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Bikaner Mayor  : क्या आज जनता के बहुमत v/s सरकार की ताकत में होगी मेयर की जंग?

42 का बहुमत बचाने मारी-मारी फिर रही कांग्रेस, 27 की भाजपा का दावा-"हमारा होगा मेयर"

 
Bikaner 

पंचायती : धीरेन्द्र आचार्य

Rudra News Express Bikaner. 

बीकानेर में मेयर का चुनाव आज यानी 21 सितंबर 2026 को होने जा रहा है। सुबह 10 बजे से वोटिंग होगी। शहर के 80 पार्षदों को वोट डालने के लिये दोपहर 02 बजे तक का समय दिया गया है। यानी इन 04 घंटों में मेयर का फैसला हो जाएगा। कांग्रेस के अनिल कल्ला और बीजेपी के सुरेन्द्र सिंह शेखावत मैदान में हैं। 

दोनों दलों के नए चेहरे : 

चेहरों के लिहाज से देखें तो दोनों ही अपने दलों के समर्पित और गंभीर कार्यकर्ता माने जाते हैं। दोनों मैदान में उतरने को लंबे समय से कसमसा रहे थे। विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनने से लेकर पार्टी अध्यक्ष बनने तक इनके नाम चर्चा में रहे हैं। ऐसे में चुनावी उपलब्धि कही जाएं तो दोनों दलों की ओर से ताजा हवा के झोंके की तरह नई लीडरशिप सामने आई है।

रसकसी

ये हैं चुनावी आंकड़े : 

सामान्य आंकड़ों के लिहाज से देखें तो 80 में से 42 पार्षद कांग्रेस के हैं। मतलब कि 41 के जरूरी आंकड़े का स्पष्ट बहुमत। इसके बाद बीजेपी है जिसके पास अपने सिंबल पर जीते 27 पार्षद है। यानी बहुमत से 14 पार्षद दूर। निर्दलीय 10 और RLP का एक यानी 11 इन दोनों दलों का हराकर जीते हैं। इन 10 निर्दलीय में 06 ऐसे हैं जो बीजेपी के प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी को पछाड़ कर आए हैं। इसके साथ ही 03 के निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेसी रहे, 01 पार्षद ऐसा है जिसका निकटतम प्रतिद्वंद्वी भी निर्दलीय रहा। मतलब कि ये बीजेपी या कांग्रेस दोनों से चुनाव पूर्व संतुष्ट नहीं थे। इसके साथ ही बड़ी बात यह कि इन पार्षदों के वार्ड की जनता भी दोनों दलों की बजाय इन पर भरोसा कर रही थी।

जीत

27 वाली भाजपा कर रही मेयर बनाने की तैयारी  : 

अगर सीधी चुनावी गणित देखें तो कांग्रेस का बोर्ड यानी मेयर बनना लगभग तय है लेकिन राजनीति कभी इतनी सीधी होती नहीं है। इस बार निकाय चुनाव में तो बिल्कुल भी सीधी नहीं  हैं। अब तक सामने आई स्थितियों के मुताबिक ज्यादातर निर्दलीय बीजेपी के खेमे में हैं। भाजपा प्रत्याशी की ओर से इनके फोटो भी शेयर किये गए हैं।

बीजेपी

इनकी संख्या पहले 09, फिर 08 बताई गई। एकाध कम-ज्यादा भी हो सकता है। इसके साथ ही बीजेपी पक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि उनके पास पूर्ण बहुमत है और वे मेयर बनाएंगे। मतलब यह कि कांग्रेस के खेमे में सेंध होने की बात खुलकर कही जा रही है। मेयर प्रत्याशी के रणनीतिकारों में शामिल एकाध समर्थकों ने तो 51+ का आंकड़ा भी लिख दिया। 

42 वाली कांग्रेस फिर रही मारी-मारी : 

दूसरी और कांग्रेस की बात करें तो उसके पास 42 पार्षदों का पूर्ण बहुमत है। मेयर बनना लगभग तय है। इसके बावजूद नेताओं से लेकर पार्षदों तक के माथे पर पसीना आ रहा ही। वे अपने 42 पार्षदों को लेकर जैसलमेर की बाड़ेबंदी में बैठे रहे जहां से निकलकर अब वोट देने बीकानेर आए हैं।

कॉंग्रेस

हालांकि जीत का दावा कर रहे हैं लेकिन हर पल उन्हें टूट-फूट का डर सता रहा है। एकबारगी बागी मैदान में आ गया जिसे राजी कर बिठाया। अब भी खेमे में कई पार्षदों पर शक की निगाहें घूम रही है लेकिन संतुष्ट है कि वे अब तक अपने लोगों को बचाने में कामयाब रहे हैं। इतना भी दावा है कि कैम्प में मौजूद लोगों से एकाध वोट ज्यादा ही मिलेगा। पूरी कांग्रेस कलेक्टर के पास फरियाद लेकर पहुंच चुकी है और शिकायत की है कि हमारे पार्षदों को डराया-धमकाया जा रहा है। 

डर

कांग्रेस के डर की ये है वजह : 

पार्षद का चुनाव जीत जाने और मेयर के लिये "प्रशिक्षण कैम्प" में पहुंच जाने के बाद कांग्रेस के पार्षद मनोज बिश्नोई को BDA का नोटिस मिलता है "होटल के कागजात पेश करने हाजिर हो नहीं तो इसे अंतिम नोटिस समझो, कार्रवाई होगी।" यह संयोग हो सकता है लेकिन इसके बाद कांग्रेस पार्षद और पूर्व मेयर मकसूद अहमद के घर नोटिस चस्पा होता है "एक पुराने मामले में पूछताछ करनी है, 20 सितंबर को थाने पहुंचो।" मतलब मेयर चुनाव से ठीक एक दिन पहले थाने पहुंचने का निर्देश। इसे भी कानूनी प्रक्रिया मान ले लेकिन वोटिंग से ठीक एक दिन पहले शाम को कांग्रेस पार्षद नवरतन डागा को भी इसी तरह का नोटिस। उन्हें कहा गया है "21 सितंबर को सुबह 10 बजे थाने पहुंचो।" यहाँ तारीख और समय गौर करने लायक है। 21 को सुबह 10 बजे मेयर के लिये वोटिंग होगी। ऐसे में मकसूद और डागा थाने जा नहीं सकते। दोनों वोट देने नगर निगम जरूर आएंगे। ऐसे में अगर वोट देने से पहले पुलिस इन्हें पकड़कर ले गई और 02 बजे तक "पूछताछ" के लिये रोक लिया तो कांग्रेस के लिये होने वाली वोटिंग सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है। इतना ही नहीं कांग्रेस को डर है कि कई पार्षदों को ऐसे ही तरीकों से रोक-टोककर मतदान प्रभावित करवाया जा सकता है। एक पार्षद की बिल्डिंग पर अधिकारी पहुंचे हैं वही कांग्रेस के पार्षद का समर्थन करने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता की फैक्ट्री पर छापा पड़ा है। 

कैम्प

पूरे राजस्थान से आ रही ऐसी तस्वीरें  :

पूरे राजस्थान के हालात की बात करें तो संगरिया के पार्षदों का कैम्प पंजाब में रखा गया। वहां राजस्थान पुलिस, पंजाब पुलिस के साथ पहुंच गई। विधायक अभिमन्यु पूनिया भिड़ गए। संगरिया में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ। थाने को घेरा गया। भोपालगढ़, भरतपुर, उदयपुर, कुचेरा, बहरोड, बानसूर, दूनी, देवली, उनियारा, मंडावा, नीमराणा, अलवर के मालाखेड़ा, लोसल, बड़ोद सहित बीसियों जगह से जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए उस पर कांग्रेस ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। कई जगह नतीजे भी दिख गए। ऐसे में राजस्थान में जिस तरह के चुनावी हालत बने हैं उन्हें देखते हुए बीकानेर में बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस का डरना लाजिमी है। खुद पूर्व मंत्री बी डी कल्ला कह चुके हैं कि जैसलमेर के कैम्प में CID घुस चुकी है। हमारे पार्षदों को धमकाया जा रहा है। उनके रिश्तेदारों पर दबाव बनाया जा रहा है।

विधायक-पूर्व विधायक पकड़े जा रहे, पार्षदों को रोका : 

हनुमानगढ़ के निर्दलीय विधायक को बीकानेर में गिरफ्तार कर लिया गया। पूर्व विधायक संदीप यादव को गुड़गांव में हिरासत में लेने की जानकारी आई है। वोट डालने आ रहे तिजारा के कांग्रेस पार्षदों को हरियाणा का पंचकूला में रोकने की बात पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बताई है। आरोप है कि राजस्थान के सीएम के कहने पर यह कार्रवाई हरियाणा के मुख्यमंत्री ने करवाई है। 

आत्मदाह तक की धमकी : 

हालात यहाँ तक हो गए हैं कि बीकानेर के कुछ अधिवक्ताओं की ओर से कहा गया है कि प्रजातान्त्रिक तरीके से वोटिंग नहीं होने दी तो वे आत्मदाह तक का निर्णय ले सकते हैं। उनकी इस चेतावनी के बाद हड़कंप मचा है। भाजपा प्रत्याशी के समर्थक अधिवक्ताओं ने हालांकि इस धमकी को गैरकानूनी भी बताया है। 

कौन बनेगा मेयर से बड़ा सवाल-कैसे बनेगा मेयर?

ऐसे में जब बीकानेर मे कांग्रेस पार्षदों को वोटिंग से पहले थाने पहुँचने का नोटिस दिया गया है तो हो सकता है कि देर रात बीकानेर पहुंचे इन पार्षदों के धरपकड़ की भी तैयारी की गई हो। यह भी हो सकता है कि इनमें से कुछ को वोट देने जाने से पहले रोककर "पूछताछ" की जाए जो हो सकता है कि दोपहर 02 बजे या इसके आस-पास तक चले। गिरफ्तारी भी संभव है। ऐसे में "कौन बनेगा मेयर?" से बड़ा सवाल "कैसे बनेगा मेयर?" हो गया है। क्या वह जनता के दिए बहुमत से बनेगा या सरकार व दूसरी तरह की ताकत से जुटाए वोटों से। इसका फैसला शाम होने से पहले हो जाएगा लेकिन इस चुनाव में राजस्थान ने जो देखा है वह प्रदेश के चुनावी अंदाज में ऐसा बदलाव लाने की शुरुआत है जिसे अच्छा तो नहीं कहा जा सकता। 

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