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राजस्थान में उल्टा पड़ गया पीएम मोदी का राजनीतिक दांव! 
 

बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाह रहे थे मोदी, अफसरों ने पानी फेरा, मजाक भी बनवा दिया

 

 


RNE Barmer-Jaipur. 

राजस्थान में पचपदरा रिफायनरी का उद्घाटन करने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाषण में एक ऐसी चूक कर गए जिससे उनका बड़ा राजनीतिक दांव उल्टा पड़ गया। जो प्रभाव वे छोड़ना चाहते थे वह तो दूर रहा उलटे मोदी का मजाक तक बन गया। अब पूरा विपक्ष मोदी को निशाने पर ले रहा है। सोशल मीडिया मीम से भर गया है।

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दरअसल पीएम मोदी ने रिफायनरी का उद्घाटन करने के साथ ही इस परिसर में पौधरोपण किया। मोदी ने अपने हिसाब से खेजड़ी का पौधा लगाया उसी के बारे में अपने भाषण में भी बोला लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि उन्हें जो पौधा लगाने को दिया गया वो खेजड़ी की बजाय पीपल का था।

मोदी खेजड़ी से देना चाहते थे खास संदेश : 

जब मोदी भाषण में खेजड़ी बोल रहे थे, उसकी व्याख्या कर रहे थे, और उनकी सोशल मीडिया पोस्ट पर भी यही जा रहा था तो यह तय है कि उन्हें खेजड़ी ही लगाना था। खेजड़ी लगाकर वे  जो राजनीतिक संदेश वे देना चाहते थे उसे राजस्थान खासतौर पर पश्चिमी राजस्थान के लोग बहुत अच्छी तरह समझ सकते हैं। 

खेजड़ी की बात इसलिए.. : 

बात दें कि खेजड़ी न केवल राजस्थान का राज्यवृक्ष हैं वरन इसको लेकर बड़ा धार्मिक जुड़ाव है और पश्चिमी राजस्थान में इस समय जो सबसे बड़ा मुद्दा है वह है खेजड़ी बचाओ आंदोलन। राजस्थान में सोलर पार्क लगाने के लिये लाखों की तादाद में खेजड़ी काट दी गई। बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर आदि जिलों में इसे बचाने के लिये बड़ा आंदोलन चला। 

खासतौर पर बिश्नोई समाज देशभर से इस मसले पर बीकानेर में जुट गया। भजनलाल सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। संत सड़क पर उतार आए। अनशन शुरू हो गया। खुद सीएम भजनलाल ने बार-बार वार्ता की। पुख्ता कानून के बिना आंदोलन खत्म करते नहीं देख कानून बनाने की घोषणा कर दी। विधानसभा में भी सीएम इस मुद्दे पर बोले।  

दरअसल सरकार के लिये सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देना है जहां समय की बड़ी जरूरत है वहीं "एक पेड़ माँ के नाम" लगाने वाली सरकार और पार्टी पर लाखों पेड़ कटवाने का आरोप भी लग रहा है। वह भी ऐसा पेड़ जिसका धार्मिक महत्व है और जिसे बचाने के लिये इतिहास में सैकड़ों लोग पेड़ के साथ ही कट गए। "राजस्थान का खेजड़ली आंदोलन" इसीलिए दुनियाभर में पढ़ाया जाता है। 

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ऐसे में मोदी एक ओर जहां ऊर्जा के बड़े संयंत्र का उद्घाटन कर रहे थे वही देश में सर्वाधिक ग्रीन एनर्जी देने जा रहे प्रदेश में इस ऊर्जा के लिये खेजड़ी को बलिदान करने के आरोप से भी बचना चाह रहे थे। यही वजह है कि उन्होंने खेजड़ी का पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संदेश देने और राजस्थान, हरियाणा में बिश्नोई समाज को साधने की कोशिश की। 

यहां अफसरों की गलती से दांव उल्टा पड़ गया। मोदी ने खेजड़ी समझकर जो पौधा लगाया दरअसल वह पीपल का था। अब जब सारा प्लान खेजड़ी के लिहाज से था तो मोदी ने पौधा लगाने के बाद खेजड़ी के हिसाब से भाषण भी दे दिया।

मजाक तब बन गया जब पौधा लगाने का फोटो सामने आया। इस फोटो में मोदी पौधा लगा रहे हैं और राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और पेट्रोलियम मंत्री हरदीपसिंह पुरी पास खड़े हैं। फोटो में साफ दिख रहा है कि मोदी पीपल का पौधा लगा रहे हैं जबकि भाषण में उन्होंने खेजड़ी बोला। 

ऐसे में जहां इस चूक से मोदी का राजनीतिक संदेश जहां गायब हो गया वही उल्टा देशभर में इसका मजाक भी बन गया। हालांकि कुछ लोगों पर इसके लिये गाज गिरनी तय है लेकिन जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई इस गाज से नहीं हो सकती। 

यहां एक दिलचस्प बात यह भी है कि मोदी जब-जब बाड़मेर या पश्चिमी राजस्थान के दौरे पर आते हैं तब-तब कुछ न कुछ ऐसा हो जाता है जो मजाक या तकलीफ का कारण बनता है। मसलन, एक बार जब वे पश्चिमी राजस्थान में आय तो यहां के सर्वाधिक पूज्य माने जाने वाले लोक देवता रामदेवजी की जन्मस्थली के बारे में एकदम गलत तथ्य बोल गए। मोदी ने तब कहा, रामदेवजी का जन्म जम्मू-कश्मीर में हुआ था। उन्होंने इस लिहाज से कश्मीर और राजस्थान का रिश्ता जोड़ते हुए लंबा-चौड़ा भाषण दे दिया। बात दें कि मान्यता के मुताबिक रामदेवजी का जन्म ऊँडू काश्मीर में हुआ जो राजस्थान के ही बाड़मेर में हैं।

इसी रिफायनरी के उद्घाटन तीन महीने पहले होना था। कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले रिफायनरी में भीषण आग लग गई। दौरा टालना पड़ा। अब भी जब मोदी उद्घाटन करने आय उससे ठीक पहले बाड़मेर में तूफ़ानी बारिश हो गई। आयोजन स्थल के टेंट उखड़ गए। मोदी की सभा रिफायनरी के भीतर छोटे, सुरक्षित हिस्से में रखी गई। यह आम सभा की बजाय एक संक्षिप्त सभा रही।

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