Punjab का रणसिंह कलां गांव बन रहा मॉडल, दिल्ली जैसे प्रदूषण से राहत दिला सकते हैं ऐसे उपाय!
पराली प्रबंधन में पंजाब ने दिखाया देश को रास्ता
RNE New Delhi.
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराजसिंह कृषि विकास और किसानों की जरूरतों का मूल्यांकन करने के लिए इन दिनों देशभर में खेतों में जाकर वास्तविक हालात से रूबरू हो रहे हैं। इसी कड़ी में जब वे पंजाब के मोगा जिले के रणसिंह कलां गांव में पहुंचे तो यहां कि कृषि व्ययस्थ और किसानों की सोच देख खुश हो गए। गांव की पंचायत और किसानों को बधाई दी तथा इसे पूरे देश के लिए प्रेरक आदर्श बताया।

इसलिए खुश हुए शिवराज सिंह :
दरअसल यहां मंत्री शिवराजसिंह ने किसानों और ग्रामीणों के साथ संवाद किया। वे इस बात पर अत्यधिक खुश थे कि इस गांव के किसानों ने पराली नहीं जलाने, फसल अवशेष प्रबंधन, कम रासायनिक खाद के उपयोग और पानी-बचत वाली खेती करने जैसे रास्ते पर चल रहे हैं। मंत्री शिवराजसिंह ने कहा, देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर पर है, वहीं उत्तरी भारत में पराली जलाने से उठने वाला धुआं भी प्रदूषण बढ़ाने की एक बड़ी वजह रहा है। ऐसे में पंजाब के रणसिंह कलां गांव का पराली न जलाने वाला प्रयोग एक सकारात्मक बदलाव की बयार के रूप में देखा जा रहा है।
रणसिंह कलां में छह साल से बिना पराली जलाए खेती :
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि रणसिंह कलां गांव के किसान पिछले 6 वर्षों से पराली नहीं जला रहे हैं, बल्कि फसल अवशेष को खेत में मिलाकर डायरेक्ट सीडिंग और हैप्पी सीडर जैसी तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। इससे मिट्टी में कार्बन और जैविक पदार्थ बढ़ रहे हैं, रासायनिक उर्वरकों की खपत घट रही है और उत्पादन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ रहा है। उन्होंने सरपंच प्रीत इंदरपाल सिंह और पूरे गांव को बधाई देते हुए कहा कि यह गांव देशभर के उन क्षेत्रों के लिए संदेश दे रहा है, जहां अभी भी पराली जलाई जाती है। इस गांव ने बता दिया है कि अवशेष को खाद और मल्चिंग के रूप में उपयोग कर पानी, डीज़ल और खाद बचाते हुए भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है।

किसानों के साथ खेत पर तकनीकी संवाद :
मंत्री चौहान ने खेत में किसान गोपाल सिंह के साथ खड़े होकर सीधी बिजाई वाले गेहूं की फसल का निरीक्षण किया और जर्मिनेशन, जड़ों (क्राउन रूट) और सिंचाई की जरूरत के वैज्ञानिक पक्ष को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि फसल की शुरुआती अवस्था में क्राउन रूट विकसित होने तक अतिरिक्त सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ी और एक माह तक बिना पलेवा के भी फसल स्वस्थ खड़ी है, जिससे पानी और डीज़ल की महत्वपूर्ण बचत संभव हुई है।
यूं सुधर जाती है मिट्टी की सेहत :
केंद्रीय मंत्री चौहान ने यह भी रेखांकित किया कि किसान पहले जितनी मात्रा में DAP और यूरिया डालते थे, अब उससे कम उर्वरक से काम चल रहा है, जबकि उत्पादन में कमी की आशंका नहीं है, क्योंकि पराली की मल्चिंग से खरपतवार दब रहे हैं, मिट्टी की नमी बनी हुई है और मित्र जीव सुरक्षित हैं। चौहान ने समझाया कि पराली को जलाने की बजाय खेत में मिलाने से प्राकृतिक मल्चिंग हो जाती है, जिससे मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहता है, नमी संरक्षित होती है और खरपतवार कम उगते हैं। इससे किसानों को निराई-गुड़ाई, सिंचाई और रासायनिक दवाओं पर होने वाला खर्च घटता है तथा मिट्टी का ऑर्गेनिक कार्बन स्तर सुधरने से पैदावार की स्थिरता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि पंजाब के इस प्रयोग से स्पष्ट है कि पर्यावरण की रक्षा और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लक्ष्य साथ-साथ चल सकते हैं, बशर्ते खेत स्तर पर वैज्ञानिक पद्धतियां ईमानदारी से अपनाई जाएं और पंचायत तथा समुदाय सक्रिय भूमिका निभाएं।

तिलहन को बढ़ावा और आयात पर निर्भरता घटाने का आह्वान :
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने किसान गुरप्रीत सहित ग्रामीणों के सुझावों का उल्लेख करते हुए कहा कि तिलहन फसलों जैसे सरसों को अपनाने से किसान न केवल अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं बल्कि देश को खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता से भी मुक्त करने में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज भी देश को बड़ी मात्रा में खाद्य तेल बाहर से मंगाना पड़ता है, जिससे कीमती विदेशी मुद्रा बाहर जाती है, जबकि यदि खेती के एक हिस्से में तिलहन बढ़ाए जाएं तो राष्ट्रीय जरूरतें घरेलू उत्पादन से पूरी की जा सकती हैं।
उन्होंने गांव के किसानों को इस सोच के लिए धन्यवाद देते हुए इसे “देश सेवा” की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया और कहा कि पंजाब जैसे अग्रणी कृषि राज्य से शुरू हुई यह पहल देशभर में तिलहन मिशन को नई गति दे सकती है।

दलहन की एमएसपी पर पूरी खरीद होगी :
चौहान ने रणसिंह कलां के खेत से ही किसानों को बड़ा आश्वासन देते हुए कहा कि जो किसान तुअर, उड़द, मसूर और चना जैसी दलहन फसलों की बुवाई करेंगे, उनकी पूरी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जाएगी। उन्होंने माना कि किसान के लिए यह पूरी तरह वाजिब अपेक्षा है कि यदि उचित दाम मिलें तो वह अधिक उत्पादन करने के लिए तैयार है, इसलिए सरकार इन फसलों की एमएसपी खरीद की पूर्ण गारंटी देगी, बशर्ते किसान रजिस्ट्रेशन करा लें।

