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New Cities Developed : हरियाणा में बनाए जाएंगे 5 नए शहर, 760 गांवों के किसानों पर होगी नोटों की बारिश 

हरियाणा सरकार ने कुंडली-मानेसर-पलवल एक्‍सप्रेसवे के साथ 5 नए शहर विकसित करने की योजना बना रही है

 

हरियाणा सरकार की तरफ से प्रदेश के विकास के लिए नए कदम उठाए जा रहे है। जहां पर हरियाणा सरकार ने नेशनल हाईवे के निकट नए शहर विकसित करने की योजना बनाई है। इसके तहत हरियाणा में पांच नए शहर विकसित करने की योजना बनाई है। सरकार की इस योजना से प्रदेश के 760 गांवों के किस्मत खुलने वाली है और इन गांवों के किसानों पर नोटों की बारिश होने वाली है।

इन गांवों के साथ आसपास के क्षेत्र की जमीन सोना उगलने वाली है। सरकार की तरफ से इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। हरियाणा सरकार ने कुंडली-मानेसर-पलवल एक्‍सप्रेसवे के साथ 5 नए शहर विकसित करने की योजना बना रही है। दूसरी ओर रियल एस्‍टेट सेक्‍टर में भी इस एक्‍सप्रेसवे के दोनों ओर लगातार कई सारे प्रोजेक्ट्स डेवलप हो रहे हैं।

ऐसे में जमीन के भाव भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे (KMP Expressway) की लंबाई 135.6 किलोमीटर है, जबकि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को जोड़ लेने पर पूरे रूट की लंबाई 270 किलोमीटर हो जाती है।

हरियाणा सरकार ने इन पांच नए शहरों को विकसित करने का काम हरियाणा राज्य औद्योगिक और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (HSIIDC) को दिया गया है। हरियाणा सरकार ने यह प्रोजेक्टर वर्ष 2041 को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसके लिए राज्‍य सरकार 'पंचग्राम विकास प्राधिकरण' का गठन कर चुकी है। हाल ही में हरियाणा के उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने इस संबंध में जानकारी दी।

760 से ज्‍यादा गांवों की बदल जाएगी तकदीर

इस योजना में लगभग 760 गांवों की भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रस्तावित है। हालांकि फिलहाल गांवों के नाम लिस्‍ट नहीं हैं, कारण कि भूमि अधिग्रहण, जोनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर का कार्य अभी प्रॉसेस में है। माना जा रहा है कि ये गांव सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम, नूंह और पलवल जैसे जिलों से होंगे। KMP एक्सप्रेसवे के दोनों ओर ये जिले आते हैं।

इस एक्‍सप्रेसवे के दोनों ओर, जो नए शहर विकसित किए जाएंगे वो इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेंटर के तौर पर उभरेंगे. इन शहरों को बसाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की रूपरेखा तैयार की जा रही है। राज्‍य सरकार ने अधिकारियों से कहा है कि वे जमीन मालिकों से लगातार संपर्क में रहें, उनसे बातचीत करें और ई-भूमि पोर्टल पर जमीन की डिटेल्‍स अपलोड कराने के लिए प्रेरित करें।

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