जनरंजन : कांग्रेस नेता BD कल्ला के क्षेत्र बीकानेर पश्चिम में पार्टी ने 23 सीटें जीती, कुल सीटें 39, भाजपा विधायक जेठानंद व्यास को करनी होगी समीक्षा, पंचायत राज चुनाव पर पड़ेगा असर
कल नगर निगम चुनाव के परिणाम घोषित हो गए। 80 सदस्यीय निगम में कांग्रेस को 42 सीट मिली और उसका निगम में वर्चस्व दो टर्म के बाद फिर बना है। भाजपा ने राज्य के अन्य निगमों में शानदार प्रदर्शन किया मगर बीकानेर में कांग्रेस ने उसे हार का स्वाद चखा दिया। बात केवल निगम के चुनाव परिणामों की नहीं है, इसके जरिये अगले विधानसभा चुनाव की झलक भी देखनी चाहिए। भाजपा को इन परिणामों की सूक्ष्म समीक्षा करनी चाहिए।
मधु आचार्य ' आशावादी '
कल नगर निगम के चुनाव परिणाम घोषित हो गए। 10 साल से बीकानेर नगर निगम में भाजपा का कब्जा था, मगर इस बार बाजी पलट गई। कांग्रेस ने भाजपा को पराजित कर अपना बोर्ड बनाने के लिए बहुमत हासिल कर लिया। बहुमत के लिए कांग्रेस को 41 सीट की आवश्यकता थी, उसे 42 सीट मिल गयी। वहीं कुछ निर्दलीय भी कांग्रेस का समर्थन करने के लिए तैयार है और हां भर चुके हैं।
80 सीट वाले निगम में भाजपा को केवल 27 सीटें मिली है, वो भी तब जब एक 1 वार्ड वो निर्विरोध पहले ही जीत चुके थे। जबकि भाजपा ने अपना बहुमत तय मानकर मेयर के लिए कई चेहरों को भी वार्ड पार्षद के चुनाव में उतार दिया था।
निगम चुनाव में कांग्रेस को 42, भाजपा 27 व निर्दलीयों को 11 सीटें मिली, जिनमें आरएलपी की एक सीट शामिल है। इस चुनाव परिणाम को देखने से साफ नजर आता है कि बीकानेर पूर्व व पश्चिम विधानसभा सीटों में भाजपा की करारी हार हुई है। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यह सीटें बहुत बड़े अंतर से जीती थी। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को इन दोनों विधानसभा सीटों पर प्रचंड बहुमत मिला था। इन परिणामों के बाद जो स्थिति बनी है, उससे भाजपा को चिंतित होना चाहिए।
बीकानेर पश्चिम विधानसभा सीट की स्थिति
निगम की 80 सीटों में बीकानेर पश्चिम की 39 सीटें हैं। इनमें से कांग्रेस ने 23 सीटें जीती है, जो काफी अधिक है। क्योंकि कांग्रेस पिछला विधानसभा चुनाव इस सीट पर 20 हजार से भी अधिक मतों से हारी थी। भाजपा के जेठानंद व्यास ने बड़े अंतर से बीकानेर पश्चिम सीट जीती थी। मगर ढाई साल बाद बदली इस स्थिति ने राजनीतिक पंडितों को चकित कर दिया है।
39 कुल सीटों में से कांग्रेस ने 23 सीटें जीती, बाकी बची 16 सीटें भी भाजपा ने नहीं जीती है। इनमें निर्दलीय व आरएलपी के जीते उम्मीदवार भी शामिल हैं। भाजपा की सीटें तो बहुत कम है। इस क्षेत्र से भाजपा के कई दिग्गज अपना वार्ड हारे हैं। कुल मिलाकर यदि निगम चुनाव की तुलना विधानसभा चुनाव के समय से की जाए तो भाजपा पिछड़ी है।
वोटों का यह आंकड़ा भी रोचक
बीकानेर पश्चिम सीट पर मिले वोटों का आंकड़ा भी काफी रोचक है। विधानसभा चुनाव डॉ बी डी कल्ला ने भाजपा के जेठानंद व्यास से 20 हजार से अधिक मतों से हारा था। मगर निगम चुनाव में बाजी आंकड़ों के हिसाब से बदली हुई नजर आती है। निगम चुनाव में कांग्रेस ने 39 वार्डों में भाजपा से 22 हजार से अधिक वोट हासिल किए हैं। यह भाजपा के लिए मंथन का विषय होना चाहिए।
कल्ला को मेहनत, व्यास को समीक्षा करनी होगी
निगम चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता डॉ बी डी कल्ला को जहां मेहनत की अधिक दरकार है, वहीं भाजपा के विधायक जेठानंद व्यास के लिए समीक्षा की जरूरत है। डॉ कल्ला इन परिणामों से उत्साहित हैं, जो स्वाभाविक भी है। क्योंकि कांग्रेस की कमान स्थानीय निकाय चुनाव में उनके हाथ में भी और टिकट भी इस विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने ही बांटे। बेहतर परिणाम भी मिले।
मगर उस सफलता की कुछ अलग वजहें भी है। भाजपा में टिकट वितरण का असंतोष, टिकट वितरण की विसंगति से वैश्य समाज मे उपजा रोष व नेताओं में कम तालमेल भाजपा की कुछ कमियां रही, यह बड़ा तथ्य है। कांग्रेस व डॉ कल्ला को यह भूलना नहीं चाहिए।
हां, भाजपा विधायक जेठानंद व्यास के लिए निगम के चुनाव परिणाम सामान्य नहीं। उनको इन परिणामों की समीक्षा करनी चाहिए और उन कमियों को चिन्हित करना चाहिए जिनसे वे पिछड़े। कमियों को दूर करने के बाद ही वे अपने किले की सुरक्षा कर सकेंगे। गम्भीर मंथन व तथ्यों की समीक्षा से ही किले की रक्षा सम्भव है।
पंचायत राज चुनावों पर पड़ेगा असर
निगम चुनाव परिणामों का असर बीकानेर के पंचायत राज चुनावों पर भी पड़ेगा, क्योंकि मतदाता का परसेप्शन इसी तरह के परिणामों से ही बनता है। पंचायत राज चुनावों में वैसे भी अब तक बीकानेर में कांग्रेस का ही वर्चस्व रहा है। 30 साल तक तो पंचायत राज चुनावों में किसान केसरी व दिग्गज कांग्रेस नेता रामेश्वर डूडी का ही वर्चस्व रहा है। अब उनका देहावसान हो चुका। कांग्रेस तीन दशक बाद उनके बिना पंचायत राज चुनाव लड़ेगी। इस हालत में नगर निगम चुनाव परिणामों का असर पंचायत राज चुनाव पर पड़ेगा और कांग्रेस को फायदा भी होगा।

