Drinking Water Project : राजस्थान के 79 गांवों की पेयजल योजना नहीं चढ़ी सिरे, प्रोजेक्ट नहीं हुआ मंजूर
राजस्थान के पाली जिले के 79 गांवों को योजना सिरे नहीं चढ़ने पर बड़ा झटका लगा है। जिले के 79 गांवों के लिए पेयजल का स्थाई समाधान तैयार करने का काम डेढ़ साल से सिर्फ फाइलों में घूम रहा है। 29 जुलाई 2024 को सरकार ने नारवा पीएस-8 (पंपिंग स्टेशन) से कुड़ी तक 39.7 किमी लंबी 450 मिमी डीआई पाइपलाइन के लिए 75.52 करोड़ की घोषणा की थी। यह लाइन बनती तो कुड़ी-रोहट पाइपलाइन, जो 2022-23 में बन चुकी है, वह पूरी क्षमता से चल पाती और 79 गांवों को रोजाना पानी मिल सकता था। लेकिन, डेढ़ साल बाद भी प्रोजेक्ट मंजूर नहीं हुआ।
वित्त विभाग ने फाइल यह कहकर लौटा दी कि योजना में पंप हाउस और सीडब्ल्यूआर जैसे काम जोड़ दिए गए। जबकि घोषणा सिर्फ पाइपलाइन की थी। विभागीय आपत्तियों और संशोधनों के चक्कर में पूरा प्रोजेक्ट जीरो प्रोग्रेस पर पहुंच गया। दूसरी तरफ डीएमआईसी की पाइपलाइन से रोहट को पानी देने का विकल्प पहले चरण में ही बंद कर दिया गया था। अब सरकार नए सिरे से उसी प्लान का अध्ययन करा रही है।
यानी दो योजनाएं
जिसमें एक घोषित, दूसरी-समीक्षा में है। लेकिन, दोनों का नतीजा एक है-79 गांव प्यासे ही रहेंगे। 2022 के संकट के बाद कुड़ी-रोहट 30 किमी लाइन बन गई, लेकिन सप्लाई तभी संभव है जब पीएस-8 (पंपिंग स्टेशन) से कुड़ी तक की लाइन तैयार हो। तीन चरणों के इस पूरे सिस्टम का एक भी हिस्सा अभी तक जमीन पर नहीं उतरा।
दो प्रोजेक्ट, एक ही उद्देश्य तो दोहरी प्लानिंग क्यों ?
रोहट-पाली के 79 गांवों को पानी देने के लिए एक ही समय में दो-दो योजनाएं क्यों बनाई गई। वर्ष 2022 में कुड़ी से रोहट तक 30 किमी पाइपलाइन 37.42 करोड़ से बना दी गई। उसी अवधि में नारवा पीएस-8 से कुड़ी तक नई 39.7 किमी लाइन का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया। इसी के समानांतर डीएमआईसी पाइपलाइन से पानी लेने का प्लान तैयार हुआ और उसी साल खत्म भी कर दिया गया। तीन विकल्प, लेकिन एक भी पूरा नहीं हुआ।
वित्त विभाग ने प्रोजेक्ट की फाइल क्यों लौटा दी ?
घोषणा पाइपलाइन की थी, लेकिन प्रस्ताव में पंप हाउस और सीडब्ल्यूआर जोड़ दिए। हालांकि यह कार्य बिना प्रोजेक्ट के पूरा नहीं हो सकता। सवाल यह है कि क्या फाइल अधूरी और गलत तैयार की गई? या फिर क्या तकनीकी आपत्तियों के नाम पर प्रोजेक्ट को रोका गया? इस देरी ने प्रोजेक्ट को एक साल पीछे धकेल दिया।
डीएमआईसी पाइपलाइन पर हां- ना कैसे ?
सरकार अब कह रही है कि डीएमआईसी की लाइन से रोहट को पानी देना कम लागत का समाधान हो सकता है, जिससे 15 साल तक नए निर्माण की जरूरत नहीं पड़ेगी। यही प्रस्ताव पहले चरण में रिजेक्ट कर दिया गया था। अब सवाल यह बनता है कि क्या पहले स्टडी गलत थी? या फिर उस समय किसी स्तर पर प्रोजेक्ट को रोकने का दबाव बनाया गया था?
प्रोजेक्ट कब तक पूरा होने की संभावना ?
वित्त विभाग से मंजूरी अभी मिलती है और काम शुरू होता है तो भी पहले चरण में पाइपलाइन बिछाने में 12-18 महीने लगेंगे। दूसरा चरण के लिए 2 से 3 साल चाहिए। यदि विभाग पूरी ताकत लगाकर भी काम करे तो भी 2026-2027 के पहले पूरा होना संभव नहीं है।
15 साल तक का खर्च बचाने के लिए स्टडी करवा रहे
आरजीएलसी-पी के एडिशनल चीफ इंजीनियर नक्षत्रसिंह ने कहा कि 75.52 करोड़ के प्रोजेक्ट के साथ अन्य कार्य करवाने को लेकर वित्त विभाग की आपत्तियां थीं। इन कामों को भी स्कीम का हिस्सा ही बना रहे हैं, ताकि समाधान हो सके। सरकार के स्तर पर भी अब नए सिरे से डीएमआईसी की पाइपलाइन से रोहट को पानी देने की स्कीम पर अध्ययन कराया जा रहा है। जिसे सरकार के 15 सालों तक खर्च बच सकेगा।

