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PBM Hospital : Hanuman Beniwal सरकार पर बरसे, पूछा- कब तक मां-बहनों की जिंदगी स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी की भेंट चढ़ती रहेगी

 
RNE Bikaner-Nagaur
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी प्रभावित होने के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।
बेनीवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से सवाल किया कि आखिर हर बड़ी घटना के बाद केवल जांच के आदेश देकर जिम्मेदारी से कब तक बचा जाएगा।
सांसद ने लिखा कि कोटा के बाद अब बीकानेर में भी सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की किडनी खराब होने का मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि जब मरीजों की हालत गंभीर होकर आईसीयू तक पहुंच जाती है, तब सरकार मशीनें लगाने और सुविधाएं बढ़ाने की घोषणाएं करती है। बड़ा सवाल यह है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न ही क्यों होती है?
बेनीवाल ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या मरीजों की जान की कीमत अब केवल एक प्रेस नोट और जांच समिति तक सीमित रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विज्ञापनों में बेहतर स्वास्थ्य मॉडल की तस्वीर पेश करती है, जबकि जमीनी स्तर पर मरीज और उनके परिजन भय और असुरक्षा के माहौल में इलाज कराने को मजबूर हैं।
आरएलपी प्रमुख ने कहा कि हर घटना के बाद "कारणों की जांच होगी" कहकर मामले को टाल दिया जाता है, लेकिन राजस्थान की जनता जानना चाहती है कि यदि लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा और दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक माताओं और बहनों की जिंदगी स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी की भेंट चढ़ती रहेगी।
पीबीएम अस्पताल की घटना को लेकर प्रदेश में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं और विपक्ष सरकार से पारदर्शी जांच के साथ जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।

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