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मामला दिल्ली में आलाकमान तक पहुंचा, जयपुर में भी बड़े नेताओं से मेल मिलाप जारी

डूडी गुट v / s गोविंद लगातार चुप रहकर भी आमने - सामने
इंदपालसर के मामले ने टकराहट को बढ़ाया
पंचायत चुनाव पर पड़ेगा झगड़े का बड़ा असर
 

मधु आचार्य ' आशावादी ' 
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RNE Special.

बीकानेर जिले की कांग्रेस में चल रही आपसी टकराहट खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। यह झगड़ा मूल रूप से दिवंगत किसान केसरी व जाट नेता रामेश्वर डूडी गुट व पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल के मध्य है। 

इन दोनों गुटों की आपसी टकराहट के कारण बीकानेर के कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता भी दो गुटों में विभाजित हो गए है और एक दूसरे पर जबरदस्त राजनीतिक हमला कर रहे है। बड़े नेताओं का एक गुट व उनके समर्थक मौन भी है। साफ दिख रहा है कि वे इस गुटीय लड़ाई में अपना लाभ तलाश रहे है। वे प्रदेश के बड़े नेताओं व इन दोनों गुटों के नेताओं को खुश भी रखना चाहते है और इसी वजह से पूरे प्रकरण पर चुप्पी साधे हुए है।
 

कई बड़े नेता तो बात करने पर यह भी विनम्र आग्रह कर रहे है कि हमें क्यों इस लड़ाई में घसीट रहे हो, हम चुप ही ठीक है। ऐसे बड़े नेता दोनों को इस कारण राजी करने में लगे हुए कि जब वे चुनाव लड़ें तो उनका वे विरोध न करें। दोनों गुट नफा नुकसान की परवाह किये बिना टकराहट को जिंदा रखे हुए है। लड़ाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व बयानों से सीधे भी लड़ी जा रही है, तो दिल्ली व जयपुर जाकर भी चुपचाप ' कार सेवा ' कर भी लड़ी जा रही है।

मामला दिल्ली आलाकमान तक :

बीकानेर कांग्रेस की आपसी टकराहट कामामला अब केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रहा है। दिल्ली दरबार तक भी पहुंच गया है। कांग्रेस में वैसे भी निर्णयों पर अंतिम मुहर तो दिल्ली में ही लगती है। इस कारण वहां तक यह मामला जाना तय तय ही था।

देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिसनाराम सियाग दिल्ली गये और इस प्रकरण में राजस्थान के प्रभारी महासचिव सुखजिंदर सिंह रंधावा से मिले है। जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुई है। इससे पहले इस गुट के लोग हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व सांसद दीपेंद्र हुड्डा से मुलाकात कर चुके है।

जयपुर में भी मेल मुलाकात:

प्रदेश के नेताओं से जयपुर में मिलने का सिलसिला भी दोनों तरफ से जारी है। पहले जहां गोविंद मेघवाल 3 से अधिक बार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात कर चुके है, वहीं अब डूडी की धर्मपत्नी व नोखा विधायक सुशीला डूडी ने बिसनाराम सियाग के साथ गहलोत से मुलाकात की है और मामले की अपनी तरफ से पूरी जानकारी दी है।

नोखा विधायक सुशीला डूडी, बिसनाराम सियाग आदि ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली से भी मुलाकात कर अपना पक्ष रखा है। जुली से इन नेताओं की लंबी बात हुई है। इन नेताओं ने वरिष्ठ नेता हरीश चौधरी से भी मुलाकात की है। 



गोविंद भी सक्रिय जयपुर में:

वहीं पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल भी जयपुर में सक्रिय है। वे भी अशोक गहलोत सहित कई नेताओं से मुलाकात कर अपना पक्ष रख रहे है। गोविंद कई विधायकों से भी इस सिलसिले में मिल चुके है।


कल्ला, बेनीवाल, गौदारा  मौन:

कांग्रेस के भीतर के इतने बड़े मामले के बाद भी बीकानेर के कई दिग्गज नेता अब भी मौन है। वे बोलने से बच रहे है। कोई अनोपचारिक बात भी करे तो तुरंत कन्नी काट लेते है। इन पूर्व मंत्रियों , विधायकों का यह व्यवहार समझ से परे है। वे बोलने से शायद इस कारण बच रहे है कि उनका नुकसान न हो, वे क्यों विवाद में पड़े।

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उनका यह सोचना गलत है। न बोलने से भी उतना ही नुकसान है। क्योंकि दोनों पक्ष उन पर फिर भरोसा नहीं करेंगे। पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला, पूर्व मंत्री वीरेंद्र बेनीवाल, पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी, पूर्व विधायक मंगलाराम गौदारा इस मामले में मुंह पर पट्टी लगाये हुए है और बोलने से पूरी तरह बच रहे है।

इंदपालसर से मामला गर्माया:

डूडी समर्थक व गोविंद मेघवाल व उनके समर्थक अपने अपने प्रदर्शनों के बाद से चुप थे और चुप रहकर सोशल मीडिया में आमने - सामने थे। अपने अपने पक्ष में वीडियो, फोटो, रील साझा कर रहे थे।

इसी बीच तीन दिन पहले श्रीडूंगरगढ़ के इंदपालसर के एक आयोजन में टकराहट को एक बार फिर चौड़े ला दिया। दोनों एक दूसरे पर प्रहार करने लग गए। यह मामला है श्रीडूंगरगढ़ के इंदपालसर में स्वर्गीय मालाराम जी जाखड़ व उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मीरा देवी जाखड़ की मूर्ति के अनावरण कार्यक्रम का। इस आयोजन में मंच पर सुशीला डूडी, राजेन्द्र मूंड, बिसनाराम सियाग के साथ गोविंद मेघवाल भी थे। अतिथि नरेंद्र बुडानिया थे। डूडी के कुछ समर्थकों ने फोटो काटकर सोशल मीडिया पर लगाई। इन समर्थकों ने एक कार्ड भी वायरल किया जिसमें गोविंद मेघवाल का नाम नहीं था। राजनीतिक व्यंग्य उन पर किया गया।
 

तब गोविंद समर्थकों ने मंच का पूरा फोटो जारी किया और वो कार्ड भी जारी किया जिसमें गोविंद मेघवाल का नाम प्रिंट था। तकरार बढ़ गयी। तब मीडिया ने आयोजको से संपर्क कर सच पूछा तो उन्होंने बताया कि गोविंद मेघवाल आमंत्रित थे। पहले कार्ड जो छपा, उसमें त्रुटि रह गयी। उसे रोक दिया गया और दूसरे कार्ड छपवाकर वितरित किये गए। मगर उसके बाद भी दोनों पक्ष जो शांत थे, अब फिर भी एक दूसरे के आमने सामने हो गए है।

पंचायत चुनाव पर डालेंगे असर:

इस टकराहट से पंचायत राज चुनावों में कांग्रेस को बड़े नुकसान की आशंका होती दिख रही है। जबकि बीकानेर में तीन दशक से अधिक का समय हो गया, एकतरफा कांग्रेस का वर्चस्व है।

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