जनरंजन : RLP सुप्रीमो की नगर निगम के चुनावों के जरिये बीकानेर में एंट्री,भाई नारायण बेनीवाल के हाथों में सौंपी कमान, बीकानेर पंचायत चुनाव टारगेट पर, बदलेंगे समीकरण
मधु आचार्य 'आशावादी '
बीकानेर नगर निगम के चुनाव अब तक लगातार भाजपा व कांग्रेस के बीच ही हमेशा सीधा मुकाबला होता रहा है। कुछ सीटों पर अवश्य बसपा, सीपीआई और सीपीएम लड़ते रहे हैं। मगर पहले सभापति व फिर मेयर के चुनाव की लड़ाई तो हमेशा भाजपा व कांग्रेस के मध्य ही होती रही है। एक बार मेयर का चुनाव सीधे मतदान से हुआ था, जिसमें बीकानेर पूर्व और बीकानेर पश्चिम के मतदाताओं ने डायरेक्ट मेयर के लिए वोट डाले। वह चुनाव कांग्रेस के लिए स्व भवानी शंकर शर्मा ने जीता। जबकि दोनों विधानसभा सीटों व लोकसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी जीते हुए थे।
उसके बाद मेयर के लिए सीधे वोट कभी पड़े ही नहीं, पार्षद ही मेयर चुनते रहे। भाजपा ने लगातार दो चुनाव मेयर के जीते हैं। 10 साल से निगम में भाजपा का ही कब्जा है। पहले नारायण चौपड़ा और फिर सुशीला कंवर राजपुरोहित भाजपा से मेयर बने। पिछली बार पार्षद का संख्या बल पूरा नहीं था, राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, फिर भी मेयर भाजपा का जीता। चुनाव की कमान सांसद व केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के पास थी।
इस बार भी मेयर के लिए डायरेक्ट वोट नहीं पड़ रहे हैं। पार्षद ही मेयर चुनेंगे। इस कारण एक एक पार्षद बड़ा अनमोल है। हर पार्षद पर दोनों पार्टियां नजरें गड़ाए हुए हैं। इस बार भी मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के मध्य है। कुछ वार्डों में वामपंथी व बसपा है। मगर इस बार कई वार्डों में नागौर सांसद व आरएलपी के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने भी एंट्री की है। यह बड़ी राजनीतिक घटना है। आरएलपी ने अनेक वार्डों में मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है और उससे निगम में बहुमत का आंकड़ा गड़बड़ाना तय लगता है।

आरएलपी निकाय चुनाव को लेकर गंभीर है
सांसद हनुमान बेनीवाल की आरएलपी नगर निगम चुनाव को लेकर गम्भीर है। उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीकानेर निगम चुनाव का प्रभारी हनुमान बेनीवाल ने अपने छोटे भाई व पूर्व विधायक नारायण बेनीवाल को बनाया है। जिन्होंने टिकट वितरण से लेकर चुनाव प्रचार तक की कमान अपने हाथ में रखी है। चुनावी रणनीति का संचालन भी नारायण बेनीवाल ही कर रहे हैं।
राजस्थान के दिग्गज जाट नेता, किसान केसरी स्व रामेश्वर डूडी का बीकानेर गृह जिला है और उनके हजारों समर्थक हैं। डूडी के निधन के बाद से वे निराश हैं। हनुमान व डूडी के गहरे पारिवारिक सम्बन्ध थे, इस कारण उनके वैक्यूम को भरने का प्रयास नागौर सांसद का है।
अनेक वार्डों के समीकरण को उलझा दिया आरएलपी ने
आरएलपी ने निगम चुनाव में अनेक वार्डों के हार - जीत के समीकरण को उलझा दिया है। वार्ड 1, 7, 8, 9, 10, 11, 32, 33, 49, 64 में स्थिति को बदलने का काम आरएलपी ने किया है। इसके अलावा भी कुछ वार्ड और हैं। इन वार्डों के परिणाम मेयर के चुनाव को काफी हद तक प्रभावित करेंगे। क्योंकि आरएलपी के उम्मीदवार व प्रभारी नारायण बेनीवाल अपने सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल की तर्ज पर आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ रहे हैं। इस कारण बीकानेर नगर निगम चुनाव में काफी उलटफेर के कयास लगाए जा रहे हैं इस बार।
पंचायत चुनाव की रिहर्सल भी है
आरएलपी निगम चुनाव में नारायण बेनीवाल के नेतृत्त्व में दमखम के साथ उतरी है, क्योंकि उसकी नजर बीकानेर के पंचायत राज चुनाव पर है। हनुमान बेनीवाल उस चुनाव में आरएलपी को उतारने की पहले ही घोषणा कर चुके हैं। यह घोषणा दोनों मुख्य राजनीतिक दलों के कान खड़े किए हुए हैं।
ऐसा माना जा रहा है कि आरएलपी निगम चुनावों के जरिये पंचायत राज चुनावों की रिहर्सल भी कर रही है। पंचायत राज चुनाव में आरएलपी का दखल रहेगा, यह तो पिछले विधानसभा चुनाव के समय से ही अहसास हो गया। श्रीकोलायत, लूणकरणसर, श्रीडूंगरगढ़, नोखा में आरएलपी की मजबूत टीम भी है। जिसने पंचायत राज चुनावों के लिए तैयारी भी आरम्भ कर दी।
मेयर चुनाव में आरएलपी के दखल का कयास
यदि आरएलपी निगम चुनावों 5 या इससे अधिक सीट भी ले आती है तो उसका मेयर के चुनाव में पूरा दखल रहेगा। क्योंकि भाजपा या कांग्रेस बहुमत के निकट पहुंचेंगे तो उनको कुछ पार्षदों की जरूरत होगी। अब यह सब कयास तो परिणाम पर निर्भर करते हैं। मगर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि निगम चुनाव के माध्यम से आरएलपी बीकानेर की राजनीति में मजबूती से प्रवेश तो कर ही लेगी।

