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Train Time Changed : रेलवे ने भरतपुर रेलवे स्टेशन से निकलने वाली 102 ट्रेनों के समय को बदला

पश्चिम मध्य रेलवे की तरफ से ट्रेनों में समय में किए गए बदलाव को एक जनवरी 2026 से लागू कर दिया है।
 

रेलवे विभाग की तरफ से नए साल पर ट्रेनों के समय में बड़ा बदलाव किया है। इससे राजस्थान से होकर निकलने वाली अधिकतर ट्रेनों में समय में बदलाव हुआ है। पश्चिम मध्य रेलवे की तरफ से ट्रेनों में समय में किए गए बदलाव को एक जनवरी 2026 से लागू कर दिया है। हालांकि ट्रेनों के समय में ज्यादा बदलाव नहीं किया गया है। इसमें ट्रेन के चलने का समय में एक से पांच मिनट का समय बदला गया है।

रेलवे द्वारा जारी नए समय सारणी के अनुसार राजस्थान के भरतपुर रेलवे स्टेशन से निकलने वाली 102 ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है। बदलाव भले ही मामूली हो, लेकिन इससे यात्रियों को सतर्क रहने की जरूरत है। कोटा रेल मंडल के वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि रेलवे ने ट्रेन के समय में बदलाव किया गया है। इसलिए यात्री रेलवे ऐप पर संशोधित समय की जांच कर सकते हैं। 

स्टेशन प्रबंधक डीसी मीना के अनुसार अप लाइन में भरत्पुर से कोटा की ओर जाने वाली 29 और जयपुर की ओर जाने वाली 22 ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है। वहीं डाउन लाइन में कोटा की ओर से आने वाली 28 और बांदीकुई-जयपुर दिशा की 23 ट्रेनों के समय में 1 से 5 मिनट तक का अंतर आया है।

असुविधा से बचने के लिए ये करें यात्री

 रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर 139, ऑनलाइन एनटीईएस वेबसाइट और स्टेशन की पूछताछ खिड़की से समय की पुष्टि करने की सलाह दी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि समय से पहले स्टेशन पहुंचना यात्रियों के लिए बेहतर रहेगा, ताकि ट्रेन छूटने की आशंका से बचा जा सके।

1-5 मिनट का फर्क, इसलिए अहम पंक्चुअलिटी का गणितः ट्रेन अक्सर ट्रैक की क्षमता या क्रॉसिंग के कारण बीच के सेक्शन में कुछ मिनट पिछड़ जाती हैं। 1 से 5 मिनट का यह "बफर टाइम ट्रेन को अगले जंक्शन पर राइट टाइम पहुंचाने
में मद्द करता है। 

कनेक्टिंग यात्रियों के लिए  अलर्ट : अगर आपको जयपुर या कोटा से दूसरी ट्रेन पकड़नी है, तो यह 5 मिनट का अंतर प्लेटफॉर्म बदलने या सामान शिफ्ट करने के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

डिजिटल अपडेट और कोहरे का असर: अब पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक है। पोर्टल पर समय अपडेट होने के बाद पुरानी जानकारी के भरोसे रहना यात्री की तकनीकी चूक मानी जाती है। साथ ही, कोहरे के सीजन में यह बदलाव लोको पायलट को सुरक्षित गति बनाए रखने में मदद करता है।

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