद्र सरकार में मंत्री भी है।
हाल ही में केरल में निकाय चुनाव हुए। पहली बार तिरुअनंतपुरम नगर निगम में भाजपा का मेयर बना है। यह बड़ी उपलब्धि मानी जानी चाहिए भाजपा की। इन कारणों से ही आज की भाजपा को अब केरल से कुछ उम्मीद हो गयी है। इस बार के चुनाव में भाजपा अधिक जोर लगा रही है। वो अपने वोट बैंक में 2 से 5 फीसदी तक की बढ़ोतरी करती है तो उसका विधानसभा में भी प्रतिनिधि पहुंच सकता है। भाजपा अपना स्ट्राइक रेट बढ़ाने के लिए इस बार के चुनाव में पूरा जोर लगा रही है। इस बार का चुनाव भाजपा के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है।
शशि थरूर कांग्रेस के लिए समस्या:
पिछले कुछ समय से शशि थरूर व कांग्रेस के बीच संबंध सामान्य नहीं है। पार्टी की लाइन के विपरीत जाकर उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर बोला और मोदी के साथ खड़े रहे। तब से ही पार्टी और उनके मध्य एक बड़ी दूरी बन गयी है। थरूर उसके बाद संसदीय दल की बैठकों में भी नहीं गये। इस बीच नगर निगम के चुनाव हुए । थरूर के लोकसभा क्षेत्र तिरुअनंतपुरम में पहली बार भाजपा का मेयर बना। पार्टी नाराज हुई।

बाद में वे सीडब्ल्यूसी की बैठक में शामिल हुए। राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिले। लगा सब सामान्य है, मगर तनाव अब भी है। दूरियां अब भी है। सार्वजनिक भी हो गयी दूरियां। इसका नुकसान भले ही कम हो मगर कांग्रेस को होगा जरूर।
सांसदों की चुनाव की चाह:
कांग्रेस के सामने एक और बड़ी समस्या है। इस बार लगभग 4 सांसद भी विधानसभा चुनाव लड़ने की ईच्छा जता चुके है। माना जा रहा है कि शशि थरूर व के सी वेणुगोपाल की ईच्छा भी विधानसभा का चुनाव लड़ने की है। उसकी वजह है, इन सबको राज आता दिख रहा है। स्थानीय निकाय व पंचायत चुनाव में कांग्रेस नेतृत्त्व वाले लोकतांत्रिक गठबंधन को बड़ी सफलता मिली है। विजयन सरकार एन्टीनकम्बेंसी से भी घिरी है। चुनाव की तारीखों का ऐलान से पहले के सर्वे भी सामने है। इस कारण ही सांसदों में विधानसभा चुनाव लड़ने की होड़ है।

प्रियंका होगी मास्टर स्ट्रोक:
राहुल गांधी लोकसभा चुनाव रायबरेली व वायनाड से जीते थे। उन्होंने केरल की वायनाड सीट खाली की। जहां से प्रियंका गांधी चुनाव लड़ी। वे राहुल से भी अधिक वोटों से चुनाव जीती। जीत के बाद प्रियंका ने अपने आपको पूरी तरह केरल में सक्रिय कर लिया।

स्थानीय निकाय व पंचायत चुनावों में भी वे सक्रिय रही। उनका केरल के वोटर्स में जबरदस्त क्रेज है। महिलाओं का उनसे गहरा जुड़ाव है। वे कांग्रेस के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित होगी। मगर यह भी तय है कि इस बार केरल विधानसभा चुनाव में वाम गठबंधन व कांग्रेस के लोकतांत्रिक गठबंधन के मध्य कड़ा मुकाबला होगा।

