RudraNewsExpress_Logo

चुनावी खुरचन : पाटे पर खुल रहे चुनावी राज, कारसेवक और चौफुलिए हुए बेलगाम!

 

 

 

 

चुनाव की खबरें अपनी जगह होती है मगर चुनाव की चर्चाएं उससे कहीं अधिक मारक होती है। ये चर्चाएं शहर के पाटों से निकलकर गलियों, मोहल्लों, गवाड़, कॉलोनियों और फिर चुनाव कार्यालयों  तक पहुंचती है। एक अखबार, पोर्टल, चैनल की खबर को जितने पाठक, दर्शक नहीं मिलते, उससे 100 गुना पाठक, दर्शक इन चर्चाओं को मिलते हैं।

 

पाटेबाज

बता रहे त्याग की मूर्ति, सच कुछ और

इस बार एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ। शहर के एक वार्ड से चुनाव लड़ने पूर्व न्यास अध्यक्ष जी चुनाव लड़ने आ गए, वो भी इस उम्मीद में कि अपने धन बल पर यह चुनाव जीतकर मेयर बन जायेंगे। पहले तो उनको वार्ड पार्षद के लिए टिकट में जोर आया। बीकानेर शहर व पूर्व क्षेत्र के विधायक उनके खिलाफ थे। इन लोगों ने कई आरोप भी पूर्व न्यास अध्यक्ष जी पर जड़े। टिकट तो वे तिकड़म से ले आये।
अब उनकी बदजुबानी, पैसे से सबको मापने की आदत और बड़बोलापन आड़े आ गया। कईयों ने बट निकाले। कुछ नेता, इक्का दुक्का पत्रकार लगे और डायरेक्ट दिल्ली से दखल करा टिकट कटवा दिया। बहुत किरकिरी हुई, क्योंकि नामांकन दाखिल भी कर चुके थे।
अब जब टिकट कट गया तो सोचा राजनीतिक शहीद का तो दर्जा पाऊं। चमचों ने प्लान दे दिया। पहले खुद लाइव आये, शहादत पर गर्व जताया। फिर कुछ चेले चपाटों के जरिये सोशल मीडिया व समाचारों में खुद को अनुशासन प्रिय साबित करने का अभियान चलाया। 
अब पाटे, यह कैसे मानें। क्योंकि सच तो दूसरा था। पाटे जानते हैं, पूर्व न्यास अध्यक्ष जी ने अपने खास चेले व हर वक्त आगे पीछे रहने वाले से भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ याचिका दायर करा नामांकन को चुनोती दी। पर्चा खारिज करने की मांग की। उसे स्वीकार नहीं किया गया, तब जाकर प्लान बी ' शहीद नामा ' चालू हुआ। अब तो पाटों पर उसकी भी किरकिरी हो रही है।

कार सेवक हो गए हैं सक्रिय

अब राजनीतिक कार सेवकों को अपने जौहर दिखाने का समय आ गया है। ये वो कार सेवक हैं जो अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार को हराने के लिए कार सेवा करेंगे। क्योंकि या तो उनको टिकट नहीं मिला, या उनकी पसंद के व्यक्ति को टिकट नहीं मिला या फिर उनके विरोधी को टिकट मिल गया। 
हर चुनाव में कार सेवा का अपना खास महत्त्व होता है। कार सेवा बिना चुनाव अधूरा है। वार्ड 2, 8, 13, 50,59, 60, 61, 62 सहित कुल 22 वार्ड है शहर के अंदर के हिस्से के जिनमे कार सेवा शुरू हुई है। पाटों को अचरज तो इस बात का है कि जिन्होंने टिकट में साथ दिया, वे ही कार सेवा कर रहे हैं। जिनके जिम्मे चुनाव जीताना है, वे भी करीने से कार सेवा कर रहे हैं। जो बड़े नेता हैं, वे भी यही काम कर रहे हैं। काश , इतनी कार सेवा भले काम के लिए करते तो लोग दुआएं देते।

चौफुली का नारा है.....

बेगानी शादी में जिस तरह की भूमिका अब्दुल्ला दीवाना की होती है, वैसी ही भूमिका चुनाव में भी कुछ लोगों की होती है। वे दिन में एक प्रत्याशी के साथ रहकर उसका प्रचार करते दिखते हैं तो रात को उसके विरोधी प्रत्याशी के साथ चुनावी रणनीति बना रहे होते हैं। जिनको ही तो चौफुलीवाला कहा जाता है। जिनका नारा है -- चौफुली का नारा है, जीते सो हमारा है।

FROM AROUND THE WEB