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जबकि पूरे समय कल्ला, गोविंद रहे गहलोत के साथ, देहात कांग्रेस अध्यक्ष भी नहीं दिखाई दिए

वीरेंद्र बेनीवाल भी कहीं नजर नहीं आये, मंगलाराम एयरपोर्ट पर दिखे
यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई के नेता भी रहे गायब
बीकानेर कांग्रेस की टकराहट का साफ असर दिखा
 

मधु आचार्य ' आशावादी '
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RNE Special.
 

हालांकि इस बार शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जो बीकानेर दौरा हुआ, वह पूर्ण रूप से निजी था। बीकाजी भुजिया के मुखिया शिवरतन अग्रवाल जी का निधन हो गया था। इस पूरे परिवार से पूर्व सीएम गहलोत के निजी व पारिवारिक सम्बंध उस समय से है, जबसे उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन आरम्भ किया था। उसी रिश्ते को निभाने के लिए गहलोत अंतिम संस्कार में शामिल होने आए थे।
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पूर्व सीएम अशोक गहलोत का किसी भी तरह का दौरा हो, और उसमें राजनीतिक बात न हो, यह सम्भव ही नहीं। राज्य में भैरोसिंह शेखावत के बाद दूसरे ऐसे नेता गहलोत है जो पूरी तरह से पूरे समय व पूर्णकालिक राजनीति करते है। 
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गहलोत का इस बार बीकानेर दौरा ऐसे समय में हुआ है जब यहां की कांग्रेस सीधे सीधे दो टुकड़ों में बंटी हुई। बीकानेर में इस समय स्व रामेश्वर डूडी गुट v/s गोविंद मेघवाल गुट आमने सामने है। दोनों तरफ से राजनीतिक रुप से काफी हल्के आरोप लगे है। दोनों गुटों ने सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन कर अपने झगड़े पर मुहर भी लगाई है। शहर व देहात कांग्रेस के अध्यक्षों ने साफ तौर पर गोविंद मेघवाल के प्रदर्शन को अनुचित बता मोर्चा खोला था।
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इसके बाद इन दोनों राजनीतिक धड़ों की टकराहट की पिच बीकानेर नहीं रही, जयपुर और दिल्ली हो गयी। मतलब दोनों ही पक्ष अपने तीर, तरकश लेकर राज्य व देश की कांग्रेस के आलाकमान के पास पहुंच गए। वहां का ज्यादा असर नहीं हुआ लगता है, तभी तो दोनों की तरफ से सोशल मीडिया पर प्रहार एक - दूसरे पर जारी है।

गहलोत के दौरे पर असर दिखा:

इन दोनों गुटों की टकराहट का असर पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बीकानेर दौरे पर पूरी तरह से दिखा। असर की अपेक्षा भी थी। क्योंकि इस प्रकरण का विवाद आरम्भ होते ही पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल सीधे गहलोत के पास जयपुर पहुंचे थे। फिर 3 बार और मिल लिए। 

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बीकानेर में जब गोविंद मेघवाल की तरफ से बड़ा प्रदर्शन किया गया तब उन्होंने मीडिया से भी साफ साफ कहा कि यदि गहलोत नहीं होते तो मेरी राजनीतिक हत्या कर दी जाती। उन्होंने हर बात, मौके पर दिखाया कि वे गहलोत के साथ खड़े हुए है। गहलोत ने भले ही सधे हुए राजनेता की तरह साथ नहीं दिखाया मगर साथ ही दिखे। 
इस साथ का असर गहलोत के इस बीकानेर दौरे पर बहुत अधिक पड़ा। इस दौरे की बारीकियों को वे भी देख रहे थे, समझ रहे थे। 

गहलोत के साथ ये नेता रहे:

पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बीकानेर दौरे में उनके साथ इस बार प्रमुखता से पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला, पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल, पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी, मकसूद अहमद प्रमुख नेता दिखे। प्रोटोकॉल का अनुसार शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मेघवाल भी साथ रहे। शहर में व अब कुछ कुछ देहात में भी सचिन पायलट गुट से जुड़े नेता भी है, मगर वे भी नजर नहीं आये। भले ही एक दिन पहले दिल्ली से एक तस्वीर निकल के सामने आई जिसमे गहलोत व पायलट हाथ मिलाए कांग्रेस मुख्यालय के समक्ष खड़े दिखे थे।
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जाट नेताओं की दूरी साफ दिखी:

 

गहलोत के इस दौरे में पूरे समय कहीं भी उनके साथ देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिसनाराम सियाग नहीं दिखे, जो आरम्भ से ही डूडी गुट के है। वर्तमान टकराहट में भी पर्दे के पीछे सियाग है, यह आरोप दूसरे गुट का है।

इस दौरे में जिले की एकमात्र कांग्रेस विधायक, नोखा से विजयी व दिवंगत किसान केसरी स्व रामेश्वर डूडी की धर्मपत्नी सुशीला डूडी भी गहलोत के साथ नजर नहीं आयी। जबकि इस प्रकरण के बाद वे जयपुर जाकर गहलोत से भी मिली थी। उनके अलावा पूर्व मंत्री वीरेंद्र बेनीवाल भी कहीं नहीं दिखे। पूर्व विधायक मंगलाराम एयरपोर्ट पर अवश्य दिखाई दिए। युवक कांग्रेस व एनएसयूआई के जाट नेता भी नदारद थे। 

इस टकराहट की खबर दिल्ली तक:


इस टकराहट पर दिल्ली की पूरी नजर है। आलाकमान तक यह बात गम्भीरता से पहुंची हुई है। प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा से देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिसनाराम मिल चुके है। वहीं विधायक व डूडी की धर्मपत्नी सुशीला डूडी व सियाग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा, हरीश चौधरी व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली से मिल चुके है।
दो फाड़ हुई बीकानेर कांग्रेस का प्रतिकूल प्रभाव पंचायत राज चुनावों में सीधे सीधे पड़ेगा। जबकि तीन दशक से यहां के पंचायत राज में डूडी के जरिये कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। इस बार कांग्रेस की इस टकराहट से भाजपा व कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को थोड़ी राहत है।

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