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किरण चौधरी, कुलदीप विश्नोई भी रेस में शामिल है, बाहरी उम्मीदवार का रिस्क नहीं लेगी भाजपा

बाहरी उम्मीदवार का रिस्क नहीं लेगी भाजपा
कांग्रेस से कोई बड़ा नाम आने की संभावना
 

मधु आचार्य ' आशावादी '
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RNE Special.
 

10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का कार्यक्रम चुनाव आयोग ने जारी कर दिया है। इन सीटों पर आवश्यक हुआ तो 16 मार्च को वोटिंग होगी और उसी दिन चुनाव परिणाम भी घोषित कर दिए जायेंगे।
 

जिन 10 राज्यों में चुनाव होने है उनमें एक राज्य हरियाणा भी है। राजस्थान का पड़ौसी राज्य। पल पल बदलती राजनीति के माहिर नेताओं के इस राज्य को लेकर सदा उत्सुकता बनी रहती है। क्योंकि यहां ऐनवक्त पर उलटफेर एक बार नहीं अनेक बार देखे गए है। सीधे शब्दों में कहें तो यहां दलबदल करने में नेता जरा भी नहीं हिचकते है। एक मिनट में पाला बदल लेते है यहां के राजनेता।

लालों से चमकता रहा है हरियाणा:

हरियाणा अपने तीन लालों के कारण पूरे भारत में सदा चमकता रहा है। यह वो राज्य है जिसके तीन लाल, बंसीलाल, भजनलाल व देवीलाल, राजनीति के बड़े खिलाड़ी थे। जिनका केवल हरियाणा की राजनीति में नहीं अपितु देश की राजनीति में भी दखल रहा है। 

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प्रदेश की राजनीति इन नेताओं के इर्द गिर्द ही घूमती रही है। अब ये तीनों लाल दिवंगत हो गए, मगर उनकी पीढ़ियों ने राजनीतिक विरासत संभाल रखी है। बंसीलाल के परिजन जरूर कुछ बदले है। इस दिग्गज कांग्रेस नेता की बेटी किरण चौधरी और उनकी भी बेटी अब भाजपा में है। यही स्थिति भजनलाल के परिजनों की है। उनके एक पुत्र कुलदीप विश्नोई अब भाजपा में है।
 

देवीलाल के दो पोते अभय चौटाला व अजय चौटाला के अलग अलग दल है। दोनों का अपना राजनीतिक रुतबा है। कुल मिलाकर इन तीन लालों के कारण हरियाणा देश की राजनीति के केंद्र में रहा है।

दलबदल भी खूब हुआ है:

हरियाणा को दलबदल की विपुल गतिविधियों वाला राज्य भी माना जाता है। सबसे बड़ा दलबदल तो जनता पार्टी के शासन में हुआ। हरियाणा में जनता पार्टी की भजनलाल की सरकार थी। केंद्र में भी उसी दल की थी। केंद्र में सरकार बदली, कांग्रेस आ गयी। रातों रात भजनलाल अपने पूरे मंत्रिमंडल व विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए।

पिछली बार राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस की किरण चौधरी ने वोट भाजपा को दे दिया, कांग्रेस हार गई। उससे भी पहले कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। कुल मिलाकर हरियाणा में एक भी ऐसा दल नहीं जिसे दलबदल का रोग न लगा हो। इस वजह से ही इस बार के राज्यसभा चुनाव को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।

दो सीटों पर होंगे चुनाव:

हरियाणा में 16 मार्च को 2 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होंगे। ये दोनों सीटें भाजपा की है। एक तो किरण चौधरी की सीट खाली हो रही वहीं दूसरी भी रामप्रकाश की। 
हरियाणा में 90 विधायक है। एक सीट जीतने के लिए 31 वोट चाहिए। कांग्रेस के पास 38 विधायक है। इस तरह भाजपा व कांग्रेस की 1 - 1 सीट पक्की है, बशर्ते कोई क्रॉस वोटिंग न
हो। 

टिकट के लिए मारामारी:

भाजपा में टिकट को लेकर ज्यादा ही हलचल है। यहां किरण चौधरी का कार्यकाल पूरा हो रहा है और वे कांग्रेस छोड़कर आई थी। वे टिकट की दावेदार है। भजनलाल के सुपुत्र किरण चौधरी से भी 2 साल पहले कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ गए थे, वे भी टिकट के दावेदार है। इनके अलावा भाजपा के 7 दावेदार और है। मगर सबसे रोचक नाम है राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया। वे राजस्थान में पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे। बाद में उनको हरियाणा का चुनाव में प्रभारी बनाया गया। उनके नेतृत्त्व में भाजपा ने हरियाणा में सरकार बनाई। उनका भी इस कारण वहां से राज्यसभा के लिए नाम चल रहा है। वे जाट नेता है और सांगठनिक अनुभव भी है। हरियाणा के बाद उन्होंने दिल्ली व बिहार में भी चुनाव का काम देखा था। पार्टी उनको पुरस्कृत कर सकती है टिकट देकर। 

 

वहीं कांग्रेस में भी टिकट आसान नहीं। राज्य की गुटीय राजनीति को थामने के लिए बाहरी उम्मीदवार को पार्टी उतार सकती है। भाजपा व कांग्रेस से कौन उम्मीदवार होंगे, इसका पता लगने में थोड़ा समय लगेगा। दोनों दल सोचकर ही निर्णय लेंगे।

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