डूडी गुट अब भी गोविंद को लेकर नरम नहीं, गोविंद भी झुकने को तैयार नहीं, टकराहट में फंसी कांग्रेस
मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Special.
बीकानेर कांग्रेस ने संभाग के सबसे बड़े अस्पताल पीबीएम की अव्यवस्थाओं के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया। इस आंदोलन में तेजी उस समय और आ गयी जब कोटा के बाद बीकानेर में भी प्रसुताओं की हालत बिगड़ गयी। दो महिलाओं की मृत्यु भी हो गयी। कांग्रेस ने इस घटना के बाद अपना आंदोलन तेज कर दिया। पहली प्रसुता की मौत पर कांग्रेस भड़क गई और उसके लिए भी आंदोलन कर दिया। प्रशासन ने बीच बचाव किया। मुआवजा व संविदा पर नोकरी की बात पर सहमति हुई।
इस बीच जिले के प्रभारी मंत्री व राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर बीकानेर आये। उनके बयान ने आंदोलन को भड़का दिया। प्रसुताओं के नाचते गाते आने के उनके बयान ने बड़ी नाराजगी पैदा कर दी। इस बीच जोधपुर और बाद में नागौर में भी प्रसुता की मौत के मामले सामने आये। बीकानेर में आंदोलन चल ही रहा था तो प्रदेश कांग्रेस ने यहीं से राज्य सरकार पर हमला बोलने के मन बना लिया।

शहर व देहात कांग्रेस के साथ, महिला कांग्रेस, युवक कांग्रेस, एनएसयूआई, सेवादल आदि भी इस आंदोलन से जुड़े हुए थे। इस आंदोलन में जिले के वरिष्ठ नेता डॉ बी डी कल्ला, नोखा विधायक सुशीला रामेश्वर डूडी, वीरेंद्र बेनीवाल, भंवर सिंह भाटी, मंगलाराम गोदारा, राजेन्द्र मुंड आदि सक्रिय थे। सबकी जुबान पर एक ही चर्चा थी, वो थी पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल की अनुपस्थिति की। उसकी भी एक अलग वजह थी, जो राजनीतिक थी।

ये वजह थी पीछे:
इस आंदोलन की अगुवाई देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिसनाराम सियाग व शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मेघवाल कर रहे थे। वे ही करीने से आंदोलन चला रहे थे। इन दोनों संगठन प्रमुखों व गोविंद मेघवाल के बीच राजनीतिक टकराहट है, जो जग जाहिर है। उसकी भी अपनी एक कहानी है।

दरअसल, पिछले दिनों गोविंद मेघवाल का एक कथित ऑडियो जारी हुआ था जिसमें दिवंगत नेता रामेश्वर डूडी व मदन मेघवाल पर टिप्पणियां थी। उससे दोनों अध्यक्ष नाराज थे। बिसनाराम डूडी गुट के हैं और मदन मेघवाल जब से लोकसभा चुनाव लड़े और खाजूवाला से विधानसभा का टिकट मांगा तब से उनका और गोविंद का छतीस का आंकड़ा है। इन दोनों ने गोविंद मेघवाल की पार्टी में शिकायत भी की। नाराज गोविंद ने कलेक्ट्री पर तब एक बड़ा प्रदर्शन कर कई गंभीर आरोप फिर लगाए और लपेटे में सियाग व मेघवाल को भी लिया।
इस राजनीतिक टकराहट के कारण कांग्रेस के आंदोलन में न तो गोविंद आये और न उनको सूचना दी गयी। यह कांग्रेस की अंदरूनी फुट को चौड़े ले आयी। जबकि गोविंद ने बाद में बात को संभालते हुए ऑडियो का दोष सांसद व केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के पुत्र रविशेखर पर मढ़ा। तब तक बात आगे निकल चुकी थी, कांग्रेस ही आपस में टकरा गई। इस वजह से ही पीबीएम आंदोलन से गोविंद दूर थे।
डोटासरा व जुली का दौरा:
देहात अध्यक्ष बिसनाराम व शहर अध्यक्ष मदन मेघवाल ने इस आंदोलन को गति देने के लिए 30 जून को बीकानेर में कलेक्ट्री के घेराव व जन सभा का कार्यक्रम प्रदेश कांग्रेस की सहमति से रखा। पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली के इस दिन आने का कार्यक्रम तय हो गया। अन्य विधायक व प्रदेश के कुछ नेता भी आये।

अब प्रोटोकॉल है, गोविंद मेघवाल को डोटासरा ने आने का कहा। गोविंद भी प्रदेश अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष आये तो न जायें, यह सम्भव नहीं। वे भी खाजूवाला के अपने समर्थकों के साथ कलेक्ट्री आये। सभा के मंच पर बैठे।
निश्चित रूप से बीकानेर शहर, नोखा, कोलायत, लूणकरणसर, श्रीडूंगरगढ़, खाजूवाला से लोग बड़ी संख्या में आये। विशाल सभा हुई। इस मध्य पहले ही गोविंद मेघवाल ने 1 जुलाई को सीमावर्ती क्षेत्रों में मस्जिद, दरगाह तोड़ने के सरकार के कदमों के खिलाफ कलेक्ट्री पर प्रदर्शन की घोषणा कर रखी थी। डोटासरा, जुली, बीकानेर कांग्रेस ने अपने 30 जून के प्रदर्शन में उस मुद्दे को भी शामिल कर लिया।

सभा में जब गोविंद बोलने खड़े हुए तो डूडी समर्थकों ने नारे लगाने शुरू कर दिए। स्थिति बिगड़ते देख डोटासरा बीच मे आये। उनको शांत कराया, हालांकि पूरी तरह से शांति नहीं हुई। कांग्रेस की टकराहट चौड़े आ गयी। डोटासरा ने अपने भाषण में भी आपसी टकराहट दूर करने पर अधिक बात बोली।
गोविंद भी झुके नहीं:
इस टकराहट व डोटासरा की सीख के बाद भी गोविंद मेघवाल ने 1 जुलाई को मस्जिद, दरगाह तोड़ने के विरोध में कलेक्ट्री पर प्रदर्शन किया। वे भी अच्छी भीड़ लाये। पर इसको सामाजिक संगठनों की तरफ किया गया प्रदर्शन बताया गया। सर्वधर्म के लोगों को जोड़ा गया। मगर भीतर खुंदस टकराहट की ही थी, पर पार्टी का बैनर नहीं दिया। क्योंकि शहर व देहात अध्यक्ष कह चुके थे कि यह पार्टी का प्रदर्शन नहीं। गोविंद पार्टी अनुशासन की बात समझते हैं। इसलिए इसे सामाजिक संगठनों का प्रदर्शन बताया गया। मगर नारे राहुल गांधी व अशोक गहलोत की जय के लगे। एक नारा ' जो हमसे टकराएगा, मिट्टी में मिल जाएगा ' भी लगा, वो चर्चा में रहा।
बड़े नेताओं की दूरी ही रही:
काफी समय से डूडी गुट व गोविंद मेघवाल समर्थकों के मध्य विवाद चल रहा है। मगर आश्चर्यजनक रूप से इस विवाद पर जरा सी भी बात दिग्गज नेता डॉ बी डी कल्ला, भंवर सिंह भाटी, वीरेंद्र बेनीवाल, मंगलाराम गोदारा ने नहीं बोली है। वे भीतरी टकराहट की आंच से बचते दिख रहे हैं। इस पूरी राजनीतिक स्थिति में डूडी गुट की तरफ से उनके समर्थकों को पूरी तरह से लामबंद करने में देहात अध्यक्ष बिसनाराम सियाग जरूर सफल रहे हैं। वैसे भी बिसनाराम ने राजनीतिक गुर रामेश्वर डूडी से ही सीखे हैं।

