Rajasthan : राजस्थान में अफीमची हो रहे तोते, नशे की हालात में कर रहे अजीबोगरीब हरकत
तोते रसदार व ताजा फलों के शौकिन होते है और अक्सर आपको तोतों का झूंड किस ने किसी फल के बाग के आसपास मंडरता हुआ नजर आएगा, लेकिन राजस्थान के मेवाड़ व हाड़ौती में तोते अफीमची हो गए है। यह तोते अफीम के इतने शौकिन हो गए है कि वह नशे में मदहोश होकर अजीबोगरीब हरकत करने लगे है।
अफीम के नशे में यह तोते कहीं तारों या पेड़ की टहनी पर उल्टे लटके हुए दिखाई देंगे। अगर अफीम की खेती करने वाले किसान अगर उनको उड़ाना चाहे तो वह उड़ नहीं है। अफीम के शौकिन हुए यह तोते अफीम की खेती करने वाले किसानों को काफी नुकसान कर रहे हैं। तोतों की यह नशे की आदत प्रदेश के कई जिलों में अफीम की खेती करने वाले किसानों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है।
इन इलाकों में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले तोते अफीम के फूलों और डोडों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे है। हालात यह है कि तोते लगातार खेतों में पहुंचकर डोडे खा रहे हैं और नशे की हालत में नजर आने लगे है। किसानों का कहना है कि फसल पकने के समय तोते झुंड के रूप में खेतों पर टूट पड़ते है।
एक अनुमान के अनुसार, तोते अफीम की फसल को करीब 20 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा रहे है। कई बार डोडे अधखाए रह जाते है, जिससे अफीम की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके चलते किसानों को लाखों रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अफीम के नशे में धुत्त तोतों का व्यवहार असामान्य हो जाता है। कुछ समय के लिए वे उड़ने में भी असमर्थ हो जाते हैं। नशे की हालत में ये तोते आवारा कुत्तों और अन्य शिकारी जानवरों का आसान शिकार बन रहे हैं।
डरते नहीं हैं ये तोते
तोते अफीम के डोडों में मौजूद नशीले रस का स्वाद लेते हैं और धीरे-धीरे इसके आदी हो जाते हैं। तोतों के झुंड दिन में कई बार खेतों पर हमला करते हैं। ये डोडों को काटते हैं और उन्हें लेकर उड़ जाते हैं। ये तोते इतने शातिर हो गए हैं कि आवाज करने पर भी नहीं डरते और चुपचाप फसल को नुकसान पहुंचाते रहते हैं।
पटाखे और जाल भी फेल
तोतों से फसल बचाने के लिए किसान अपने स्तर पर कई प्रयास कर रहे हैं। पटाखे फोड़कर, ढोल बजाकर और जाल बिछाकर उन्हें भगाने की कोशिश की जाती है, लेकिन तोते बार-बार लौट आते हैं। बड़ी संख्या में किसानों ने खेतों में नायलॉन नेट लगाना शुरू किया है। एक हेक्टेयर खेत में नेट लगाने पर करीब 35 हजार रुपए तक का अतिरिक्त खर्च आ रहा है। इसके अलावा किसान चमकदार टेप और डरावने पुतलों का भी सहारा ले रहे हैं।

