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जनरंजन : मंत्रिमंडल विस्तार व पुनर्गठन के लिए भी पूरी तैयारी, जिला, संभाग व राज्य स्तर पर नियुक्तियां करेगी सरकार, उदासीन कार्यकर्ताओं में जोश भरने की होगी कवायद

 

 

 

भजनलाल शर्मा के नेतृत्त्व वाली भाजपा की राज्य सरकार के 3 साल पूरे होने वाले हैं, मगर अभी तक भी जिले से लेकर प्रदेश तक की राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हो सकी है। न ही मंत्रिमंडल के रिक्त 6 पद अभी तक भरे जा सके हैं। अनेक बार इन दोनों कामों के लिए कवायद शुरू हुई मगर हर बार निर्णय लागू होता, उससे पहले किसी न किसी कारण से बात टल जाती। केंद्रीय नेतृत्त्व से हरी झंडी भी नहीं मिलती थी। अब पंचायत चुनाव के बाद ये दोनों काम पूरे होंगे।

 

मधु आचार्य ' आशावादी '

भजनलाल शर्मा के नेतृत्त्व वाली राज्य की भाजपा सरकार को तीन साल पूरे होने को है, मगर अभी तक भी सरकार केवल 24 मंत्रियों के सहारे चल रही है, जिनमें मुख्यमंत्री शामिल है। जबकि राज्य में 200 विधानसभा सीटें है और 15 प्रतिशत मंत्री बन सकते हैं, मतलब राज्य मंत्रिमंडल में 30 मंत्री रह सकते हैं। 

 

मगर आधे से अधिक कार्यकाल पूरा होने के बाद भी 24 ही मंत्री  सरकार को चला रहे हैं। एक मंत्री के पास एक से अधिक विभाग है। जैसे सीएम, उप मुख्यमंत्रियों दिया कुमारी व प्रेमचंद बैरवा के पास कई कई विभाग है। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर आदि के पास भी ज्यादा विभाग है। राज्य सरकार इसके अलावा कुछ विधायकों को संसदीय सचिव बनाकर भी मंत्री का दर्जा दे सकती है। 
 

ऐसा भी नहीं है कि मंत्रिमंडल के विस्तार या पुनर्गठन के प्रयास नहीं हुए। अनेक बार सीएम , भाजपा प्रदेश प्रभारी व प्रदेशाध्यक्ष ने केंद्रीय नेतृत्त्व के कहने पर विस्तार व पुनर्गठन की कसरत भी पूरी की, मगर केंद्रीय नेतृत्त्व को बदलते राजनीतिक हालात के कारण विचार का समय नहीं मिला और विस्तार व पुनर्गठन टल गया। कभी दिल्ली चुनाव, कभी बिहार चुनाव, कभी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव, पुलवामा की घटना, बंगाल के चुनाव आदि के कारण विस्तार व पुनर्गठन टलता ही गया। अब पहले राज्य में स्थानीय निकाय के चुनाव आ गए और अभी पंचायत राज के चुनाव चल रहे हैं। मगर अब उम्मीद बंधी हुई है कि पंचायत राज चुनाव के बाद मंत्रिमंडल विस्तार व पुनर्गठन का काम हो जायेगा।

सीएम पूरी तरह से तैयार है विस्तार के लिए

राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंत्रिमंडल विस्तार व पुनर्गठन के लिए अपनी तरफ से पूरी तैयारी की हुई है। सभी मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड उन्होंने बनवाया था और संगठन से उस पर चर्चा की थी। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री से भी उनकी चर्चा हो गयी। उसी रिपोर्ट कार्ड के आधार पर मंत्रियो के विभाग बदले जाने हैं और जरूरत पड़ी तो कुछ को हटाया जाना है। जिसका निर्णय केंद्रीय नेतृत्त्व ही करेगा।

 

इसी तरह 6 नए मंत्री बनाये जाने हैं। चूंकि अब पार्टी चुनावी मोड पर आ चुकी है तो अगले विधानसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए ही मंत्री बनाये जाएंगे। सभी गुटों को संतुष्ट किया जायेगा। यह सब पंचायत राज चुनाव होने के बाद होने के आसार हैं। इस बार ज्यादा समय नहीं लगना है, क्योंकि सीएम ने पूरी तैयारी की हुई है। बस केंद्रीय नेतृत्त्व से चर्चा के बाद अंतिम निर्णय किया जाना है। ऐसा समझा जा रहा है कि पंचायत चुनाव के तुरन्त बाद मंत्रिमंडल विस्तार व पुनर्गठन का काम होगा।

फिर होगी राजनीतिक नियुक्तियां

पंचायत राज चुनाव पूर्ण होने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार व पुनर्गठन का काम होगा। उसके बाद बहुप्रतीक्षित राजनीतिक नियुक्तियां भी होनी है। जिला, संभाग व राज्य स्तर पर नियुक्तियां नहीं होने से कार्यकर्ता उदासीन है और अब थककर बैठ गया है। उस कार्यकर्ता को अगले चुनाव तक सक्रिय रखने के लिए राजनीतिक नियुक्तियों की खुराक देना उसे बहुत जरूरी है। तभी तो वह राज में अपनी भागीदारी महसूस करेगा। 

 

राजनीतिक नियुक्तियों के लिए भी सीएम की कसरत की हुई है। राज्य स्तर की बड़ी नियुक्तियों पर उनको लाना है जो या तो विधानसभा चुनाव हार गए थे, या जिनको टिकट नहीं मिला था, या वे वरिष्ठ है और अब चुनाव नहीं लड़ते, या फिर जिनको आगे के लिए तैयार करना है, ऐसे नेताओं को राज्य स्तर की नियुक्तियां दी जानी है। इस श्रेणी में कई नेताओं के नाम है। 
 

जिला व संभाग स्तर पर नियुक्तियां संगठन व वहां के जन प्रतिनिधियों की सलाह से की जानी है। इस तरह की नियुक्तियों की हर जिले में बड़ी संख्या है। इनके लिए भी अब पंचायत राज चुनाव के बाद ही कसरत होनी है।

पंचायत चुनाव के बाद बदलेगा राजनीतिक परिदृश्य

पंचायत राज चुनाव पूरे होने के बाद राज्य में भाजपा का पूरा राजनीतिक परिदृश्य बदलने की संभावना है। व्यापक स्तर पर राजनीतिक नियुक्तियां होनी है और सभी गुटों के लोगों को संतुष्ट किया जाना है। पार्टी का सक्रिय कार्यकर्ता जिसे स्थानीय निकाय, पंचायत राज व संगठन में स्थान नहीं मिला, उसे राजनीतिक नियुक्ति देकर संतुष्ट व सक्रिय किया जायेगा। 

 

राज्य में वसुंधरा राजे का मजबूत जनाधार है और कई सांसद, विधायक व नेता उनके समर्थक हैं। उनकी अब भी राज में सीधी भागीदारी नहीं है। उनको भी मुख्य धारा में लाया जायेगा ताकि विधानसभा चुनाव से पहले भीतरी गुटबाजी को पूरी तरह से खत्म किया जा सके। राज में हिस्सेदारी पाने की आस रखने वाले विधायकों, नेताओं व कार्यकर्ताओं की आस अब पंचायत राज चुनावों के बाद पूरी होती दिख रही है। जिसके लिए कवायद भी शुरू हो चुकी है।

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