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Camel Festival Bikaner: ऊंट के जबड़े में युवक का सिर, खाट पर लेटे युवक की छाती पर पांव रखा

ऊंट और इंसान की जुगलबंदी देख सैकड़ों दर्शक हैरान
 

RNE Bikaner.
विशालकाय ऊंट ने अचानक युवक के मुंह और सिर को अपने मजबूत जबड़े में ले लिया। देखने वालों की सांसें थम गई। रोमांच के साथ ही डर और बैचेनी बढ़ने लगी। हैरान लोगों के हाथ तब तालियां बजाने लगे जब एक ही इशारे पर ऊंट न केवल अलग हो गया वरन झुककर अभिवादन भी किया। ढोल की थाप पर नाचने लगा। मानो जता रहा हो "मैं तो मजाक कर रहा था।"

यह नजारा है बीकानेर के करणीसिंह स्टेडियम में चल रहे ऊंट महोत्सव यानी Camel Festival का। फेस्टिवल के दूसरे दिन आज  रेगिस्तान के जहाज ने जमकर करतब दिखाए। उसने कभी अपने मालिक के सिर को जबड़े में लिया तो कभी दांतों में बाल्टी दबाकर जमकर नाचा। ढोल की थाप पर ताल मिलाकर नाचते ऊंट के पांवों में बंधे घुंघरू मानो लगातार संगत दे रहे थे। रोमांचित दर्शकोंकी तालियों से मैदान गूंज रहा था।

Camel Festival Bikaner ऊंट के जबड़े में युवक का सिर, खाट पर लेटे युवक की छाती पर पांव रखा

रोमांच तब और बढ़ गया जब ऊंटनियों की फैशन परेड शुरू हुई। सजी धजी ऊंटनियां से मानों रैंप कैटवॉक कर रही थी। ऊंटों के हैरतअंगेज पर करतबों के बीच एक मौका ऐसा भी आया जब ऊंट दो पलंग पर खड़ा हुआ उसके पैरों के नीचे मालिक लेट गया। इसके बाद सीने पर पैर रख ऊंट ने करतब दिखाया। ऊंट के पालक ने भी उसकी पीठ पर सिर के बल उल्टे खड़े होने का करतब दिखाया।

ढोल-बाजे के साथ ऊंट लगातार मैदान में घूमता हुआ डांस करने लगा। पलंग के चारों तरफ चाय की केटली, पानी की बाल्टी और माला को रखा गया। ऊंट बारी-बारी से एक-एक सामान को उठा कर अपने मालिक को देता रहा। आखिर में माला अपने मुंह में उठाकर मैदान में मौजूद एक पर्यटक को पहना दी।

दो पलंग पर खड़े होकर ऊंट ने एक से बढ़कर एक स्टंट दिखाए। 
रस्सी के इशारों पर करते हैं डांस, झालर और मालाओं के साथ सजाकर पहुंचे

ऊंट पालक महावीर ने बताया कि इन्हें इशारों पर डांस करवाने और करतब दिखाने के लिए अलग-अलग ट्रेनिंग दी जाती है। ये ज्यादातर रस्सी के इशारों पर करतब दिखाते है।

ऊंटों के शरीर पर अरावली बचाने का संदेश, जूनागढ़ का किला 

ऊंटों से जुड़ी कई प्रतियोगिताओं में एक उनके बाल कतरने की प्रतियोगिता भी शामिल रही। इसमें कलाकारों ने अलग अलग डिजाइन में ऊंटों के बाल काटे। यूं लगा कि ऊंटों के बदन पर पूरी चित्रकथा उकेर दी। किसी के बदन पर जूनागढ़ का किला बना नजर आया तो कोई रेगिस्तान का जन जीवन लिए घूम रहा था। एक ऊंट के बालों की कतरन कर अरावली बचाने का संदेश भी दिया गया।

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