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Rajasthan : केंद्र सरकार ने राजस्थान के इस शहर के लिए खोला खजाना, 40 करोड़ रुपये देगी सरकार 

केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में राजस्थान के लिए राजस्व का पिटारा को खोला है
 

केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में राजस्थान के लिए राजस्व का पिटारा को खोला है। इसमें केंद्र सरकार की तरफ से प्रति व्यक्ति दो हजार रुपये विकास के लिए दिए जाएंगे। इस बजट के बाद शहर में आने वाली नई आबादी के बाद पड़ने वाले भार का असर नहीं दिखाई देगा। केंद्र सरकार की इस योजना से जयपुर शहर की सीमा विस्तार नगर निगम के लिए बोझ नहीं बनेगा।

16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया है। इसे प्रीमियम ग्रांट कहा गया है। रिपोर्ट में प्रति व्यक्ति दो हजार रुपए का प्रावधान किया है। इसका फायदा जयपुर के अलावा जोधपुर और कोटा नगर निगम को मिलेगा। राजधानी जयपुर की बात करें तो यहां 80 गांवों को नगर निगम के सीमा क्षेत्र में शामिल किया है।

इससे रिंग रोड तक निगम की सीमा पहुंच गई है। इस पैसे से शहरी सरकार हाल ही शामिल किए गए गांव-ढाणियों वे विकास कार्य करा सकेगी। इन गांवों में करीब दो लाख की आबादी है। ऐसे में नगर निगम को करीब 40 करोड़ रुपए की राशि विकास कार्य के लिए सीधे केंद्र से मिलेगी।

नगरीय विकास कर में पांच फीसदी बढ़ोतरी का प्रावधान

नगर निगमों को वित्त आयोग की सहायता लेने के लिए पिछले वर्ष तक नगरीय विकास कर में पांच फीसदी बढ़ोतरी का प्रावधान था। इस बार इसमें सहूलियत दी है। नए प्रावधानों के तहत अब कुछ राजस्व में पांच फीसद बढ़ोत्तरी की बात कही गई है। अब केंद्र से आने वाला पैसा लैप्स नहीं होगा। दूसरे निकायों में खर्च करने का प्रावधान किया है।

अभी ये हाल

जिन गांवों को नगर निगम सीमा क्षेत्र में शामिल गया है, वहां पर अभी सुविधाओं का टोटा है। ग्राम पंचायतों ने काम करना बंद कर दिया औनर निगम की सुविधाएं अब तक पहुंचना शुरू नहीं हुई हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पहली बार हुआ है निगम का सीमा विस्तार

स्थापना के करीब तीन दशक बाद राजधानी के नगर निगम का पहली बार सीमा विस्तार किय गया है। नए बोर्ड के लिए 150 पार्षद चुने जाएंगे। इससे पहले राजधानी में दो नगर निगम और 250 वार्ड थे।

सबसे ज्यादा राजस्व गांव सांगानेर उपखंड में शामिल किए गए हैं। यहां करीब 70 हजार की आबादी नगर निगम सीमा क्षेत्र में आ गई है। वहीं सबसे कम आबादी आमेर उपखंड की शामिल की गई है, जहां गांवों की करीब 15 हजार की आबादी शामिल है।

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