High Court Decision : हाईकोर्ट का सामाजिक एवं आर्थिक आधार आरक्षण पर आया बड़ा अपडेट, इन कर्मियों को मिली राहत
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से ग्रुप सी व डी के तहत भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए राहत भरा फैसला आया है
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से ग्रुप सी व डी के तहत भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए राहत भरा फैसला आया है। इसके तहत सामाजिक एवं आर्थिक आधार पर अंक लेकर नौकरी लगे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। पहले हाईकोर्ट की तरफ से सामाजिक एवं आर्थिक आधार पर आरक्षण देना गलत ठहराया था और इसके चलते प्रदेश में साढ़े दस हजार कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटक गई थी।
हरियाणा के एडवोकेट जनरल परविंदर चौहान व एडिशनल एडवोकेट जनरल संजीव कौशिक ने मामले में पैरवी करते हुए कोर्ट से अपने पूर्व आदेश पर विचार करने का आग्रह किया गया। इस याचिका को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा स्वीकार कर लिया है।
एडिशनल एडवोकेट जनरल संजीव कौशिक ने बताया कि हाई कोर्ट के इस आदेश से लगभग साढ़े दस हजार के करीब कर्मचारियों को राहत मिली है जिनकी नौकरी पर कोर्ट के आदेश के बाद तलवार लटक गई थी।
उन्होंने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व आदेश में ग्रुप सी व डी के करीब 53 हजार पदों के लिए आयोजित परीक्षा के परिणाम को रद करने व सामाजिक-आर्थिक आधार पर मिलने वाले पांच अंकों का लाभ दिए बिना सीईटी के आधार पर नए सिरे से मेरिट सूची तैयार करने के आदेश दिए थे।
इसके खिलाफ सरकार ने पुनर्विचार करने का आग्रह किया था। इससे पहले सामाजिक व आर्थिक आधार पर आरक्षण को लेकर जारी विस्तृत आदेश में हाई कोर्ट ने कहा था कि यह एक प्रकार से आरक्षण देने जैसा है। जब आर्थिक पिछड़ा वर्ग के तहत राज्य सरकार ने आरक्षण का लाभ दिया है तो क्यों यह आर्टिफिशियल श्रेणी बनाई जा रही है।हाई कोर्ट ने कहा था कि यह लाभ देने से पहले न तो कोई डाटा एकत्रित किया गया और न ही कोई आयोग बनाया गया। इस प्रकार, पहले सीईटी में पांच अंकों का और फिर भर्ती परीक्षा में 2.5 अंकों का लाभ तो भर्ती का परिणाम पूरी तरह से बदल देगा।
इन अंकों का लाभ देते हुए केवल पीपीपी धारकों को ही योग्य माना गया है, जो संविधान के अनुसार सही नहीं है। नियुक्ति में किसी लाभ को राज्य के लोगों तक सीमित नहीं रखा जा सकता है। जहां सभी नागरिक रोजगार पाने के हकदार हों वहां राज्य सरकार को सार्वजनिक रोजगार में नागरिकता के आधार पर विशेष आरक्षण लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
हाई कोर्ट ने सभी पदों के लिए नए सिरे से आवेदन मांगने और छह माह के भीतर भर्ती पूरी करने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के आदेश से नियुक्ति पा चुके 23 हजार कर्मचारियों को नए सिरे आयोजित होने वाली भर्ती पूरी होने तक सेवा में बनाए रखने का आदेश दिया गया था। यदि वे दोबारा आयोजित परीक्षा में पास होकर अपना स्थान नहीं बना पाते हैं तो उन्हें बर्खास्त करने का हाई कोर्ट ने आदेश दिया था।

