Rajasthan BJP को ढाई साल बाद मिला महामंत्री अजेय कुमार, बिहार के अजेय को नितिन नवीन ने दी राजस्थान की जिम्मेदारी
Jun 1, 2026, 15:10 IST
RNE Jaipur.
राजस्थान भाजपा को करीब ढाई साल बाद नया संगठन महामंत्री मिल गया है। पार्टी नेतृत्व ने बिहार मूल के वरिष्ठ संगठनकर्ता अजेय कुमार को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि से आने वाले अजेय कुमार को संगठन खड़ा करने, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में माहिर माना जाता है। राजस्थान भाजपा में संगठन महामंत्री का पद जनवरी 2024 में चंद्रशेखर के तेलंगाना स्थानांतरण के बाद से प्रभावी रूप से खाली था। ऐसे में लंबे इंतजार के बाद पार्टी ने एक ऐसे चेहरे पर भरोसा जताया है, जिसने उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को नई ऊर्जा देने का काम किया।
पर्दे के पीछे काम करने वाले नेता :
अजेय कुमार की पहचान उन नेताओं में होती है जो सुर्खियों से दूर रहकर संगठनात्मक काम पर फोकस करते हैं। भाजपा और संघ के भीतर उन्हें एक अनुशासित, शांत स्वभाव और परिणाम देने वाले रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है। संगठन महामंत्री का पद भाजपा में बेहद अहम माना जाता है क्योंकि यही पद संघ और पार्टी के बीच समन्वय की मुख्य कड़ी होता है। उनकी जिम्मेदारियों में बूथ प्रबंधन, सदस्यता विस्तार, कार्यकर्ता प्रशिक्षण, चुनावी रणनीति, संगठनात्मक विस्तार और प्रदेश से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक संवाद स्थापित करना शामिल रहेगा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ सफर :
अजेय कुमार ने भाजपा संगठन में अपनी पहचान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बनाई। मेरठ, बिजनौर और मुरादाबाद जैसे राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उन्होंने संगठन को मजबूत करने का काम किया। बूथ प्रबंधन और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत करने में उनकी विशेष भूमिका रही। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अनुभव ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का आधार बना।
उत्तराखंड में निभाई जिम्मेदारी :
साल 2019 में भाजपा नेतृत्व ने उन्हें उत्तराखंड भाजपा का संगठन महामंत्री नियुक्त किया। यह उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उस समय पार्टी संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की जरूरत थी और अजेय कुमार को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। अजेय कुमार की सबसे बड़ी परीक्षा 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में हुई। राजनीतिक चुनौतियों और नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद भाजपा ने लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की। पार्टी की इस सफलता के पीछे संगठन की मजबूत तैयारी को प्रमुख कारण माना गया और अजेय कुमार की भूमिका की व्यापक चर्चा हुई।
राजस्थान में निकाय, पंचायत चुनाव बड़ी चुनौती :
राजस्थान भाजपा फिलहाल सत्ता में है, लेकिन आगामी स्थानीय निकाय चुनाव, पंचायत चुनाव और 2028 विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन को और मजबूत करना पार्टी की प्राथमिकता है। ऐसे में अजेय कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना, संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाना तथा नए कार्यकर्ताओं को जोड़ना होगा। भाजपा के भीतर अजेय कुमार को कई बार "पर्दे के पीछे का रणनीतिकार" और "राइजिंग चाणक्य" भी कहा जाता है। इसकी वजह उनकी माइक्रो लेवल प्लानिंग, बूथ आधारित राजनीति, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और बिना प्रचार के परिणाम देने वाली कार्यशैली है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि उत्तराखंड में संगठनात्मक सफलता का मॉडल राजस्थान में कितना सफल साबित होता है और अजेय कुमार भाजपा संगठन को किस नई दिशा में ले जाते हैं।

