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Great Indian Bustard: जैसलमेर से 700 किमी दूर, 19 घंटे का सफर कर अंडा पहुंचा और कच्छ में गूंजी गोडावण की किलकारी

 

RNE Jaisalmer.

एक छोटा-सा वीडियो और कुछ फोटोग्राफ सामने आए हैं जिनमें देख सकते हैं कि एक मादा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण अपने छोटे से चूजे के साथ बड़ी शान से घूम रही हैं और उसे दुनियादारी सिखा रही है। यह चूजा अभी तीन दिन पहले ही अंडे से बाहर आया है। यह गुजरात के कच्छ इलाके की तस्वीर है लेकिन खुशी की इस तस्वीर के पीछे की कहानी जानकर आपको हैरानी के साथ ही रोमांच भी होगा। इसके साथ ही वैज्ञानिकों, वन अधिकारियों को एक बड़ी कार्ययोजना में मिली सफलता की कहानी भी इस तस्वीर से जुड़ी है।

पहले बात करते हैं हैरानी की !
 

हैरानी यह जानकर हो सकती है कि जिस चूजे के साथ यह मादा गोडावण घूम रही है इसको इसी मादा ने इन्क्यूबेट किया है, इसी के घोंसले में जन्म हुआ है लेकिन यह अंडा इसका नहीं है। दरअसल कच्छ के इस इलाके में चार मादा गोडावण पक्षी लगातार देखे जा रहे थे लेकिन कोई नर गोडावण नहीं था। ऐसे में यह फर्टिलाइज एग प्रोडयूस नहीं कर सकती। एक मादा ने हाल ही अंडा दिया लेकिन वह फर्टिलाइज नहीं था। उसमें से बच्चा पैदा होने की कोई संभावना नहीं थी। 

700 किमी दूर जैसलमेर से 11 घंटे का सफर कर आया अंडा:
 

जाहिर है कि सवाल उठता है यहअंडा आया कहां से! इसका जवाब यह है कि यह अंडा कच्छ से 700 किमी दूर राजस्थान के जैसलमेर-रामदेवरा से आया। इसे बाकायदा एक योजना के तहत 19 घंटे लंबी सड़क यात्रा करवा घोसले तक पहुंचाया गया और यहाँ पहले से मौजूद निष्फल अंडे से बदल दिया गया। मादा गोडावण ने अंडे को स्वीकार कर इसे सेकना यानी इन्क्यूबेट करना शुरू कर दिया। नतीजा चार दिनों मंे ही इसमें से गोडावण का बच्चा निकल आया। इसके साथ ही कच्छ में 10 साल बाद फिर गोडावण की किलकारी गूंज गई। 

जंप स्टार्ट अप्रोच से मिली खुशी : 
 

भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव इस खुश खबर के काफी उत्साहित हैं। खुशी की तस्वीर के साथ ही उन्होंने इसके पीछे की पूरी कहानी भी शेयर की हैं। यादव का कहना है कि इस सफलता के पीछे एक अनोखा और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन रहा। वे बताते हैं,  गुजरात के कच्छ क्षेत्र में वर्ष 2025 में टैग की गई एक मादा गोडावण ने अंडा दिया था, लेकिन नर की अनुपस्थिति के कारण वह अंडा निष्फल था। ऐसे में विशेषज्ञों ने “जंपस्टार्ट अप्रोच” के तहत एक अभिनव योजना बनाई।  

राजस्थान के जैसलमेर स्थित सम गोडावण ब्रीडिंग सेंटर से एक निषेचित अंडे को विशेष पोर्टेबल इनक्यूबेटर में सुरक्षित रखते हुए लगभग 19 घंटे की लंबी यात्रा के जरिए कच्छ पहुंचाया गया। 22 मार्च को इस अंडे को मादा गोडावण के घोंसले में प्रतिस्थापित किया गया। मादा ने इस अंडे को स्वीकार करते हुए प्राकृतिक रूप से सेका और 26 मार्च को चूजे का सफलतापूर्वक जन्म हुआ।  फील्ड मॉनिटरिंग टीम के अनुसार, चूजा पूरी तरह स्वस्थ है और मादा गोडावण उसकी देखभाल कर रही है। 

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फॉस्टर मदर मॉडल : 

यह “फॉस्टर मदर” मॉडल की एक सफल मिसाल है, जो संरक्षण विज्ञान में नई संभावनाओं को दर्शाता है।  इस उपलब्धि में जैसलमेर के सम और रामदेवरा स्थित गोडावण कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। यहां विकसित अत्याधुनिक ब्रीडिंग तकनीक, सुरक्षित इनक्यूबेशन सिस्टम और विशेषज्ञों के वर्षों के अनुभव ने इस अंतरराज्यीय पहल को सफल बनाया। ऐसे में यह उपलब्धि केंद्र सरकार, राजस्थान और गुजरात के वन विभाग तथा वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।


जैसलमेर डेजर्ट नेशनल पार्क के डीएफओ बृज मोहन गुप्ता ने बताया कि कच्छ के नलिया क्षेत्र में वर्तमान में चार मादा गोडावण देखी जाती हैं। इनमें से एक मादा द्वारा दिए गए निष्फल अंडे को सम ब्रीडिंग सेंटर के निषेचित अंडे से बदला गया, जिसे मादा ने सहज रूप से स्वीकार किया और प्राकृतिक रूप से चूजे का जन्म हुआ।  उन्होंने बताया कि इनफर्टाइल अंडा वह होता है, जिसमें भ्रूण का विकास संभव नहीं होता। “जंपस्टार्ट” प्रक्रिया के तहत ऐसे अंडे को निषेचित अंडे से बदलकर सफल हैचिंग करवाई गई। फिलहाल चूजा अपनी ‘फॉस्टर मदर’ के साथ सुरक्षित है और उसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।  यह उपलब्धि न केवल गोडावण संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि वैज्ञानिक तकनीक, समर्पण और अंतरराज्यीय समन्वय से विलुप्ति के कगार पर खड़ी प्रजातियों को भी बचाया जा सकता है।

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