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Bikaner : बीजेपी का टारगेट-पहली बार जिला प्रमुख, कांग्रेस को डूडी की विरासत बचाना, बेनीवाल दोनों के लिए चुनौती!

इस बार हनुमान बेनीवाल नागौर के बाद सर्वाधिक जोर बीकानेर पर लगाएंगे

 

भाजपा - कांग्रेस की अंतर्कलह भी बड़ी परेशानी खड़ी करेगी

बीकानेर में पंचायत राज विभाग के चुनाव की प्रक्रिया आरम्भ हो गयी है। गांवों की चौपालों में अब चुनावी चर्चा ही प्रमुखता से हो रही है। वार्ड पंच व सरपंच के चुनावों से इस राज की नींव खड़ी होती है और चुनावी घमासान प्रधान व जिला प्रमुख तक मचता है। गांवों की सरकार के लिए अब सभी राजनीतिक दलों ने शक्ति झोंक दी। भाजपा व कांग्रेस के मध्य आरएलपी ने आकर दोनों की राजनीतिक गणित बिगाड़ दी है। दोनों दल घबरा रहे हैं।

मधु आचार्य ' आशावादी '

पंचायत राज के चुनावों की प्रक्रिया पूरे राजस्थान के साथ बीकानेर में भी आरम्भ हो गयी है। वार्ड पंच, सरपंच के साथ ही पंचायत समिति सदस्यों व प्रधानों के साथ जिला परिषद सदस्यों और जिला प्रमुखों के चुनाव की लंबी प्रक्रिया सरकार की तरफ से सम्पन्न कराई जायेगी। पंचायत समिति सदस्यों व जिला परिषद सदस्यों के चुनाव ईवीएम के माध्यम से होंगे, बाकी चुनाव बैलेट से कराए जाएंगे। पंचायत राज चुनावों के लिए राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां पूरी कर ली है और उम्मीदवारों के चयन का काम भी आरम्भ कर दिया गया है। चुनाव संचालन के लिए राजनीतिक दलों ने कमेटियों के गठन भी कर लिए है। पार्टियों के प्रदेश नेतृत्त्व ने प्रभारी भी नियुक्त कर दिए हैं।

सीएम बीकानेर

क्या भाजपा पहली बार जिला प्रमुख बना पाएगी !

भाजपा चूंकि बीकानेर में कभी भी अपना जिला प्रमुख नहीं बना सकी है, इस कारण इस बार उसकी पूरी कोशिश है कि वो इस लक्ष्य को पाने में सफल रहे। एक बार भाजपा को जिला परिषद में बहुमत भी मिला था मगर स्व रामेश्वर डूडी भाजपा के मुंह से जीत का निवाला छीन कर ले गए थे। कांग्रेस के पास इस बार रामेश्वर डूडी जैसा कद्दावर नेता नहीं है, जो अपने जीवनकाल में पंचायत चुनाव की बीकानेर में धुरी रहते थे। उस कमी के कारण भाजपा इस बार कुछ ज्यादा उम्मीद पाले हुए है। इसी उम्मीद के सहारे पिछले दिनों बीकानेर पंचायत राज चुनाव के लिए खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यहां के नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में सांसद व केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, विधायक डॉ विश्वनाथ मेघवाल, विधायक ताराचंद सारस्वत, विधायक अंशुमान सिंह भाटी, पूर्व विधायक बिहारी लाल विश्नोई व देहात भाजपा अध्यक्ष श्याम पंचारिया ने भाग लिया। उस बैठक में चुनावी रणनीति बनाई गई। चुनाव की कमान केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को दी गयी है। वे ही पूरा चुनाव देखेंगे।

डूडी

कांग्रेस में डूडी की विरासत!

कांग्रेस ने रामेश्वर डूडी की प्रथम पुण्यतिथि पर हुई श्रद्धांजलि सभा को ही चुनावी सभा मे तब्दील कर दिया था। बुधवार को जयपुर में कांग्रेस ने पंचायत राज चुनाव की रणनीति के लिए बैठक भी की, जिसमें देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिसनाराम सियाग ने भाग लिया। कमोबेश सियाग के हाथ मे ही चुनाव की कमान रहेगी। उनके साथ कोलायत में भंवर सिंह भाटी, खाजूवाला में गोविंद मेघवाल, नोखा में सुशीला डूडी, लूणकरणसर में राजेंद्र मूंड, वीरेंद्र बेनीवाल, श्रीडूंगरगढ़ में मंगलाराम गोदारा रहेंगे। 

हनुमान

हनुमान बेनीवाल की एंट्री :

इस बार के बीकानेर पंचायत राज चुनाव में केवल भाजपा व कांग्रेस ही नहीं रहेगी, अनेक जगहों पर आरएलपी भी उनके चुनाव को प्रभावित करने मैदान में उतरेगी। आरएलपी ने पूर्व विधायक नारायण बेनीवाल के जरिये पहले से हीं चुनावों की तैयारी का खाका तैयार कर लिया था। इसी सप्ताह खुद नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी बीकानेर की यात्रा की और चुनावी तैयारियों पर अपनी टीम के लोगों से चर्चा की।

बेवल


हनुमान बेनीवाल ने विधानसभा चुनाव के समय भी उम्मीदवार उतारे थे। कोलायत, श्रीडूंगरगढ़ में उसका चुनाव परिणाम पर भी असर पड़ा था। लूणकरणसर में आरएलपी के विजय पाल बेनीवाल, श्रीडूंगरगढ़ में विवेक माचरा इस बार भी पंचायत चुनाव में आरएलपी की बिसात बिछा चुके हैं। आरएलपी इन चुनावों में दोनों राजनीतिक दलों का गणित बिगाड़ेगी। हनुमान बेनीवाल भी इस बार नागौर के बाद सर्वाधिक जोर बीकानेर के पंचायत राज चुनाव पर लगाएंगे।

भाजपा - कांग्रेस घिरी है अंतर्कलह से : 

भाजपा व कांग्रेस, दोनों के सामने अपनी ही पार्टी के नेताओं की टकराहट बड़ी परेशानी का कारण है। दोनों पार्टियां अंतर्कलह से घिरी हुई है और उसका असर चुनाव पर भी पड़ना निश्चित ही है। इन स्थितियों को भांपकर ही हनुमान बेनीवाल ने बीकानेर चुनाव में एंट्री की है।  यदि कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्त्व लगातार सक्रिय होकर यहां के नेताओं की टकराहट को कम नहीं कर सका तो 30 सालों की तरह चुनाव उनके लिए सुखद नहीं रहेंगे। क्योंकि इस बार उनके पास डूडी जैसा कद्दावर नेता भी नहीं है। वहीं भाजपा नेतृत्त्व यदि बीकानेर भाजपा की गुटबाजी को दूर नहीं कर पाया तो इस बार भी पंचायत राज जीतने का पार्टी का सपना अधूरा ही रह जायेगा।

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