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Haryana : हरियाणा के इस शहर में 30 लाख या उससे ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने वालों का इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने रिकॉर्ड मांगा

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को जमीन बेचने वालों को देना होगा टीडीएस 

 

हरियाणा में जमीन बेचने व खरीदने वालों पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने नजर रखनी शुरू कर दी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से 30 लाख रुपय या इससे अधिक की प्रॉपर्टी खरीदने वालों का रिकार्ड को तलब कर लिया है। ऐसे में इन लोगों को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टीडीएस देना होगा और उनको जुर्माने का भुगतान भी करना पड़ सकताौ। 

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने साल 2019 से 2025 के बीच पंचकूला जिले में 30 लाख रुपए या उससे ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने वालों का रिकॉर्ड मांगा है। आईटी डिपार्टमेंट ने पंचकूला प्रशासन के अधीन आने वाली सभी 5 तहसीलों का रिकॉर्ड देने को कहा है। मकसद ये देखना है कि जिन लोगों ने 50 लाख रुपए या उससे ऊपर की जमीन की खरीद-फरोख्त की है, उन्होंने एक प्रतिशत टीडीएस दिया है या नहीं।

पंचकूला, कालका, रायपुररानी, बरवाला उप तहसील, मोरनी उप तहसीलों में इसकी डिटेल तैयार की जा रही है। पंचकूला के डीसी सतपाल शर्मा ने बताया कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 30 लाख रुपए या इससे ज्यादा की प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने वालों की डिटेल मांगी है। यह लिस्ट तैयार की जा रही है, जो जल्द ही सौंप दी जाएगी।

पंचकूला की तहसीलों में 2019 से 2025 तक हर फाइनेंशियल ईयर के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को भेजी गई स्टेटमेंट फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (एसटीएफ) रिपोर्ट में पैन नंबर का कॉलम खाली छोड़ दिया गया था। अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पंचकूला प्रशासन की पांचों तहसीलों को नोटिस जारी कर 7 साल का एसटीएफ रिकॉर्ड भेजने को कहा है। 

कई लोगों के पैन नंबर नहीं लिखे गए थे

2019-2020 के दौरान प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने वाले को पैन नंबर देना अनिवार्य नहीं होता था। इस वजह से अभी भी कुछ प्रॉपर्टी खरीदार व बेचने वाले हैं, जिनके पैन नंबर का डाटा तहसील में नहीं है। पंचकूला प्रशासन ने इसकी सूचना इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को दी थी। अब सरकार के निर्देश के बाद तहसीलों द्वारा उन सभी लोगों को नोटिस जारी कर पैन नंबर की डिटेल देने को कहा जा रहा है, ताकि वे उसकी रिपोर्ट इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को भेज सकें।

कमाई छुपाने या कम दिखाने का जुर्माना लग सकता है, ब्याज भी देना पड़ता है

देश में टैक्स विभाग की डिजिटल निगरानी अब बहुत सख्त हो गई है। आयकर विभाग ने स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (एसएफटी) के जरिए हाई-वैल्यू लेन-देन पर पूरी नजर रखना शुरू कर दिया है। खास तौर पर 30 लाख रुपए से ज्यादा कीमत वाली अचल संपत्ति (जमीन, मकान आदि) की खरीद-बिक्री अब अपने आप टैक्स अधिकारियों को रिपोर्ट हो जाती है।

रजिस्ट्रार ऑफिस (सब-रजिस्ट्रार) को नियम 114-ई के तहत ऐसी सभी डील्स की जानकारी फॉर्म 61-ए में भरनी पड़ती है, जहां बिक्री मूल्य या स्टाम्प ड्यूटी वैल्यू 30 लाख रुपए या उससे ज्यादा हो। यह सारी जानकारी टैक्सपेयर की एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) में दिखाई देने लगती है। अगर लेन-देन की रकम 50 लाख रुपए या उससे ज्यादा है तो खरीदार को सेक्शन 194-आईए के तहत 1% टीडीएस काटकर जमा करना अनिवार्य है।

ऐसा न करने पर टैक्स, ब्याज और जुर्माना लग सकता है। पिछले कुछ सालों में बहुत से लोगों को नोटिस मिले हैं, क्योंकि उनके एसएफटी डेटा और आईटीआर में दिखाई गई जानकारी में अंतर पाया गया। ऐसी स्थिति में सेक्शन 270-ए के तहत इनकम छुपाने या कम दिखाने का जुर्माना लग सकता है, साथ में ब्याज भी देना पड़ता है और विभाग दोबारा जांच (रीअसेसमेंट) भी कर सकता है।

रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर ही देना होता है टीडीएस

50 लाख या उससे ज्यादा की कीमत की प्रॉपर्टी खरीदने पर इनकम टैक्स 26 क्यूबी फॉर्म के तहत प्रॉपर्टी की कीमत का एक प्रतिशत टीडीएस जमा करवाना पड़ता है। सरकार के नियम व शर्तों के आधार पर यह टैक्स कृषि योग्य जमीन पर नहीं लगता। यह टैक्स ज्यादातर रेजिडेंशियल एरिया की प्रॉपर्टी पर ही लगता है।

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