Isabgol Cultivation : राजस्थान का ईसबगोल हो रह अमरीका, चीन में निर्यात, गुजरात कूट रहा चांदी
बाड़मेर प्रदेश में सर्वाधिक ईसबगोल करीब 1.25 लाख हैक्टेयर में 10 लाख क्विंटल के करीब पैदा बाड़मेर का किसान करता है, लेकिन यह बिकने को गुजरात की ऊंजा मण्डी पहुंचता है। प्रोसेसिंग इकाई से लेकर निर्यात के फायदे गुजरात को मिल रहे हैं। राज्य सरकार यहां प्रोसेसिंग इकाई लगाए तो बाड़मेर सीधा अमरीका, गल्फ देश, सीरिया और चीन तक की निर्यात करने की
अपनी क्षमता विकसित कर सकता है।
ईसचगोल की पैदावार 2012 से शुरू हुआ और अब 1.25 लाख
हैक्टेयर जमीन में ईसब की बुवाई हो रही है। एक हैक्टेयर में 4 से 4.25 क्विंटल के औसत से 10 लाख क्विंटल उपज आने लगी है।
प्रसंस्करण नहीं होने से नुकसान
बाड़मेर में ईसबगोल की प्रोसेसिंग इकाई नहीं है। प्रोसेसिंग हों तो बीज की क्लिनिंग, ग्राइडिंग, भूसी निकालना और भूसी की पैकिंग यहीं पर हो सकती है। इससे रोजगार के अवसर भी खुलेंगे।
उपयोगी है ईसबगोल
मूत्र रोग, आंत की सूजन, पुरानी कब्ज, पेचिस, बवासीर, गुर्दा, अस्थमा, वेटलॉस, केलेस्ट्रोल कम करने, मधुमेह सहित कई रोगों की दवा के लिए आयुर्वेद और अन्य दवाओं में उपयोग में लिया जाता है।
संभावनाएं बहुत
कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप पगारिया ने बताया कि ईसबगोल प्रदेश में सर्वाधिक बाड़मेर में ही पैदा होता है। यह आर्थिक फसल है, जिसके दाग 13500 प्रति क्विंटल है। दस लाख बोरी ईसबगोल बाड़मेर से गुजरात जाता है। यह बहुत बड़ी मात्रा है। यहां प्रसंस्करण हों तो औषधीय फसल के हथ के रूप में भी बाड़मेर विकसित हो सकता है।
प्रसंस्करण लगने पर क्या होगा
ऊंझा गाण्डी में व्यापारियों की सिंडीकेट टूटेगी, किसान को उचित दाम मिलेगा
गुजरात तक परिवहन में चोरी, लूट, आर्थिक नुकसान का संकट है, जो नहीं रहेगा
आयुर्वेद दवा का बाड़मेर बड़ा हब बन सकता है। ईसबगोल की दवाइयों के साथ इससे जुड़े अन्य कई उत्पादों की दवा यहां बनेगी।
प्रसंस्करण लोकल होने पर किसान भी अभी 1.25 लाख हैक्टेयर में ईसब की बुवाई कर रहे है तो इसको और ज्यादा करेंगे
अगरीका, सीरिया, चीन, गल्फ देशों सहित अन्यत्र निर्यात हो रहा है, इसके सीधे संपर्क बाड़मेर से बन सकते है
जोधपुर में इकाइयां
जोधपुर में ईसबगोल की इकाइयां है और उधर गुजरात के अंझा में। बाड़मेर का जुडाव गुजरात की अंदा गण्डी से अधिक है। बाड़मेर की मण्डी में किसान को भाव बोड़े कग मिलते हैं और अंझा में कुछ ज्यादा। किसान को परिवहन फ्री बोरी करीब 100 रुपए खर्च आता है। अधिकांश किसान बाड़मेर की मण्डी में ईसबगोल बेचते हैं। वे परिवहन, पोरी-लूट और समय बचाने के लिए बाङमेर ही बेच रहे है।

